हाईकोर्ट में बोली सिंगल मदर: स्‍पर्म डोनर का नाम नहीं बताऊंगी, बेटी का बर्थ सर्टिफिकेट बनवा दीजिए

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मुंबई। एक महिला ने बॉम्‍बे हाईकोर्ट में अपील की है कि उसे उसकी बेटी का बर्थ सर्टिफिकेट चाहिए लेकिन वो उसके पिता का नाम नहीं बताएगी। 31 वर्षीय महिला का कहना है कि उसकी बच्‍ची अज्ञात स्‍पर्म डोनर के जरिए हुई थी और वो उसका नाम नहीं बताना चाहती। उसने कोर्ट से यह भी निवेदन किया है कि उसे इसके लिए बाध्‍य नहीं किया जाए। महिला के वकील उदय वरुनजिकर ने कोर्ट में कहा कि उसका बच्चा टेस्ट ट्यूब बेबी से हुआ था। जस्टिस अभय ओका और जस्टिस प्रदीप देशमुख की बेंच को उन्होंने बताया कि स्पर्म एक अज्ञात शख्स से मिला था।

 एक महिला ने बॉम्‍बे हाईकोर्ट में अपील की है कि उसे उसकी बेटी का बर्थ सर्टिफिकेट चाहिए लेकिन वो उसके पिता का नाम नहीं बताएगी।

अब हाईकोर्ट ने इस मामले को बीएमसी को जवाब देने को कहा है। महिला ने अपनी याचिका में कहा है कि वह अविवाहित है और अगस्‍त 2016 में बेटी को जन्‍म दी थी। जस्टिस अभय ओका और जस्टिस प्रदीप देशमुख की बेंच को उन्होंने बताया कि स्पर्म एक अज्ञात शख्स से मिला था। महिला ने कहा है कि उसने बीएमसी को दिसंबर में एक नोटिस भेजा था, लेकिन कोई जवाब नहीं आया तो वह हाईकोर्ट आई है। सिंगल पैरेंट्स के लिए सुप्रीम कोर्ट ने मां के पक्ष में पूर्व में फैसला दिया है।

याचिकाकर्ता ने अदालत के 2015 के उस फैसले का भी जिक्र किया है जिसमें कोर्ट ने कहा था कि सिंगल मदर को अपने बच्चे के बर्थ सर्टिफिकेट में बच्चे के जैविक पिता का नाम का लिखवाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। इस बीच जैविक पिता के नाम को लेकर एक अन्य मामले में कोर्ट ने बच्चे के जैविक पिता को अदालत में बुलाया है।

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English summary
A 31-year-old Nalasopara resident who had a daughter through a sperm donor has approached the Bombay high court seeking a birth certificate for her child without the father’s name.

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