Lok Sabha Chunav: बारामती में ननद-भाभी के बीच कैसा है चुनावी समीकरण, सुप्रिया, सुनेत्रा में किसका पलड़ा भारी?

Baramati Lok Sabha Election 2024: महाराष्ट्र की बारामती लोकसभा सीट दशकों से वीआईपी सीट रही है। क्योंकि, यहां से एनसीपी संस्थापक शरद पवार के परिवार का कोई सदस्य उम्मीदवार जरूर रहता है। लेकिन, इस बार इस हाई-प्रोफाइल सीट की अहमियत और भी बढ़ गई है। क्योंकि, यहां पवार परिवार के ही दो सहस्य प्रमुख रूप से आमने-सामने हैं- सुप्रिया सुले और सुनेत्रा पवार।

एनसीपी शरदचंद्र पवार ने यूं तो पहले से ही बारामती से मौजूदा सांसद सुप्रिया सुले का टिकट कंफर्म कर रखा था। लेकिन, बुधवार को पार्टी की ओर से इसकी औपचारिक घोषणा की गई है। दूसरी तरफ उनकी भाभी और राज्य के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार एनसीपी के प्रत्याशी के तौर पर पहले से ही मैदान में उतर उतरी हुई हैं।

baramati lok sabha seat

32 साल से पवार परिवार की सीट रही है बारामती
बारामती लोकसभा सीट पर पिछले 32 वर्षों से शरद पवार का कब्जा है। 1957 से 1977 तक यह सीट कांग्रेस के पास थी। इस सीट से खुद शरद पवार 6 बार सांसद रहे हैं और पहली बार 1984 में वे राजीव लहर में भारतीय कांग्रेस (सोशलिस्ट) के टिकट पर चुने गए थे।

शरद पवार की बहू के लिए वोट मांग रहे हैं अजित पवार
शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले तीन बार और अजित पवार एक बार यहां से सांसद चुने जा चुके हैं। अबकी बार भी अजित पवार किसी 'पवार' (सुनेत्रा पवार) को ही जिताने की अपील कर रहे हैं। गौर करने वाली बात है कि उनकी चचेरी बहन का नाम सुप्रिया सुले है, सुप्रिया पवार नहीं। बारामती के मतदाताओं से वे कह रहे हैं कि शरद पवार की बेटी को उन्होंने तीन बार मौका दिया, अबकी बार उनकी बहू को अवसर दें।

वे कह रहे हैं, '1991 याद कीजिए जब आपने बेटे को चुनाव, मतलब मुझे। बाद में आपने पिता को चुना, मतलब पवार साहेब और उसके बाद आपने बेटी के लिए लगातार तीन बार वोट किया, मतलब सुप्रिया सुले। इसी तरह अब बहू (सुनेत्रा पवार) को चुनिए। सबकुछ बैलेंस हो जाएगा।' उपमुख्यमंत्री का कहना है कि ऐसा करने से बेटा, पिता, बेटी और बहू सभी खुश होंगे।

सुनेत्रा पवार को 'पवार' परिवार का नहीं मिल पा रहा समर्थन
लेकिन, तथ्य यह भी है कि पवार परिवार के ज्यादातर सदस्य (अजित पवार, उनके बेटे और पत्नी को छोड़कर) इस चुनाव में सुप्रिया सुले के साथ खड़े हैं और उनके पक्ष में चुनाव प्रचार कर रहे हैं। अजित पवार पर उनके बड़े भाई ही चाचा शरद पवार के साथ सही बर्ताव नहीं करने का आरोप लगा रहे हैं। लेकिन, अजित पवार का दावा है कि भले ही परिवार के लोग मुंह फेर रहे हों, बारामती के लोग उनके साथ हैं।

2019 और 2014 में क्या हुआ?
2019 के लोकसभा चुनाव में सुप्रिया सुले एनसीपी के टिकट पर यहां 52.53% वोट लेकर चुनाव जीती थीं। उनके खिलाफ बीजेपी की कंचन राहुल कूल को 40.61% वोट मिले थे। लेकिन, इस बार अजित पवार की एनसीपी महाराष्ट्र में सत्ताधारी महायुति गठबंधन या एनडीए का हिस्सा है, इसलिए बीजेपी ने यह सीट छोड़ दी है।

इसी सीट पर 2014 में सुप्रिया सुले को 48.88% वोट मिले थे। जबकि, उनके खिलाफ खड़े राष्ट्रीय समाज पक्ष (RSPS) के महादेव जगन्नाथ जानकर को 42.35% वोट मिले थे। दोनों ही चुनावों में सुप्रिया सुले कांग्रेस गठबंधन या यूपीए की उम्मीदवार थीं।

सुप्रिया, सुनेत्रा में किसका पलड़ा भारी?
सुप्रिया सुले पहली बार 2006 में राज्यसभा के माध्यम से संसद में दाखिल हुईं और फिर 2009 से अपनी पिता की बारामती सीट से लोकसभा के लिए चुनी जाने लगीं। लेकिन, पहली बार उन्हें अपनी भाभी से ही कड़े चुनावी मुकाबले का सामना करना पड़ रहा है। पिछले चुनावों के मुकाबले इस बार यहां का समीकरण भी बदला हुआ है।

मसलन, सुप्रिया सुले को महाविकास अघाड़ी या इंडिया ब्लॉक में शामिल पार्टियों कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) का समर्थन प्राप्त है। वहीं उनकी भाभी सुनेत्रा पवार बीजेपी और शिवसेना की भी संयुक्त उम्मीदवार हैं। इसलिए, अबकी बार यहां चाचा-भतीजे दोनों की ही सियासी प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। बारामती लोकसभा सीट पर तीसरे चरण में यानी 7 मई को मतदान होना है।

बारामती में मतदान का ट्रेंड
चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक 2019 के लोकसभा चुनावों में बारामती में 21,14,663 मतदाता थे। इनमें 11,12,357 पुरुष और 10,02,273 महिला मतदाता थीं। जबकि, पिछले चुनाव में कुल 13,04,728 मतदाताओं ने मतदान किया था। वहीं, 2014 में बारामती में सिर्फ 10,66,556 मतदाताओं ने वोट डाले थे।

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