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Maharashtra: नितिन गडकरी ने नागपुर के चुनाव अभियान में 370, राम मंदिर से क्यों बनाई दूरी?

Maharashtra Lok Sabha Election 2024: नागपुर लोकसभा सीट बीजेपी के लिए कई मायने में बहुत ही महत्वपूर्ण है। मोदी सरकार के हाई-प्रोफाइल मंत्री नितिन गडकरी यहां से तीसरी बार चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं यहां राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) का मुख्यालय भी है।

लेकिन, देश के अन्य हिस्सों की तरह यहां चुनाव प्रचार में जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 को हटाने या अयोध्या में पवित्र राम जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर के निर्माण का मुद्दा नहीं नजर आया है।

nagpur nitin gadkari

नागपुर में तीसरी बार मैदान में हैं नितिन गडकरी
नागपुर में पहले चरण में 19 अप्रैल को मतदान है। चुनाव प्रचार के अंत तक यहां दो ही प्रमुख राजनीतिक मुद्दे नजर आए- विकास और बेहतर जन-सुविधाएं। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजपथ मंत्री नितिन गडकरी की उम्मीदवारी के चलते यह देश की वीवीआईपी सीट में शामिल है।

गडकरी अपने कार्यों की वजह से विपक्षी दलों के नेताओं के बीच भी लोकप्रिय माने जाते हैं। उन्होंने भारतीय राजनीति में अपनी छवि तेज गति से इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी विकास योजनाओं को अंजाम देने वाले नेता के रूप में तैयार की है। वह लगातार तीसरी बार यहां से संसद जाने के लिए चुनाव मैदान में हैं।

कांग्रेस को जातिगत समीकरण पर भरोसा
अपने कार्यों के दम पर उनका लक्ष्य इस बार 5 लाख से ज्यादा वोटों से चुनाव जीतने का है। पिछला चुनाव वे करीब ढाई लाख वोटों से जीते थे। उनके मुकाबले में इस बार कांग्रेस ने अपने नागपुर जिला इकाई के अध्यक्ष और स्थानीय एमएलए विकास ठाकरे को उतारा है।

एक तरफ गडकरी को अपनी निजी छवि, विकास पुरुष वाला व्यक्तित्व का लाभ मिलने का भरोसा है तो कांग्रेस को दलित, मुस्लिम और कुनबी समीकरण पर पक्का यकीन है। ठाकरे कुनबी जाति से हैं, जो कि ओबीसी है।

कांग्रेस को लगता है कि जिस तरह से वंचित बहुजन अघाड़ी, एआईएमआईएम ने उम्मीदवार नहीं देकर उसका परोक्ष समर्थन किया है, वहीं बीएसपी का प्रत्याशी नहीं होने का भी फायदा उसे ही मिल सकता है।

विकास और काम जाति से ज्यादा मायने रखते हैं- गडकरी
ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक जब गडकरी से उसने पूछा कि क्या कांग्रेस उम्मीदवार की जाति की वजह से वह इस बार नागपुर में अपने लिए चुनौती देखते हैं तो उन्होंने कहा, 'मैंने नाना पटोले को हराया है, जो कि ठाकरे से बड़े कुनबी नेता हैं। विकास और काम जाति से ज्यादा मायने रखते हैं।'

मुसलमानों के बीच गडकरी की अच्छी छवि
अपने बेटे के साथ गडकरी को सुनने पहुंचे एक स्थानीय दर्जी मोहसिन अली कहते हैं, गडकरी एक 'नेक आदमी हैं और अपनी पार्टी के नेताओं से बेहतर हैं।' कोविड महामारी के दौरान गडकरी ने उन्हें दवाइयां और मास्क उपलब्ध करवाए थे। गडकरी के करीबी नेताओं को पक्का यकीन है कि उन्हें मुसलमानों का भी कुछ वोट जरूर मिलेगा। अपने सभी भाषणों में वह लोगों से यही कहते रहे हैं कि 75% मतदान सुनिश्चित करें।

गडकरी ने 370, राम मंदिर से क्यों बनाई दूरी?
जब गडकरी से पूछा गया कि वह राम मंदिर और आर्टिकल 370 जैसे मुद्दों का ज्यादा जिक्र नहीं करते हैं। क्योंकि, यह तो भाजपा के लिए दोनों प्रमुख मुद्दों में से हैं। इसपर बीजेपी नेता ने कहा कि लोगों को इन चीजों के बारे में पता है। उन्होंने कहा, 'मैं उन्हें नागपुर के लिए अपना विजन बताना चाहता हूं।'

नागपुर सीट पर 22 लाख से ज्यादा वोटर हैं। इनमें से दलित, मुस्लिम और कुनबी मतदाताओं की संख्या करीब 12 लाख हो जाती है। ऐसे में राजनीति के धुरंधर गडकरी ने शायद बहुत ही सोची-समझी रणनीति के तहत ऐसे मुद्दे से परहेज किया, जिससे उन्हें पसंद करने वाले मुस्लिम वोटर पर कोई विपरीत असर पड़े।

इसे भी पढ़ें- कैसे लोकसभा चुनाव से पहले राम मंदिर मुद्दे पर बैकफुट है कांग्रेस? तमिलनाडु तक में दिखने लगा है असर

हालांकि भाजपा के नेता तो सिर्फ उनकी बड़े मार्जिन से जीत की ही चर्चा करते रहे हैं। उनकी कोशिश है कि सिर्फ हिंदी-भाषी और मध्यम वर्ग के ज्यादा से ज्यादा वोटर वोट डालने पहुंच जाएं।

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