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दुर्लभ बीमारी से ग्रसित मासूम के लिए लोगों ने दान किए 16 करोड़ रुपए, लगा दुनिया का सबसे महंगा इंजेक्शन

हैदराबाद, 12 जून: तेलंगाना के हैदराबाद में रहने वाले एक तीन साल के बच्चे की जान बचाने के लिए हजारों लोग एक साथ ऑनलाइन आए, उसे एक दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी के इलाज के लिए 16 करोड़ रुपए का इंजेक्शन दिलाने में मदद की। इस बच्‍चे का नाम अयांश गुप्ता है बुधवार को हैदराबाद के रेनबो अस्पताल में दुनिया की सबसे महंगी दवा ज़ोलगेन्स्मा, की सिंगल खुराक दी गई 62,450 लोगों ने क्राउड-फंडिंग के माध्यम से ₹ ​​14.84 करोड़ का योगदान दिया।जिसके कारण इस बच्‍चे को ये इंजेक्‍शन लग सका।

दो साल से इलाज के लिए कर रहे थे इंतजार

दो साल से इलाज के लिए कर रहे थे इंतजार

बता दें लड़के के माता-पिता, योगेश गुप्ता और रूपल गुप्ता, स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी नामक एक न्यूरोमस्कुलर बीमारी का पता चलने के बाद उसका इलाज करने के लिए दो साल से अधिक समय से इंतजार कर रहे थे। वे लगभग चार महीनों में क्राउड-फंडिंग प्लेटफॉर्म इम्पैक्टगुरु के माध्यम से उसके इलाज के लिए अधिकांश धन जुटाने में कामयाब हो पाए।

65,000 दानदाताओं ने मासूम की बचाई जिंदगी

65,000 दानदाताओं ने मासूम की बचाई जिंदगी

बच्‍चे के पिता योगेश गुप्ता ने दानदाताओं और डॉक्टरों को उनकी मदद के लिए धन्यवाद दिया। भावुक होकर योगेश ने कहा "बहुत-बहुत धन्यवाद... लगभग 65,000 दानदाताओं का धन्यवाद जो दान करने के लिए आगे आए और अयांश को बचाया। हम बहुत खुश हैं कि हमें आखिरकार यह दवा मिल गई जिसका हम लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। यह अयांश का जीवन बदल सकता है। इसलिए हम बहुत, बहुत खुश हैं।

अयांश को मिला नया जीवन

अयांश को मिला नया जीवन

योगेश गुप्‍ता ने कहा कि उनका और उनकी पत्नी का दिल टूट गया था, जब जन्म के कुछ महीनों के बाद, उनके बेटे को दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी का पता चला था, जिससे उसके हाथ और पैर कमजोर हो गए थे और वह बिना सहारे के खड़े या बैठने में सक्षम नहीं था। रीढ़ की हड्डी और मस्तिष्क के रूट में तंत्रिका कोशिकाओं के नुकसान के कारण विकार से पीड़ित व्यक्ति मांसपेशियों की गति को नियंत्रित करने में असमर्थ होता है। इसका इलाज जीन थेरेपी की मदद से किया जाता है, जो महंगा होता है। अयांश के माता-पिता ने शुरू में उन्हें उन फार्मा कंपनियों की प्रतीक्षा सूची में रखा, जो दुर्लभ बीमारी वाले बच्चों के इलाज को प्रायोजित करती हैं। हालांकि, उन्हें कोई सफलता नहीं मिली जिसके बाद उन्होंने ऑनलाइन क्राउड-फंडिंग की ओर रुख किया और अब उनका बच्‍चे की जान उन 65 हजार दयालु लोगों के कारण बच पाएगी जिन्‍होंने अयांश के लिए दान किया।

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