Lok Sabha Election 2024: माधवी लता के डर से कट्टर 'दुश्मनों' में भी दोस्ती, पहली बार फंस गए ओवैसी!

Lok Sabha Election 2024 Hyderabad Chunav: हैदराबाद लोकसभा सीट एमआईएम (एआईएमआईएम) नेता असदुद्दीन ओवैसी के लिए अभी तक सेफ सीट मानी जाती रही है। यह उनके पुरखों की सीट है। लेकिन, इस बार यहां का चुनावी समीकरण बदलता नजर आ रहा है। ओवैसी और कांग्रेस हाल तक भाषणों में एक-दूसरे के खिलाफ आग उगलते रहे थे, अचानक उनके सुरों में नरमी आ गई है।

हैदराबाद सीट पर बीजेपी ने इस बार नया प्रयोग किया है। पार्टी की प्रत्याशी माधवी लता न सिर्फ महिला हैं, बल्कि स्थानीय भी हैं और पुराने हैदाराबाद की मुस्लिम बहुल सीट पर अपने साजमाजिक कार्यों की वजह से बहुत ही ज्यादा लोकप्रिय भी हैं। उनके बारे में कहा जाता है कि समाज सेवा उन्होंने कभी हिंदू-मुसलमान देखकर नहीं की। ट्रिपल तलाक के खिलाफ वह मुस्लिम महिलाओं की आवाज बन चुकी हैं।

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    कांग्रेस-एमआईएम में हो गई दोस्ती
    बदली परिस्थितियों में कभी सियासत में एक दूसरे की कट्टर दुश्मन रही कांग्रेस और एआईएमआईएम अब एक-दूसरे से दोस्ती निभाने की कसमें खाने लगी हैं। हैदराबाद के चार बार से सांसद असदुद्दीन ओवैसी जो पिछले साल नवंबर में हुए विधानसभा चुनावों तक मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को आरएसएस का एजेंट बता रहे थे, अब वे कह रहे हैं कि कांग्रेस के चलते तेलंगाना में गंगा-जमुनी तहजीब और मजबूत होगी।

    राहुल गांधी पहले ओवैसी पर लगाते थे भाजपा से साठगांठ का आरोप
    कांग्रेस नेता राहुल गांधी कभी एमआईएम पर बीजेपी से पैसे लेकर कैंडिडेट खड़े करने के आरोप लगाते थे। यह कहते नहीं थकते थे कि 'जहां भी बीजेपी चाहती है, वहां एमआईएमआईएम के लोग सैल्यूट मारकर कैंडिडेट बिठा देते हैं।'

    हैदराबाद का विकास एमआईएम के बिना मुमकिन नहीं- रेवंत रेड्डी
    अब कांग्रेसी सीएम रेवंत रेड्डी कहते हैं कि 'चुनाव खत्म होते ही सोचा कि हैदराबाद को डेवलप करना है तो एमआईएम को साथ लेकर बढ़ना ही होगा।' इसपर ओवैसी जवाब देते हैं कि 'हम आपका पूरा सहयोग करने की कोशिश करेंगे।' इफ्तार पार्टी के नाम पर बार-बार गले मिलने के मौके तलाशे गए हैं।

    ओवैसी को मुस्लिम वोट बंटने का सता रहा है डर!
    सियासी दुश्मनी से अनौपचारिक राजनीतिक दोस्ती में तब्दील हुए इस संबंध का असर भी नजर आने लगा है। हैदराबाद में ओवैसी लगातार पांचवीं बार चुाव लड़ रहे हैं। लेकिन, उन्हें डर है कि करीब 60% मुसलमान वोटरों वाली इस सीट पर कांग्रेस ने मुस्लिम उम्मीदवार उतारा तो वोट बंट सकता है और फायदा भाजपा को जा सकता है।

    कांग्रेस ने मुस्लिम उम्मीदवार का टिकट रोका?
    यही वजह है कि एक रिपोर्ट के मुताबिक जो कांग्रेस यहां से पहले मोहम्मद फिरोज को टिकट देना चाह रही थी। वह अब मुस्लिम वोट बंटने की आशंका के चलते उनका टिकट रोक चुकी है। अब फिरोज भी विकल्पों की तलाश में जुटे हुए हैं।

    ओवैसी को मनमानी के लिए सत्ता का अधिकार देना चाहती है कांग्रेस- माधवी लता
    कांग्रेस और एमआईएम के बीच की नई दोस्ती पर बीजेपी उम्मीदवार माधवी लता की भी नजर है। वो कहती है, 'आपकी यहां सरकार है और आप एआईएमआईएम के साथ अनाधिकारिक गठबंधन कर रहे हैं, आप पेपर पर इसकी घोषणा नहीं कर रहे, आप के पास राज्य सरकार है, पुलिस है, सब पर कंट्रोल है...'

    उनका आरोप है, 'आप पूरी सत्ता का गलत इस्तेमाल करने जा रहे हैं, मूलरूप से आप कह रहे हैं कि आप अनाधिकृत रूप से इस बार कांग्रेस की सत्ता का इस्तेमाल करने का मौका एआईएमआईम को देने जा रहे हैं, ताकि उन्हें गैर-कानूनी रूप से उनका वोट मिले और वे जो भी चाहते हैं करें।'

    कांग्रेस, ओवैसी, बीआरएस का डीएनए एक- बीजेपी
    वहीं भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी का कहना है कि 'कांग्रेस ने तय किया है कि ओवैसी का समर्थन करके उन्हें जिताएगी....बीआरएस, कांग्रेस, ओवैसी...तीनों का डीएनए एक ही है...ये पुराने शहर के हिंदुओं के खिलाफ बात करते हैं।'

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