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बड़े नेताओं की बिगड़ैल संतानें

भारत में बिगड़ैल औलाद के कारण अनेक नेताओं को मानसिक संताप और बदनामी झेलनी पड़ी है। महात्मा गांधी विश्व के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं, मगर उनके सबसे बड़े पुत्र हरिलाल गांधी सारी उम्र उनके लिए सिरदर्द बने रहे। हरिलाल पर नौकरी के दौरान गबन करने का आरोप लगा। महात्मा गांधी ने उन्हें पत्र लिखकर इस बात की निंदा की कि उन्होंने अपनी एक नजदीकी रिश्तेदार के साथ दुष्कर्म किया है। पिता-पुत्र के बीच मतभेद इतने बढ़े कि हरिलाल गांधी ने अपने पिता को चिढ़ाने के लिए इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया। उनका नाम अब्दुल लतीफ रखा गया। कहा जाता है कि उनका शव मुंबई के वेश्यालय में पड़ा हुआ मिला था। महात्मा गांधी और उनकी पत्नी कस्तूरबा गांधी दोनों अपने बिगड़े हुए बेटे की हरकतों की वजह से परेशान और बेबस थे।

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देश के एक अन्य प्रमुख नेता सरदार वल्लभ भाई पटेल भी अपने इकलौते बेटे दह्या भाई पटेल की हरकतों की वजह से सारी उम्र परेशान रहे। सरदार पटेल की पुत्री मणिबेन पटेल ने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि सरदार पटेल को इस बात की शिकायतें मिली थी कि उनके बेटे ने कुछ व्यापारियों से रिश्वत ली है। सिद्धांत प्रेमी सरदार पटेल इस बात से इतने आहत हुए कि उन्होंने अपने इकलौते बेटे से संबंध-विच्छेद कर लिया और उनकी अंतिम सांसों तक इकलौती बेटी मणिबेन पटेल उनकी देखभाल करती रही और उन्होंने पूरी उम्र विवाह नहीं किया।

देश के प्रमुख दलित नेता बाबू जगजीवन राम को भी उनके इकलौते बेटे सुरेश राम ने कभी चैन नहीं लेने दिया। जब बाबू जगजीवन राम संचार मंत्री थे तो सुरेश राम ने अपने से दोगुनी आयु की एक टेलीफोन ऑपरेटर अमरजीत कौर से प्रेम विवाह कर लिया। इससे चिढ़कर जब बाबूजी ने इस दंपत्ति को घर से निकाल दिया तो सुरेश राम ने बाबूजी की कोठी के बाहर धरना दे दिया। समाचारपत्रों में इस धरने की खबर खूब नमक मिर्च लगाकर प्रकाशित हुई, जिससे बाबूजी की प्रतिष्ठा को भारी धक्का लगा। बाद में बाबू जगजीवन राम की पत्नी इंदिरा देवी की प्रयासों से बाप-बेटे में समझौता हुआ और बाबूजी ने सुरेश राम को डिफेंस कॉलोनी में एक अलग बंगला खरीदकर दे दिया। इस विवाह से एक पुत्री भी पैदा हुई, जिसका नाम मेधावी कृति था, जो कुछ समय तक हरियाणा सरकार में मंत्री भी रहीं।

जनता पार्टी के शासनकाल में सुरेश राम की नजर मेरठ की एक लड़की सुषमा से लड़ गई। बाबूजी के राजनीतिक विरोधियों ने इस जोड़े की अनेक अश्लील तस्वीरें देश की राजधानी के गलियारों में बांटी। मेनका गांधी ने अपनी पत्रिका सूर्य में इन कामुक चित्रों को प्रकाशित तक कर डाला। इससे बाबूजी की बेहद बदनामी हुई। कहा जाता है कि इसी बदनामी के कारण वे जनता पार्टी के शासनकाल में प्रधानमंत्री बनते-बनते रह गए।

श्रीमती इंदिरा गांधी को लौह महिला कहा जाता है, मगर उनका बेटा संजय गांधी भी उनके लिए सिरदर्द साबित हुआ। इमरजेंसी के दौरान संजय गांधी ने जो हरकतें की थीं इसके कारण इंदिरा गांधी को जनता का कोपभाजन बनना पड़ा। जबरन नसबंदी और मारूती घोटाले के कारण जनता ने 1978 के चुनाव में इंदिरा गांधी को ठुकरा दिया और सत्ता उनके हाथ से खिसक गई।

मोरारजी देसाई को भी बहुत कड़क शख्सियत माना जाता है, मगर इकलौते लड़के कांति भाई के कारण वे बहुत परेशान रहे। कहा जाता है कि जब वे प्रधानमंत्री थे तो जनता पार्टी नेतृत्व के पास कांति भाई के भ्रष्टाचार के संबंध में अनेक गंभीर शिकायतें आई थीं और हाईकमान ने उनसे आग्रह किया था कि वे कांति भाई को अपने साथ प्रधानमंत्री निवास में न रखें, मगर मोरारजी ने इस अनुरोध को ठुकरा दिया। कहा जाता है कि कांति भाई की हरकतों के कारण उनकी पत्नी ने मुंबई में आत्महत्या की थी।

हरियाणा के मुख्यमंत्री चौधरी भजनलाल को भी उनके बड़े बेटे चंद्रमोहन के कारण काफी परेशानी झेलनी पड़ी। चंद्रमोहन एक महिला अनुराधा बाली के प्रेमपाश में फंस गए और उन्होंने अपनी पहली पत्नी और परिवार को छोड़कर अनुराधा बाली से विवाह करने के लिए हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया। उनका नया नाम चांद मोहम्मद और उनकी प्रेमिका का नाम फिजा रखा गया। भजनलाल उनकी हरकतों से इतने परेशान हुए कि उन्होंने समाचारपत्रों में विज्ञापन प्रकाशित करके चंद्रमोहन से संबंधविच्छेद की घोषणा कर डाली। बाद में चंडीगढ़ में अनुराधा बाली उर्फ फिजा की रहस्यमय ढंग से मौत हो गई। चंद्रमोहन की यह हरकत उन्हें बहुत महंगी पड़ी और उन्हें हरियाणा की राजनीति से संन्यास तक लेना पड़ा।

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(इस लेख में व्यक्त विचार, लेखक के निजी विचार हैं. आलेख में दी गई किसी भी सूचना की तथ्यात्मकता, सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं।)

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