व्लादीमिर पुतिन का वो मास्टर स्ट्रोक जिसने केजीबी एजेंट से बनाया मिस्टर प्रेसिडेंट!

व्लादीमिर पुतिन रविवार को एक बार फिर से रूस के बादशाह साबित हुए हैं। यहां हुए चुनावों के बाद आए एग्जिट पोल्स के नतीजों के बाद चुनाव आयोग ने पुतिन को देश का अगला राष्ट्रपति घोषित कर दिया है। अब पुतिन अगले छह वर्ष तक फिर से रूस पर राज करेंगे।

मॉस्को। व्लादीमिर पुतिन रविवार को एक बार फिर से रूस के बादशाह साबित हुए हैं। यहां हुए चुनावों के बाद आए एग्जिट पोल्स के नतीजों के बाद चुनाव आयोग ने पुतिन को देश का अगला राष्ट्रपति घोषित कर दिया है। अब पुतिन अगले छह वर्ष तक फिर से रूस पर राज करेंगे और इसके साथ ही वह इस देश पर स्टालिन के बाद सबसे ज्यादा समय तक शासन करने वाले राष्ट्रपति बन जाएंगे। पुतिन के लिए चुनाव एकतरफा थे और चुनावों से पहले ही सबको मालूम था कि एक बार सत्ता फिर से उनके ही हाथ में आएगी। एक केजीबी एजेंट से राष्ट्रपति बनने तक का सफर पुतिन के लिए जहां काफी एतिहासिक रहा तो रूस के लिए काफी रोचक रहा है। एक नजर डालिए दुनिया के इस सबसे ताकतवर राष्ट्रपति के राजनीतिक जीवन पर और कैसे एक जासूस से यह शख्स सत्ता के चरम पर पहुंच सका।

एजेंट से बने पीएम

एजेंट से बने पीएम

65 वर्ष के पुतिन साल 2000 से रूस की सत्ता में हैं। पिछले 18 वर्षों में उन्होंने या तो प्रधानमंत्री या फिर राष्ट्रपति के तौर पर अपनी जिम्मेदारियों को पूरा किया है। पुतिन ने अपना करियर रूस की इंटेलीजेंस एजेंसी केजीबी के साथ बतौर इंटेलीजेंस आॅफिसर शुरू किया था। पुतिन, रूस के राष्ट्रपति बोरिस येल्तिसन के करीबी रहे हैं और उन्हें येल्तिसन के प्रशासन में कई अहम रैंक्स भी दी जा चुकी हैं। साल 1998 में येल्तिसन सरकार के तहत पुतिन को फेडरल सिक्योरिटी सर्विस का हेड नियुक्त कर दिया गया।

अगस्त 1999 में आया टर्न

अगस्त 1999 में आया टर्न

अगस्त 1999 में उस समय के रूसी राष्ट्रपति बोरिस येल्तिसन ने अपने प्रधानमंत्री सरगे स्टेफसिन को हटाकर उनकी जगह पुतिन को प्रधानमंत्री बनाया। यहीं से पुतिन के लिए राजनीतिक सफर की शुरुआत भी हो गई। येल्तिसन ने यह भी ऐलान किया कि वह पुतिन को अपना उत्तराधिकारी देखना चाहते हैं। दिसंबर 1999 में येल्तिसन ने अपने इस्तीफा की घोषणा की और पुतिन को चुनाव होने तक कार्यवाहक राष्ट्रपति नियुक्त कर दिया। मार्च 2000 में रूस में चुनाव हुए और पुतिन पहली बार राष्ट्रपति चुने गए। उन्हें 53 प्रतिशत वोट मिले थे। पुतिन ने मिखाइल कास्यानोव को अपना प्रधानमंत्री नियुक्त किया।

पुतिन का वह मास्टर स्ट्रोक

पुतिन का वह मास्टर स्ट्रोक

साल 2004 में पुतिन को चुनाव में 74 प्रतिशत वोट मिले और पुतिन फिर से राष्ट्रपति चुने गए। साल 2007 में पुतिन ने उस समय के प्रधानमंत्री मिखाइल फ्रैडकोव के अनुरोध पर सरकार को भंग कर दिया। इसके बाद विक्टर जुबकोव रूस के नए प्रधानमंत्री बने। साल 2008 में रूसी संविधान के एक नियम के तहत पुतिन को राष्ट्रपति पद के लिए तीसरी बार चुनाव नहीं लडने दिया गया। इस वर्ष पहले उप प्रधानमंत्री दमित्रि मेदवेदेव को रूस का राष्ट्रपति चुना गया। मेदवेदेव ने तुरंत ही पुतिन को पीएम नियुक्त कर दिया। पीएम रहते हुए पुतिन पूरे रूस पर अपना प्रभुत्व कायम रखे थे। साल 2011 में राष्ट्रपति मेदवेदेव ने पुतिन को अपना उत्तराधिकारी बताया और साल 2012 में जब चुनाव हुए तो पुतिन फिर से क्रे​मलिन पहुंच गए।

पुतिन ने चली शतरंज की एक चाल

पुतिन ने चली शतरंज की एक चाल

हालांकि साल 2012 में चुनाव से पहले ही रूस में पुतिन विरोधी प्रदर्शन शुरू हो गए थे। लोगों ने पुतिन पर चुनाव में धांधली करने का आरोप लगाया। मार्च 2012 में विरोध प्रदर्शन के बाद भी पुतिन को तीसरी बार राष्ट्रपति पद संभालने का मौका मिला। पुतिन ने मेदवेदेव को पीएम बनाया। उस समय मीडिया ने इस सत्ता परिवर्तन को 'रोकिरोवा' नाम दिया था जिसका मतलब शतरंज की एक चाल होता है।

 साल 2017 में जाहिर कर दिए थे अपने इरादे

साल 2017 में जाहिर कर दिए थे अपने इरादे

रूस में वर्तमान चुनावों से पहले साल 2017 में ही पुतिन ऐलान कर चुके थे कि वह साल 2018 में फिर से छह वर्षोंं के लिए रूस का राष्ट्रपति बनना चाहते हैं। रविवार को आए नतीजों से साफ हो गया कि पुतिन का सपना पूरा हो गया है और अब साल 2024 तक उनकी बादशाहत कायम रहने वाली है।

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