S-500: हाइपरसोनिक मिसाइलों का काल.. रूस ने तैयार किया एक वार में 10 टारगेट को उड़ाने वाला हथियार
S-500 AD Missiles: रूस के रक्षा मंत्री ने दावा किया है, कि इस साल के अंत तक रूस की सेना को एस-500 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम का सैंपल सौंप दिया जाएगा। रूस का ये दावा सनसनीखेज है, क्योंकि इसका मतलब रूस ने एस-500 मिसाइल डिफेंस सिस्टम तैयार कर लिया है, जिसके बारे में दावा है, कि ये हाइपरसोनिक मिसाइलों को भी मार गिराने में सक्षम है।
रूस की सरकारी समाचार एजेंसी TASS की रिपोर्ट में रूसी रक्षा मंत्री सर्गेई सोइगु की ये घोषणा, रूस की सैन्य क्षमताओं में एक महत्वपूर्ण प्डेवलपमेंट का संकेत देती है। शोइगु ने दावा किया है, कि एस-500 प्रणाली दो रूपों में सेना को सौंपी जाएगी, एक लंबी दूरी की एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम और दूसरी एंटी मिसाइल डिफेंस कॉम्पैल्स।

रूसी रक्षा मंत्री का ये खुलासा उस वक्त हुआ है, जब रूस ने अपनी सेना को एस-300 S-300V4 मिसाइल डिफेंस सिस्टम को सौंपने की बात कही है। इसके अलावा रूस, अपनी सेना को Buk-M3 और Tor-M2U मिसाइल सिस्टम और नेक्स्ट जेनरेशन रडार स्टेशन भी सौंप रहा है।
S-500 मिसाइल डिफेंस सिस्टम के बारे में जानिए
S-500 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम, जिसे प्रोमेथियस वायु रक्षा प्रणाली के रूप में जाना जाता है, उसे अल्माज़-एंटे एयर एंड स्पेस डिफेंस कॉर्पोरेशन विकसित कर रहा है। इसे इस लिहाज से डिजाइन किया जा रहा है, कि वर्तमान में दुनिया में जितनी मिसाइलें बनी हैं, या फिर फाइटर जेट्स बने हैं और आने वाले कई सालों में जितनी भी नई मिसाइलें और लड़ाकू विमानों का निर्माण होगा, उन सभी को ट्रैक करने और मार गिराने में ये सक्षम हो।
रूस ने साल 2007 में एस-400 मिसाइल एयर डिफेंस सिस्टम तैयार किया खथा और एस-500 का डेलवपमेंट साल 2010 में शुरू हो गया था, जबकि इस सिस्टम के डिजाइन पर काम 2011 में शुरू हुई थी। हालांकि, इसके प्रोडक्शन में कई सालों की देरी हुई है और अब रूस का टारगेट अगले साल तक इस मिसाइल डिफेंस सिस्टम का टेस्ट करना है।
रूस, S-500 को लेकर गेम-चेंजर होने का वादा करता है, जो कथित तौर पर पांचवीं पीढ़ी के विमान, लोअर ऑर्बिट सैटेलाइट और मिसाइल खतरों का मुकाबला करने में सक्षम है। जबकि, S-500 के शामिल होने में देरी ने चिंताएं बढ़ा दी हैं, लेकिन कुछ विशेषज्ञों ने प्रस्ताव दिया है, कि रूस घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एस-400 प्रणाली की चल रही मांग को पूरा करने को प्राथमिकता देने के लिए जानबूझकर अपने उत्पादन कार्यक्रम को बढ़ा सकता है।
भारत भी रूस से एस-400 मिसाइल सिस्टम खरीद रहा है और अभी भी रूस ने 2 सिस्टम्स की आपूर्ति नहीं की है और माना जाता है, कि रूस पर लगे प्रतिबंधों की वजह से प्रोडक्शन में देरी हो रही है। दुनिया के कई देश एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीद चुके हैं या खरीद रहे हैं, जिनमें चीन, भारत और तुर्की जैसे देश शामिल हैं।
जिसकी वजह से एस-500 मिसाइल सिस्टम को काफी कड़ी परीक्षा से गुजरना पड़ सकता है। इसके अलावा, इस साल की शुरुआत में, रिपोर्टों ने संकेत दिया था, कि एस-500 ने हाइपरसोनिक लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से ट्रैक और इंटरसेप्ट किया था, जो रूस की बढ़ती ताकत को दिखाता है, खासकर ऐसे वक्त में, जब यूक्रेन में लड़ाई चल रही है और रूस का नोटा के साथ जंग का खतरा लगातार मंडराता रहता है।
एस-500 प्रोमेथियस एयर डिफेंस सिस्टम
रूस ने S-500 एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल सिस्टम की काफी प्रशंसा की है और इसे बेजोड़ करार दिया है। रूस का दावा है, कि ये लोअर ऑर्बिट की ऊंचाई तक दुश्मनों के हथियारों को ट्रैक करने और मार गिराने की क्षमता रखता है। एक्सपर्ट्स का मानना है, कि इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के दौरान एस-500 मिसाइल सिस्टम काफी कारगर साबित हो सकता है।
एस-500 को वर्तमान में चल रही पुरानी A-135 मिसाइल प्रणालियों के उत्तराधिकारी के रूप में डिज़ाइन किया गया है, जो एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम का नेक्स्ट वेरिएंट होगा, जो एक व्यापक रक्षा नेटवर्क का निर्माण करेगा।
इसकी तैनाती का मकसद, रूस के भीतर महत्वपूर्ण प्रशासनिक और औद्योगिक केंद्रों की सुरक्षा करना, हवाई खतरों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है।
सेंटर फॉर इंटरनेशनल एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज ने जो जानकारियां उपलब्ध करवाई हैं, उसके मुताबिक, S-500 में चार 40N6M लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें या एक लॉन्च वाहन पर लगे दो 77N6 इंटरसेप्टर शामिल हैं।
इसकी प्रमुख विशेषताओं में इसकी लंबी दूरी की मिसाइल क्षमताएं हैं। 40N6M लंबी दूरी की मिसाइलों में 400 किलोमीटर तक मार करने की क्षमता है, जबकि 77N6 सीरिज के इंटरसेप्टर और भी ज्यादा रेंज का दावा करते हैं और वे लगभग 600 किलोमीटर की ऊंचाई तक हथियारों को ट्रैक करने और मारने की क्षमता रखते हैं।
इसके अलावा, S-500 एक सोफिस्टिकेटेड रडार कॉम्प्लेक्स से भी लैस है, जिसमें प्रति बैटरी चार रडार वाहन शामिल हैं। इसमें 91N6E(M) S-बैंड एक्विजिशन रडार, 96L6-TsP C-बैंड एक्विजिशन रडार, 76T6 मल्टी-मोड एंगेजमेंट रडार और 77T6 एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल एंगेजमेंट रडार शामिल हैं।
ये अत्याधुनिक रडार सिस्टम, S-500 को एक विशाल दूरी पर बैलिस्टिक और हवाई, दोनों लक्ष्यों का पता लगाने में सक्षम बनाते हैं, जिसमें बैलिस्टिक लक्ष्यों के लिए 2,000 किलोमीटर और हवाई खतरों के लिए 800 किलोमीटर तक की क्षमताएं शामिल हैं।
क्रेमलिन का दावा है, कि S-500 रूस की किंजल "हाइपरसोनिक" मिसाइलों को रोकने में सक्षम एकमात्र हथियार है। और अगर ये दावा सही है, तो अमेरिका की नींद उड़ाने के लिए ये दावा काफी है, क्योंकि अमेरिका अभी तक हाइपरसोनिक मिसाइलों के निर्माण में कामयाब नहीं हो पाया है।












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