Putin: पुतिन फिर से चुने गए रूस के राष्ट्रपति, जानिए उनसे जुड़े कुछ प्रमुख विवाद
Putin: व्लादिमीर पुतिन ने रूस का राष्ट्रपति चुनाव जीत लिया है, जिससे उनका शासन 2030 तक बढ़ गया। पुतिन को दिसंबर 1999 में तत्कालीन राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन द्वारा कार्यवाहक राष्ट्रपति नामित किया गया था और तब से वह राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री के रूप में ताकतवर पद पर बने हुए हैं।
2020 में संवैधानिक परिवर्तनों के परिणामस्वरूप 2030 के बाद भी पुतिन फिर से सत्ता में आ सकेंगे और संभावित रूप से 2036 तक सत्ता में बने रहेंगे। लेकिन पुतिन से जुड़े ऐसे कई विवाद हैं, जो आलोचना का विषय रहे हैं। इनमें क्रीमिया और यूक्रेन पर कब्जा, विपक्ष और मीडिया को दबाना, ट्रंप से अच्छे संबंध आदि शामिल हैं। आईए जानते हैं पुतिन से जुड़े ऐसे ही कुछ प्रमुख विवादों के बारे में!

क्रीमिया और यूक्रेन पर कब्जा!
2014 में रूस ने क्रीमिया के यूक्रेनी क्षेत्र पर कब्जा कर लिया था, जो कि व्लादिमीर पुतिन से जुड़ा एक बड़ा विवाद है। इस घटना में रूस ने यूक्रेन के हिस्से में जो क्रीमिया पेनिनसुला था, उसपर हमला बोला और बाद में उस पर कब्जा कर लिया, जिसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खूब आलोचना की गई।
क्रीमिया पर रूस के कब्जे के बाद एक रेफरेंडम कराया गया, जिसमें क्रीमिया ने रूस के साथ मिलने पर सहमति जताई। हालांकि, इस रेफरेंडम को यूक्रेन और कई अन्य देशों ने नकारा और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन माना। दुनिया के कई प्रमुख देश आज भी क्रीमिया को यूक्रेन का ही हिस्सा मानते हैं। और जब फरवरी 2022 में रूस ने यूक्रेन पर हमला किया तो एक बार फिर पुतिन विवादों में घिर गए।
अन्य देशों के चुनाव में दखलंदाजी
पुतिन पर 2016 में अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव और अन्य यूरोपीय देशों के चुनावों में दखलअंदाजी करने के आरोप लगे हैं। इन आरोपों में साइबर हमलों से लेकर, गलत सूचना फैलाना और चुनाव के परिणाम को बदलने का उद्देश्य शामिल थे। 2016 में अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में 12 रूसी सीक्रेट एजेंट्स को सरकारी कंप्यूटरों को हैक करने, दस्तावेजों को चुराने और चुनाव में गड़बड़ी करने के लिए दोषी ठहराया गया था।
इसी तरह, 2017 में फ्रांस के राष्ट्रपति चुनाव में तत्कालीन राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन के कैंपेन की हैकिंग में भी रूस की दखलअंदाजी रही है। अमेरिकी इंटेलिजेंस के मुताबिक, रूस लगभग 100 लोकतांत्रिक देशों के चुनावों में जनता का विश्वास खत्म करने के लिए जासूस, सोशल मीडिया और 'स्टेट-रन मीडिया' का उपयोग करता है।
सीरियाई गृहयुद्ध में रूसी सेना
सीरिया का गृहयुद्ध वर्ष 2011 में शुरू हुआ। लेकिन 2015 में व्लादिमीर पुतिन की रूसी सेना ने सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल-असद का साथ देते हुए गृहयुद्ध में सैन्य हस्तक्षेप (मिलिट्री इंटरवेंशन) किया। रूस की इस कार्रवाई की वजह से सीरिया में ह्यूमन राइट्स की धज्जियां उड़ गई क्योंकि रूस नागरिक क्षेत्रों पर भी अंधाधुंध बमबारी कर रहा था, जिससे स्थिति और ज्यादा बिगड़ गई।
रूस ने सितंबर 2015 में खुले रूप से हस्तक्षेप किया था, जिसमें रूस ने सीरिया में अपनी सेना तैनात की और सरकार विरोधी ताकतों के खिलाफ एयर स्ट्राइक की। मॉस्को के इस 'बीच में टांग अड़ाने' की आलोचना न केवल आईएसआईएस जैसे आतंकवादी संगठनों ने की, बल्कि अन्य संगठनों ने भी की जो सरकार का विरोध कर रहे थे, जिनमें से कुछ को अमेरिका का समर्थन प्राप्त था।
विपक्ष को दबाते हैं पुतिन
पुतिन की राजनीतिक विपक्षियों को दबाने के लिए आलोचना की जाती है। पुतिन के विरोधियों को भाषण और सभा की स्वतंत्रता नहीं दी जाती, यहां तक कि पुतिन पर तो चुनाव में धोखाधड़ी के आरोप भी है। पिछले 10 सालों में, पुतिन ने रूस में विपक्ष और आलोचकों को दबाने के लिए कई हथकंडे अपनाए हैं, जिनमें गिरफ्तारियां, मुकदमे और जेल की सजाएं आम है।
रूस में विपक्ष को इस कदर दबा दिया गया है कि चुनाव का महत्व ही कम हो गया है, विपक्ष लगभग खत्म हो गया है। पिछले महीने ही पुतिन के सबसे बड़े आलोचकों में से एक, एलेक्सी नवलनी की मौत हो गई। नवलनी को उग्रवाद के आरोप में 19 साल की सजा दे दी गई थी। पुतिन पर कई मौकों पर नवलनी की जान लेने की कोशिश करने के आरोप लगते रहे हैं।
दुनिया में सबसे अमीर हैं पुतिन
पुतिन से जुड़े विवादों में एक विवाद ये भी शामिल है कि पुतिन दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति है। यह बात किसी और ने नहीं, बल्कि 2022 में दुनिया के सबसे अमीर आदमी बने टेस्ला के सीईओ एलोन मस्क ने कही थी। उन्होंने कहा था कि मुझे ऐसा लगता है कि पुतिन मेरे से काफी ज्यादा अमीर है।
ऐसा माना जाता है कि पुतिन की कुल संपत्ति 200 बिलियन अमेरिकी डॉलर है। पुतिन ने यह खुलासा आधिकारिक रूप से किया है कि वह सालाना 1,40,000 अमेरिकी डॉलर तनख्वाह लेते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक पुतिन 20 कारों, 700 गाड़ियों, 58 विमानों और हेलीकॉप्टरों और एक 716 मिलियन अमेरिकी डॉलर के हवाई जहाज के मालिक है, जिसका नाम 'फ्लाइंग क्रेमलिन' है।
लेकिन आपको बता दें कि विवाद यह नहीं है कि पुतिन दुनिया के सबसे अमीर आदमी हो सकते हैं, विवाद यह है कि पुतिन और उनके करीबी लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं जिनमें गबन और अवैध वित्तीय लेनदेन शामिल हैं। कई रिपोर्ट्स में ऐसे उदाहरण सामने आए हैं जहां पुतिन ने आधिकारिक रूप से अधिकृत होने से पहले अनुबंध पर हस्ताक्षर किए जिससे भारी कमीशन मिला और अनुबंधों को पूरा नहीं किया।
पत्रकारों की दबाई जाती आवाज
रूस में पत्रकारों को पुतिन के राज में कई चुनौतियों से गुजरना पड़ता है, क्योंकि सेंसेटिव टॉपिक पर रिपोर्टिंग करने या सरकार की आलोचना करने के लिए उन्हें धमकी, सेंसरशिप और हिंसा का सामना करना पड़ता है। रूसी पत्रकारों को अक्सर मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, यदि वो ऐसे सवाल पूछते हैं जो सरकार नहीं चाहती है।
फरवरी 2022 में रूस द्वारा यूक्रेन पर आक्रमण करने के बाद से लगभग सभी इंडिपेंडेंट मीडिया पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, उन्हें ब्लॉक कर दिया गया है या 'विदेशी एजेंट' के रूप में लेबल कर दिया गया है। पुतिन ने हाल के कानून में सरकार की आलोचना करने वाले पत्रकारों पर दबाव को और बढ़ा दिया है, जिससे गलत खबर फैलाने वाले दोषी लोगों की संपत्ति जब्त करने की अनुमति मिलती है।
पुतिन के ट्रंप से अच्छे संबंध
पुतिन और पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच संबंध पुतिन के लिए आलोचना का विषय रहे हैं। जबकि, ट्रंप अमेरिका का राष्ट्रपति रहते हुए और उसके बाद भी पुतिन की प्रशंसा करते रहे हैं और उन्हें मजबूत नेता बताते हैं। ट्रंप ने पुतिन की कई मौकों पर तारीफ की है, 2016 में राष्ट्रपति चुनाव के दौरान उनकी आलोचना भी नहीं की (अमेरिकी राष्ट्रपतियों का रूस की आलोचना करने का लंबा इतिहास रहा है), ट्रंप की अमेरिका में रूस से संबंधित लोगों से भी अच्छी बातचीत है।
इसके अलावा, नाटो पर ट्रंप की टिप्पणियां, पुतिन के कार्यों की प्रशंसा, और रूसी अधिकारियों के साथ ट्रंप की बातचीत यह बताती है कि दोनों नेताओं के बीच अच्छे संबंध हैं। पश्चिमी देशों के रुख के विपरीत, ट्रंप के कार्यकाल में अमेरिका की रूस के प्रति दोस्ती अच्छी रही है।
LGBTQ+ एक्टिविस्ट की हत्या
रूस में LGBTQ+ एक्टिविस्ट को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, रूस में समलैंगिकता कानूनी है लेकिन ज्यादातर लोग इसे अस्वीकार करते हैं। रूस में LGBTQ+ राइट्स का समर्थन करना चरमपंथी माना जाता है और समलैंगिकता को बढ़ावा देना अवैध है। पुतिन के राज में रूस में ट्रांसजेंडर को भी कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, जिसमें ट्रांसजेंडर के 'लिंग-पुष्टि' पर भी रोक है।
रूस में हाल ही में LGBTQ+ एक्टिविस्ट पर कार्रवाई के कानूनों को और भी सख्त कर दिया है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने 'इंटरनेशनल LGBTQ+ मूवमेंट' को चरमपंथी घोषित कर दिया गया है। रूस में 2020 में 'सेम-सेक्स मैरिज' पर भी संवैधानिक रूप से रोक दी गई है।












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