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पाकिस्तान और ईरान ने कैसे ताजिकिस्तान को बनाया चरमपंथियों का देश, मॉस्को हमले की Inside Story

Islamist Attack On Moscow Concert Hall: रूस के एक सांसद ने टेलीग्राम पर लिखा है, ISIS के आतंकियों ने मॉस्को कॉन्सर्ट हॉल पर हमला करने के लिए जिस काम का इस्तेमाल किया था, उस कार से उन आतंकियों के ताजिकिस्तान के पासपोर्ट पाए गये हैं।

आतंकी हमले के बाद मॉस्को से करीब 340 किलोमीटर की दूरी पर रूस के दक्षिण-पश्चिम में ब्रांस्क क्षेत्र पुलिस ने भाग रहे चार आतंकियों को गिरफ्तार किया था और प्रारंभिक जांच के बाद रूसी पुलिस ने कहा है, कि हिरासत में लिए गए चार संदिग्ध पूर्व मध्य एशियाई देश ताजिकिस्तान से आए प्रवासी नागरिक हैं।

Islamist Attack On Moscow Concert Hall

रूसी पुलिस ने कहा है, कि 22 मार्च को कॉन्सर्ट हॉल पर बमबारी में ग्यारह संदिग्धों में से चार ताकिकिस्तान मूल के हैं और प्रवासी मजदूर के तौर पर ये मास्को आए थे। जबकि, एक प्रेस स्टेटमेंट में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा, कि "इस हमले को इस्लामिक चरमपंथियों ने अंजाम दिया था।" हालांकि, उन्होंने किसी संगठन का नाम नहीं लिया, लेकिन इस्लामिक स्टेट-खुरासान (ISKP) समूह ने घोषणा की, कि उसने ये आतंकवादी हमला करवाया है।

रूस-ताजिकिस्तान के कैसे रहे हैं संबंध?

1991 से पहले ताजिकिस्तान सोवियत संघ का ही हिस्सा था, लेकिन सोवियत संघ के विघटन के बाद ये रूस के करीबी सहयोगियों में शामिल हो गया। हालांकि, ताजिकिस्तान की रूसी संघ से चिपके रहने की अपनी सुरक्षा मजबूरियां थीं। सोवियत सत्ता के दौरान ताजिकिस्तान कम्युनिस्ट पार्टी के सचिव, राष्ट्रपति इमोमाली रहमोन, 1991 में स्वतंत्र मध्य एशियाई गणराज्य ताजिकिस्तान के पहले राष्ट्रपति बने। वह अभी भी उस पद पर बने हुए हैं और वह मॉस्को के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में से एक साबित हुए हैं।

ताजिकिस्तान 90% पहाड़ी क्षेत्र है और यहां बहुत कम कृषि योग्य भूमि है। यह तत्कालीन सोवियत संघ का सबसे गरीब राज्य था, ज्यादातर अविकसित और आर्थिक रूप से कमजोर क्षेत्र। स्वतंत्रता की घोषणा के बाद, ताजिकिस्तान रूस से काफी मदद हासिल करता रहा और उसने मास्को के साथ एक रक्षा समझौते पर भी हस्ताक्षर कर रखे हैं।

1996 में जब अफगान तालिबान ने पहली बार काबुल पर कब्ज़ा कर लिया और रूस समर्थित अफगान राष्ट्रपति डॉ. नगीबुल्लाह को मार डाला, तो ताजिकिस्तान को डर था, कि तालिबान आगे जाकर ताजिक-अफगान सीमा पार कर सकता है और दुशांबे में एक कट्टरपंथी शासन लागू कर सकता है। लिहाजा, ताजिकिस्तान ने सुरक्षा के लिए रूस से ही मदद हासिल की।

Islamist Attack On Moscow Concert Hall

ताकिस्तान में गृहयुद्ध

मध्य एशिया के सभी उभरते स्वतंत्र राज्यों में से, केवल ताजिकिस्तान ही था, जिसे इस्लामी चरमपंथियों और राष्ट्रीय सरकार के बीच छह साल के लंबे गृह युद्ध में घसीटा गया था। युद्ध में लगभग एक लाख लोग मारे गए और अंततः, ईरान के हस्तक्षेप से, देश में सामान्य स्थिति बहाल हो पाई। हालांकि, खूनी युद्ध ने देश में गंभीर आर्थिक मंदी पैदा कर दी थी, और ग्रामीण और शहरी ताजिकिस्तान में युवाओं के बीच बेरोजगारी एक भयावह घटना शुरू हो गई।

गृह युद्ध का प्रभाव काफी खतरनाक साबित हुआ और दुशांबे में ताजिक सरकार को ऋण और सहायता के लिए अंतरराष्ट्रीय ऋण देने वाली एजेंसियों से संपर्क करना पड़ा। धीमी गति से, सरकार देश में कुछ सामान्य स्थिति बहाल करने में सक्षम हो पाई और छोटी विकासात्मक परियोजनाओं और सुधारों में भाग लेना शुरू किया।

ताजिकिस्तान समाज में चरमपंथ

ताजिक, मध्य एशिया के पूरे क्षेत्र में सबसे अधिक शांतिप्रिय लोग हैं। उन्होंने प्राचीन पारसी संस्कृति की अच्छी और बुनियादी विशेषताओं को बरकरार रखा है, क्योंकि यह क्षेत्र ज़रादुश्तारा और अहुरा मज़्दा के विश्वास का उद्गम स्थल था, जिसने हजारों वर्षों तक प्राचीन ईरान और तुरान पर प्रभाव रखा था।

तुरान (ग्रीक इतिहासकारों द्वारा ट्रांस-ऑक्सियाना भी कहा जाता है) की विजय के बाद, रूढ़िवादी अरब इस्लामवादी, जो इस्लाम का प्रचार करने के लिए निकले थे, वो ताजिकिस्तान में गार्म और कोलाब जैसे कुछ क्षेत्रों में जमा होते गये। इन जनजातियों की संतानें हमेशा कट्टर इस्लामवादी रही हैं, जिन्होंने ताजिक समाज पर हावी होने की कोशिश की है।

इन इस्लामिरक चरमपंथियों को शह देने के लिए अफगानिस्तान, पाकस्तान, ईरान और सऊदी अरब से इस्लामिक नेता नियमित तौर पर ताजिकिस्तान के गार्म, बदख्शां और कोलाब क्षेत्रों का दौरा करते रहे हैं। इन कट्टर इस्लामवादियों का एजेंडा मस्जिदों को हड़पना और इन केंद्रों को धर्मशिक्षा के लिए बनाना था। इस तरह, पूरी तरह से कट्टरपंथी विचारधारा वाले धार्मिक चरमपंथियों के बड़े कैडर ताजिकिस्तान में अस्तित्व में आ गए।

1991 में सोवियत संघ के विघटन और ताजिकिस्तान की स्वतंत्रता की घोषणा ने इन कट्टरपंथी तत्वों को सरकार के खिलाफ विद्रोह भड़काने के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान किया। उन्होंने इस्लामी वर्चस्व के उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए बाहरी गुप्त समर्थन का स्वागत किया। उन्होंने सेनाएं बनाईं और ताजिक राष्ट्रवादी सरकार के खिलाफ विद्रोह का ऐलान कर दिया।

भीषण गृहयुद्ध के बाद आखिरकार ताजिकिस्तान की सरकार ने इन इस्लामिक कट्टरपंथियों को हरा दिया और उन्हें बेअसर कर दिया। और इस दौरान भारी संख्या में इस्लामक चरपंथियों ने रूस की तरफ पलायन किया।

लेकिन, ISIS के अफगानिस्तान में उदय ने इन इस्लामिक चरमपंथियों को एक बार फिर से जिंदा कर दिया है और इसी का नतीजा 22 मार्च को कॉन्सर्ट हॉल में नरसंहार के रूप में देखा गया है।

Islamist Attack On Moscow Concert Hall

ताजिकिस्तान के खिलाफ क्या एक्शन लेगा रूस?

रूस की पुलिस ने अभी तक 11 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें से चार ताजिकिस्तान मूल के आतंकवादी हैं। रूस की खुफिया एजेंसियां और रूसी पुलिस, मामले की तह तक पहुंचेगी, इसमें कोई शक नहीं है।

रूस की जनता में न केवल ताजिकिस्तान से बल्कि अन्य सीएआर से भी प्रवासी मजदूरों के खिलाफ बहुत गुस्सा और नफरत फूट पड़ा है। रूस ने संदिग्ध प्रवासी मजदूरों के निर्वासन की योजना बनाई है। रूसी राजनीति में जेनोफोबिया की लहर चल रही है।

व्लादिमीर पुतिन अपने दुश्मनों को क्रूर सजा देने के लिए जाने जाते हैं और चेचन्या उनके गुस्से का अंजाम देख चुका है। लिहाजा, ताजिकिस्तान डरा हुआ है। लेकिन, एक्सपर्ट्स का मानना है, कि मॉस्को को सतर्क, धैर्यवान और समझदार रहना होगा, क्योंकि वो यूक्रेन युद्ध में फंसा हुआ है और अभी एक और मोर्चा खोलना, देश के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

इसके अलावा, सभी प्रवासी मजदूरों का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। उनमें से ज्यादातर लोगों को रूसी होने पर गर्व भी है। लिहाजा, अभी देखना होगा, कि आने वाले वक्त में रूस क्या कदम उठाता है और क्या ताजिकिस्तान को इसकी सजा भुगतना होगा, ये भी देखने वाली बात होगी!

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