भारत का दोस्त बना रहा 6th जेनरेशन लड़ाकू विमान, अमेरिका और चीन भी हैरान, कहा जा रहा आसमान का दानव!
MiG-41 6th-Gen Fighter Jet: भारत का दशकों से आजमाया हुए दोस्त रूस में छठवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान बनाने की कोशिशें तेज हो गईं हैं और ये रिपोर्ट कुछ ऐसी है, जो हरगिज अमेरिका और चीन को पसंद नहीं आएगी।
ऐसी रिपोर्ट है, कि रूस ने अपनी वायुसेना के बेड़े से MiG-31 को बदलने के लिए MIG-41 को भर्ती करने का फैसला किया है, जो एक छठवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान हो सकता है और कई मायनों में इस फाइटर जेट का आकाश का राक्षस भी कहा जा सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, रूस की विमानन इंजीनियरिंग अपनी सीमाओं को तेजी से आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है और MIG-41 के डेवलपमेंट पर तेजी से काम कर रहा है। रूस अगर इस फाइटर जेट का सटीक निर्माण करने में कामयाब हो जाता है, तो उसकी एयरफोर्स टेक्नोलॉजी ना सिर्फ एक नई सीमा रेखा का निर्माण करने में कामयाब होग, बल्कि दुनिया की एयरफोर्स ताकत में रूस सबसे आगे निकल जाएगा और यही वो वजह है, जो अमेरिका की नींद उड़ाने के लिए काफी है।
MIG-31 "फॉक्सहाउंड" की मैक्सिमम रफ्तार 2.83 मैक है और रूस का ये फाइटर जेट कई लेटेस्ट हथियारों और मिसाइल सिस्टम से सुसज्जित है और इसे 6× R-37 लंबी दूरी की मिसाइलों से भी लैस किया गया है। और अब रूस MIG-41 के निर्माण की तरफ कदम बढ़ा रहा है।
MIG-41 फाइटर जेट का डेवलपमेंट कैसा होगा?
आपको बता दें, कि MIG-41 PAK DP (Prospective air complex for long-range interception) 2030 के दशक के मध्य तक रूसी एयरोस्पेस बलों में मिकोयान मिग-31 को बदलने के लिए एक स्टील्थ सुपरसोनिक इंटरसेप्टर, भारी लड़ाकू विमान विकसित करने के लिए चलाया जा रहा रूसी फाइटर जेट कार्यक्रम है।
हालांकि, इसका फाइनल नाम क्या होगा, इसका फैसला इस फाइटर जेट का निर्माण किए जाने के बाद तय किया जाएगा, लेकिन ये फाइटर जेट छठी पीढ़ी की टेक्नोलॉजी और डिजाइनों से लैस होगा। कई रिपोर्ट्स में कहा गया है, कि PAK DP के डिजाइन को साल 2019 के अंत के आसपास फाइनल किया गय था।
जबकि, रूसी मिग कॉर्पोरेशन के जनरल-डायरेक्टर, साथ ही सुखोई कंपनी के प्रमुख, इल्या तारासेंको ने जुलाई 2020 में एक इंटरव्यू में कहा था, कि PAK DP को मिग-31 के डिजाइन को एडवांस करते हुए डिजाइन किया गया है।
तारासेंको ने यह भी कहा था, कि यह एक नया प्लेटफ़ॉर्म डिजाइन और निर्माण होगा, जो मैक नंबर 4-प्लस में सक्षम होगा, जो एक एंटी-मिसाइल लेजर सिस्टम से लैस होगा, और बहुत अधिक ऊंचाई पर, और यहां तक कि अंतरिक्ष के करीब उड़ान भरने की क्षमता से लैस होगा। इसकी फ्लाइंग स्ट्रेटोपॉज (45 किमी) और ट्रोपोपॉज (12 किमी) होगा।
इसके अलावा, MIG-41 फाइटर जेट में SU-57 फाइटर जेट में इस्तेमाल किए गये Izdeliye 30 इंजन के एडवांस वेरिएंट का उपयोग किया जा सकता है। AMNTC सोयुज ने अपनी वेबसाइट पर, पहले से विकसित R-579 300 इंजन, SU-57 के लिए संभावित मैच को लेकर कुछ जानकारियां सार्वजनिक की थी।
हालांकि, MIG-41 के लिए मुख्य चुनौती पल्स-डेटोनेशन इंजन का चल रहा डेवलपमेंट मालूम होता है, जो इस विमान को शक्ति देगा और इसके असाधारण भार और इसकी स्टील्थ टेक्नोलॉजी शक्ति को बर्दाश्त करने के काबिल होगा।
रूस एक इलेक्ट्रोमैग्नेटिक पल्स [EMP] बंदूक भी विकसित कर रहा है, जिसे हवाई युद्ध में गेम-चेंजर कहा जा रहा है और इस फाइटर जेट में इस बंदूक को अटैच किया जाएगा। इसके अलावा, रूस इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तोप का भी निर्माण कर रहा है, जिसके साल 2025 तक बन जाने की उम्मीद है और दावा किया गया है, इस फाइटर जेट में इस तोप को भी शामिल किया जा सकता है। वहीं, मिग-41, R-37M मिसाइलों से भी लैस हो सकता है।
वहीं, रूस की कोशिश ये भी है, कि आगे जाकर इस फाइटर जेट को मानव रहित लड़ाकू विमान में ढालने की भी है।
रूसी MIG-41 का निर्माण किस चरण में है?
जनवरी 2021 में मिकोयान के मालिक रोस्टेक कॉर्पोरेशन ने घोषणा की थी, कि PAK DP ने डेवलपमेंटल स्टेज में एंट्री कर ली है। वहीं, इसके पहले उड़ान का लक्ष्य साल 2025 रखा गया है, और अगर वाकई ये लक्ष्य 2025 है, तो इसका मतलब ये हुआ, कि इस फाइटर जेट के डिजाइन का काम बहुत पहले पूरा हो चुका होगा। और अब इस जेट के बॉडी के निर्माण का काम या तो चल रहा होगा, या पूरा होने वाला होगा।
वहीं, इस फाइटर जेट के इंजन का काम भी पूरा हो जाना चाहिए और अगर ये समय सीमा वास्तव में सही हैं, तो इसका मतलब ये हुआ, कि इस फाइटर जेट के प्रोटोटाइप का परीक्षण भी इस साल के अंत तक शुरू हो जाना चाहिए। लेकिन, रूस अपने इस फाइटर जेट को लेकर अत्यधिक गोपनीयता बरत रहा है, लिहाजा इसे लेकर अनुमान लगाना काफी मुश्किल है। लेकिन, यदि मिग-41 अगले साल यानि 2025 तक अपनी पहली उड़ान सफलतापूर्वक पूरी कर लेता है, तो इसके 2030 तक पूरी तरह से चालू होने और रूसी सेना में शामिल होने की पूरी उम्मीद बन जाएगी।
लेकिन रूस के पास इतना पैसा कहां से आएगा?
चीन और रूस, ये दोनों ही देश अपनी अपनी सेना को काफी तेजी के साथ आधुनिक बनाने के लिए काफी तेजी से काम कर रहे हैं और अपनी वायु क्षमता को आधुनिक बनाने में जुटे हैं।
और MIG-41 के निर्माण के पीछे रूस का यही महत्वाकांक्षी मकसद है, जैसे कि मल्टीस्पेक्ट्रल स्टील्थ, अल्ट्रा-हाई स्पीड, एक टर्बो-रैमजेट इंजन, हाइपरसोनिक हथियारों और लेजर को फायर करने और मार गिराने की क्षमता वाले लड़ाकू विमान का निर्माण, जो उपग्रहों को नष्ट करने के लिए अंतरिक्ष तक पहुंचने की क्षमता के साथ भारी हथियारों से लैस हो सके।
रैमजेट या टर्बो-रैमजेट इंजन, जो मैक-4.3 की रफ्तार से उड़ान भरने की क्षमता प्रदान करता है, को MIG-41 को दुनिया का सबसे तेज सैन्य विमान बना देगा। और अगर रूस ऐसा कर पाता है, तो अमेरिका के पैरों तले जमीन खिसक जाएगी।
लेकिन, क्या रूस बिना साधन और साझेदारों के तीन ए़डवांस विमान परियोजनाएं चला सकता है, जैसा कि एफ-35 के मामले में था? रूस के पास इतना पैसा कहां से आएगा? असल सवाल यही है, क्योंकि अभी टेक्नोलॉजी का टेस्ट होना भी बाकी है और दूसरी तरफ, रूस यूक्रेन युद्ध में भी फंसा हुआ है।
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