Igla-S: रूस ने भारत को सौंपा हेलीकॉप्टर्स का 'काल', कंधे से फायर होने वाला ये हथियार कितना खतरनाक?

Igla-S Air Defence System: अमेरिका पर लगाए गये प्रतिबंधों के बावजूद रूस लगातार भारत को हथियारों की सप्लाई कर रहा है और अब रूस ने नया एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम भारत को सौप दिया है। हालांकि, रूस को एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम सौंपने में भले ही देरी हो रही है, बावजूद Igla-S सिस्टम सौंपना रूस की बड़ी उपलब्धि है।

रूसी समाचार एजेंमसी स्पुतनिक ने इसकी पुष्टि कर दी है, कि भारतीय सेना को रूस में विकसित 24 इग्ला-एस मैन पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम (MANPADS) और 100 मिसाइलों का पहला बैच प्राप्त हो गया है।

Igla-S air defence system

रूस से इग्ला-एस मैन पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम का मिलना, एक बड़े समझौते का हिस्सा है, जिसका मकसद भारत की बहुत कम दूरी की वायु रक्षा (VSHORAD) क्षमताओं को बढ़ाना है। दि प्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत अब इन मिसाइलों को पाकिस्तान से लगती सीमा रेखा पर तैनात करेगा। भारतीय सेना की बहुत कम दूरी की वायु रक्षा (VSHORAD) क्षमताओं को बढ़ाने के लिए इस प्रणाली को खरीदा है।

भारतीय रक्षा प्रतिष्ठान के सूत्रों ने कहा है, कि साल 2021 में आपातकालीन खरीद के हिस्से के रूप में भारत ने इग्ला-एस की बहुत कम संख्या (24 लॉन्चर और 216 मिसाइलें) की खरीद है और यह एक बड़ा ऑर्डर है।

LAC पर तैनात किया गया इग्ला-S

इग्ला-एस सिस्टम में एक एकल लांचर और एक मिसाइल शामिल है। भारत ने पिछले साल नवंबर में 120 लॉन्चर और 400 मिसाइलों के लिए रूस के साथ कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर किए थे। इसका पहला बैच भारत आ गया है, जबकि बाकी मिसाइलों का निर्माण भारत में ही किया जा रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तरी सीमा पर ऊंचे पहाड़ी वाले इलाकों के लिए नई अधिकृत वायु रक्षा संरचनाओं के लिए इग्ला-एस सिस्टम की खरीद की जा रही है। इसे काफी आसानी से कंधे पर उठाकर फायर किया जाता है और ये मिसाइल डिफेंस सिस्टम दुश्मनों के हेलीकॉप्टर, ड्रोन को मार गिराने के लिए है। इसकी सबसे खास बात ये है, कि इसे कहीं से भी छिपकर वार किया जा सकता है, जिससे दुश्मन को पता नहीं चल पाता है, कि मिसाइल कहां से आ रही है।

VSHORADs के लिए अनुरोध प्रस्ताव (RFP) पिछली UPA सरकार के तहत 2010 में जारी किया गया था, जिसके बाद चयन प्रक्रिया शुरू हुई थी। वहीं, रूस ने नवंबर 2023 में भारत को हाथ से पकड़ने वाली इग्ला-एस एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइलों की आपूर्ति करने और लाइसेंस के तहत इसके उत्पादन की अनुमति देने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए।

उस समय, रोसोबोरोनेक्सपोर्ट के प्रमुख अलेक्जेंडर मिखेयेव ने कहा था, कि "हमने पहले ही संबंधित दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, और अब, एक भारतीय निजी कंपनी के साथ मिलकर, हम भारत में इग्ला-एस MANPADS के उत्पादन का आयोजन कर रहे हैं।"

ऐन मौके पर की गई है डिलीवरी

इस रिपोर्ट की गई डिलीवरी का समय महत्वपूर्ण है, क्योंकि रूस हाल ही में यूक्रेन युद्ध के कारण डिलीवरी शेड्यूल को फॉलो करने में नाकाम होने पर आलोचना का शिकार हुआ है। उदाहरण के लिए, रूस ने पिछले महीने भारत को सूचित किया था, कि वह एस-400 लंबी दूरी की वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली के बाकी बचे दो स्क्वाड्रन की आपूर्ति मूल कार्यक्रम से दो साल बाद अगस्त 2026 तक ही कर पाएगा।

भारत और रूस ने S-400 वायु रक्षा मिसाइलों के पांच स्क्वाड्रन की आपूर्ति के लिए करीब 35,000 करोड़ रुपये ($5B) से ज्यादा का सौदा किया था। पहले डिलीवरी 2023-24 तक पूरी होने का अनुमान था। हालांकि, रूस को यूक्रेन में अपनी सेना की मांग को पूरा करने के लिए अपनी योजनाओं में बदलाव करना पड़ा है।

रूसी वायु रक्षा प्रणाली, जिसे दुनिया में सबसे बेहतरीन के रूप में पेश किया गया है, वो लड़ाकू जेट और क्रूज़ मिसाइलों के खिलाफ प्रभावी हो सकती है, और यह 400 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से लक्ष्य पर हमला कर सकती है।

रूस के अनुसार, मिसाइल 100 फीट से कम और 40,000 फीट की ऊंचाई तक उड़ने वाले लक्ष्य को नष्ट कर सकती है और उसका पता लगा सकती है। पूरे सिस्टम को कुछ ही मिनटों में चालू करने के लिए तैयार किया जा सकता है। मिसाइलें और लांचर क्रॉस-कंट्री ट्रकों पर लगे होते हैं, जिससे इसका परिवहन काफी आसान हो जाता है। भारतीय वायुसेना पहले ही चीन और पाकिस्तान से लगी सीमाओं पर अपने तीन एस-400 वायु रक्षा मिसाइल स्क्वाड्रनों को ऑपरेट कर रही है।

इग्ला-एस मिसाइल डिफेंस सिस्टम क्या है?

इग्ला-एस यानि MANPADS पोर्टेबल सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणालियां हैं और उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में ये एयर डिफेंस सिस्टम, ड्रोन और मिसाइलों जैसे कम ऊंचाई वाले हवाई खतरों को बेअसर करने के लिए काफी खतरनाक मानी जाती है। भारतीय सेना पहले से ही Igla-1M सिस्टम का संचालन करती है, जिसे तत्काल बदलने की जरूरत है।

2012 में तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल (सेवानिवृत्त) वी.के. सिंह ने प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह को लिखा था, कि लगभग 97 प्रतिशत वायु रक्षा प्रणाली अब पुरानी हो चुकी हैं। पत्र में कहा गया था, कि मौजूदा एयर डिफेस सिस्टम "दुश्मन के हवाई हमलों से प्रभावी ढंग से रक्षा करने" में नाकाम हो रही हैं।

इग्ला-एस का ऑर्डर ऐसी प्रणालियों के लिए सेना की वर्तमान आवश्यकता को पूरा करेगा। और अब भारतीय सेना धीरे धीरे पुराने मिसाइल डिफेंस सिस्टम को बदल देगी। इस साल फरवरी में, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन ने जमीन आधारित पोर्टेबल लॉन्चर से स्वदेशी VSHORADS मिसाइलों के दो टेस्ट फ्लाइट भी किए थे।

इग्ला-एस, मानव रहित हवाई वाहन (यूएवी) और क्रूज मिसाइलों जैसे हवाई लक्ष्यों को पहचान सकता है और दिन के किसी भी समय उड़ान भर सकता है और उतर सकता है, यहां तक कि डिकॉय फ्लेयर्स की उपस्थिति में भी, जिसे जैमर और बैकग्राउंड अव्यवस्था भी कहा जाता है, उसमें भी ये काफी कारगर साबित हुआ है। यह किसी भी प्रकार के सर्विलांस जेट या हेलीकॉप्टर को निशाना बना सकता है।

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