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Lok Sabha Election 2024: इत्र नगरी कन्नौज कैसे बनी ‘यादव’ परिवार का गढ़, जानिए पूरा इतिहास

Lok sabha 2024: अखिलेश यादव ने कन्नौज लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से नामांकन दाखिल कर दिया है। इस सीट पर अखिलेश यादव का मुकाबला भारतीय जनता पार्टी के सुब्रत पाठक से होगा। इससे पहले कन्नौज सीट से समाजवादी पार्टी ने लालू यादव के दामाद तेज प्रताप यादव को उतारा था।

लोकसभा चुनाव को लेकर पहले अखिलेश यादव के चुनावी मैदान में न उतरने की घोषणा की गई थी। हालांकि, बाद में कार्यकर्ताओं के दबाव के कारण उन्हें अपने निर्णय को बदलना पड़ा। अखिलेश अभी मैनपुरी की करहल सीट से विधायक हैं। उन्होंने कन्नौज लोकसभा सीट से चौथी बार चुनावी मैदान में कदम रखा है।

Akhilesh Yadav files his nomination

अखिलेश के कन्नौज सीट से नामांकन कराने के साथ ही ये उत्तर प्रदेश की सबसे लोकप्रिय सीटों में से एक बन गई है। इत्रनगरी के नाम से मशहूर कन्नौज सीट को समाजवादी पार्टी का एक मजबूत गढ़ माना जाता है। हालांकि पिछले चुनाव में सुब्रत पाठक ने अखिलेश की पत्नी डिंपल यादव को हरा दिया था।

कन्नौज सदियों से इत्र उद्योग में अग्रणी रहा है और इत्र ही यहां की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। अखिलेश यादव ने साल 2000 में अपनी सियासी पारी का आगाज कन्नौज सीट से ही किया था। अखिलेश ने पिता मुलायम सिंह के इस्तीफे के बाद खाली हुई इस सीट से उपचुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी।

अखिलेश के पिता मुलायम सिंह यादव ने 1999 में कन्नौज और संभल सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा था। वे दोनों ही सीटों पर जीते थे। बाद में उन्होंने कन्नौज से इस्तीफा दे दिया और बेटे अखिलेश के लिए यह सीट छोड़ दी थी। मुलायम ने खुद चुनावी मंच पर अखिलेश का हाथ पकड़कर कहा था कि बेटा छोड़ जा रहूं, सांसद बना देना...

2000 में मिली जीत के बाद जीत के बाद अखिलेश 2004 और 2009 में भी कन्नौज से सांसद चुने गए। 2012 में सीएम बनने के बाद अखिलेश ने कन्नौज लोकसभा सांसद के रूप में इस्तीफा दिया। इसके बाद इस सीट पर हुए उपचुनाव में डिंपल यादव ने जीत हासिल की थी। साल 2014 के चुनाव में भी डिंपल ने यहां से जीत हासिल की थी।

करीब 21 साल के दबदबे के बाद आखिरकार बीजेपी 2019 में कन्नौज का किला ढाहने में कामयाब हो पाई। सुब्रत पाठक ने डिंपल यादव को 1 फीसदी से भी कम वोटों से हरा दिया। सपा-बसपा-रालोद का गठबंधन होने के बावजूद डिंपल को सफलता नहीं मिली।

भाजपा के सुब्रत पाठक को 5 लाख 63 हजार 87 वोट, जबकि डिंपल यादव को 5 लाख 50 हजार 734 वोट मिले थे। इस तरह से भाजपा ने सालों बाद इस सीट पर जीत हासिल की थी। अब 2024 में अखिलेश के फिर मैदान में आने से कन्नौज बीजेपी और सपा के बीच करीबी मुकाबले की ओर बढ़ रहा है।

क्या है कन्नौज का समीकरण

कन्नौज लोकसभा क्षेत्र में कुल वोटर्स की संख्या करीब 18 लाख हैं। इस लोकसभा सीट पर सबसे ज्यादा मुस्लिम और यादव मतदाता हैं। मुस्लिम वोटर्स की संख्या 2.50 लाख है, जबकि यादव वोटर्स की संख्या भी इतनी ही है। इसके अलावा 2.5 लाख दलित वोटर भी हैं। जबकि इस क्षेत्र में ब्राह्मण मतदाता करीब ढाई लाख और राजपूत मतदाता पौन 2 लाख हैं।

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