व्लादिमीर पुतिन के शासन में मुस्लिमों पर अत्याचार का बदला? रूस में ISIS ने क्यों किया नरसंहार, असली वजह समझिए
Moscow concert hall attack: शुक्रवार को सोवियत काल के रॉक बैंड के कार्यक्रम से पहले मॉस्को के क्रोकस सिटी हॉल में कॉन्सर्ट में आए लोगों पर हुए हमले में 133 से ज्यादा लोग मारे गए हैं और 100 से ज्यादा लोग बुरी तरह से घायल हो गये हैं।
छद्मवेशी वर्दी पहने हमलावरों ने हॉल में भीषण गोलीबारी की और कॉन्सर्ट हॉल के अंदर बम फेंके, जिसकी वजह से हॉल के अंदर आग लग गई और उसकी छत ढह गई। रूस में हुए इस आतंकी हमले के कई वीडियो जारी किए गये हैं, जिन्होंने दुनिया को दहलाकर रख दिया है।

रूस की इंटरफैक्स समाचार एजेंसी ने शनिवार को बताया है, कि हमले में शामिल 11 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें वो चारों आरोपी शामिल हैं, जिन्होंने कॉन्सर्ट हॉल के अंदर गोलीबारी की थी।
वहीं, रॉयटर्स समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, ISIL की अफगान शाखा, जिसे खुरासान प्रांत में इस्लामिक स्टेट, ISKP (आईएसआईएस-के) के रूप में भी जाना जाता है, उसने हमले की जिम्मेदारी ली है और संयुक्त राज्य अमेरिका के अधिकारियों ने उस दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि भी की है।
आइये हम जानते हैं, आखिर व्लादिमीर पुतिन के देश में आखिर ISIS के आतंकवादी बार बार हमले क्यों कर रहे हैं?
इस्लामिक स्टेट का अफगानिस्तान ब्रांच
इस्लामिक स्टेट का अफगानिस्तान ब्रांच, ISIS के सबसे सक्रिय सहयोगियों में से एक है और ये नाम इस्लाम के ही एक प्राचीन खिलाफत से लिया गया है, जिसमें कभी अफगानिस्तान, ईरान, पाकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान के क्षेत्र शामिल थे।
यह समूह 2014 के अंत में पूर्वी अफगानिस्तान से उभरा और यह पाकिस्तान तालिबान से अलग हुए आतंकवादियों और स्थानीय लड़ाकों को शामिल करके बना है, और इस संगठन के आतंकवादियों ने मारे जा चुके दुनिया के सबसे खतरनका विचारधारा वाले आतंकवादियों में से एक पूर्व ISIL चीफ, अबू बक्र अल-बगदादी के प्रति निष्ठा की प्रतिज्ञा की हुई है।
स्थापना के बाद से ISIS ने दुनिया के सबसे बर्बर हत्याओं और आतंकवादी घटनाओं को अंजाम दिया है।
अलजजीरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, तुर्की सेना के पूर्व कर्नल मूरत असलान ने कहा, कि आईएसआईएल का अफगानिस्तान सहयोगी अपनी "कट्टरपंथी और कठिन कार्यप्रणाली" के लिए जाना जाता है।
उन्होंने कहा, कि "मुझे लगता है कि वो अपनी विचारधारा के आधार पर टारगेट चुनते हैं और रूस पर हमले की बड़ी वजह एक ये है, कि रूसी सैनिक अभी भी सीरिया में हैं और वो अमेरिका की तरह ही ISIS के खिलाफ सीरिया में लड़ रहा है, और इसीलिए वो रूस को अपना दुश्मन मानते है।"
उन्होंने कहा, कि "अब वो मॉस्को तक पहुंच चुके हैं, ईरान में हम उन्हें देख चुके हैं और शायद अब हम और राजधानियों में उन्हें देखेंगे।"
हालांकि, कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है, कि अफगानिस्तान में ISIS के सदस्यों की संख्या घट गई है, लेकिन इसके आतंकवादी अभी भी अफगानिस्तान में तालिबान के अधिकार के लिए सबसे बड़े खतरों में से एक हैं।

ISIS के पुराने खतरनाक हमले
ISKP आतंकवादियों ने काबुल हवाई अड्डे के बाहर 2021 में भीषण हमला किया था, जिसमें कम से कम 175 नागरिको के साथ साथ 13 अमेरिकी सैनिक भी मारे गए थे और कई दर्जन लोग घायल हो गए थे।
2020 में ISIS ने अफगानस्तान की राजधानी काबुल के प्रसूति वार्ड मे भी धमाका किया था, जिसमें कई महिलाओं के साथ साथ 24 नवजात शिशुओं की मौत हो गई थी। उसी साल नवंबर में, ISIS ने काबुल विश्वविद्यालय पर हमला किया था, जिसमें कम से कम 22 शिक्षक और छात्र मारे गए थे।
सितंबर 2022 में ISIS ने काबुल में रूसी दूतावास पर एक घातक आत्मघाती बम विस्फोट की जिम्मेदारी ली थी।
पिछले साल, ईरान ने दक्षिणी शिराज के एक प्रमुख मंदिर शाह चेराघ पर भी ISIS के आतंकवादियों ने दो अलग अलग हमले किए थे, जिनमें कम से कम 14 लोग मारे गए थे और 40 से ज्यादा लोग घायल हो गये थे।
इसके अलावा, अमेरिका ने पुष्टि की है, कि उसने जो कम्युनिकेशन इंटरसेप्ट किए हैं, उससे पता चलता है, कि इस साल जनवरी महीने में ईरान में जो घातक आत्मघाती बम धमाका हुआ था, ISIS उसके लिए लंबे अर्से से तैयारी कर रहा था। उस हमले में 100 से ज्यादा लोग मारे गये थे।
रूस में क्यों हमले कर रहा ISIL?
अलजजीरा की रिपोर्ट में कुछ डिफेंस एक्सपर्ट्स ने कहा है, कि रूस में पिछले कुछ सालों में मुसलमानों के उत्पीड़न की कई खबरें आईं हैं और शायद यही वजह है, कि ISIS ने पुतिन के देश को निशाना बनाया है।
अलजजीरा की एक रिपोर्ट में वाशिंगटन स्थित विल्सन सेंटर में दक्षिण एशिया संस्थान के डायरेक्टर माइकल कुगेलमैन ने कहा, कि "रूसी विदेश नीति ISIS (ISIL) के लिए एक बड़ा खतरा रही है।"
उन्होंने कहा, कि "अफगानिस्तान पर सोवियत आक्रमण, चेचन्या में रूसी कार्रवाई, सीरिया और ईरानी सरकारों के साथ मास्को के घनिष्ठ संबंध, और विशेष रूप से सीरिया में जो सैन्य अभियान रूस ने चलाए है, उससे ISIS को तगड़ा नुकसान हुआ है। वहीं, अफ्रीका के जिन इलाकों में ISIS की मौजूदगी है, उन इलाकों में भी रूसी वैगनर ग्रुप ने ऑपरेशंस को अंजाम दिए है।"
उन्होंने आगे कहा, कि "इन सबका मतलब ये होता है, कि मॉस्को अब ISIS के मुख्य निशाने पर आ गया है।
वहीं, दक्षिण कैरोलिना में क्लेम्सन विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर और द इस्लामिक स्टेट इन अफगानिस्तान एंड पाकिस्तान: स्ट्रैटेजिक अलायंस एंड राइवलरीज की सह-लेखक अमीरा जादून ने कहा, कि "ISIS के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में रूस काफी मजबूती से शामिल रहा है और सीरिया की सरकार के साथ मिलकर रूस ने कई सैन्य अभियान भी चलाए है। इसके अलावा, रूस ने अफगानिस्तान के तालिबान शासकों से भी घनिष्ठ संबंध बनाए हैं और ISIS का एक मकसद अफगानिस्तान से तालिबान शासन को उखाड़ फेंकना भी है।"
उन्होंने कहा, कि "मॉस्को में हमला कर ISIS की कोशिश चरमपंथियो के बीच फिर से अपनी शक्ति की स्थापना करने की है और आतंकवादी संगठनों के बीच फिर से नेता बनने की है।"
वहीं, नई दिल्ली स्थित थिंक टैंक, ऑब्ज़र्वर रिसर्च फाउंडेशन के स्ट्रैटेजिक स्टडीज प्रोग्राम के फेलो कबीर तनेजा के मुताबिक, रूस को आईएसआईएल और उसके सहयोगी "मुसलमानों के खिलाफ धर्मयुद्ध करने वाली शक्ति" के रूप में देखते हैं।
The ISIS Peril किताब लिखने वाले तनेजा के मुताबिक, "रूस शुरू से ही ISIS के लिए ही नहीं, बल्कि आईएसकेपी के लिए भी निशाना रहा है।"
रूस ने पिछले दिनों एक पूजाघर के पास भी आतंकी हमले की एक साजिश को नाकाम किया था।
कुगेलमैन ने कहा, कि "अभी जो ISIS रूस पर हमले कर रहा है, उसके पीछे की वर्तमान में सबसे बड़ी वजह तालिबान और रूस की बढ़ती नजदीकी है और तालिबान लगातार ISIS के खिलाफ लड़ रहा है, लिहाजा ISIS, तालिबान और रूस को एक दोस्त के तौर पर देखने लगा है।"

रूस में हमले के बाद क्या बोला ISIS?
सिंगापुर के एस राजारत्नम स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज के वरिष्ठ एसोसिएट फेलो अब्दुल बासित कहते हैं, कि मॉस्को पर हमले के बाद ISKP सोशल मीडिया चैनलों पर "खुशी" छाई है।
बासित ने कहा, कि "मॉस्को हमले के बाद वो जश्न मना रहे हैं और हमले का प्रचार कर रहे है।"
बासित के मुताबिक, ISIS पहले से ही प्रोपेगेडा फैलाने में मास्टर रहा है और रूस में हुए हमले को वो अपनी जीत बताकर उसका प्रचार कर रहा है और इस तरह के हमले आतंकी संगठनों के बीच ISIS की विश्वसनीयता को बढ़ाते है, जिसके उनकी फंडिंग, संगठन में भर्ती और उनके प्रचार का दायरा और बढ़ जाता है।"
तमाम एक्सपर्ट्स ने इस बात की आशंका जताई है, कि अब कई राजधानियों में और हमले हो सकते हैं, लिहाजा दुनिया को सावधान रहने की जरूरत है, क्योंकि ISIS मध्य एशिया में अब पांव पसार चुका है और कई मुस्लिम देशों में उसे समर्थन मिलने की आशंका है, ऐसे में ISIS के पैटर्न को समझना और उसपर अंकुश लगाना अब काफी महत्वपूर्ण हो गया है।












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