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जेईई मेन परीक्षा घोटाले का मुख्य आरोपी गिरफ्तार, जिसकी मदद से एक छात्र बन गया था स्टेट टॉपर

नई दिल्ली। असम पुलिस ने संयुक्त प्रवेश परीक्षा (मुख्य) घोटाले के एक मुख्य आरोपी को भार्गव डेका को रविवार शाम गिरफ्तार कर लिया है। असम पुलिस के मुताबिक उसे मुख्य आरोपी को गुवाहाटी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से गिरफ्तार करने में सफलता मिली। आरोपी शहर के एक कोचिंग संस्थान ग्लोबल एडू लाइट का मालिक बताया गया है। इससे पहले पुलिस आरोपी उम्मीदवार और उसके माता-पिता समेत कुल 7 लोगों को मामले में गिरफ्तार कर चुकी थी।

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दो मुख्य आरोपियों भार्गव डेका और TCS कर्मचारी की तलाश में थी पुलिस

दो मुख्य आरोपियों भार्गव डेका और TCS कर्मचारी की तलाश में थी पुलिस

असम पुलिस ने परीक्षा घोटाले के सिलसिले में दो मुख्य आरोपियों क्रमशः भार्गव डेका और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के एक कर्मचारी को पकड़ने के लिए दबिश शुरू की थी। आरोपी उम्मीदवार ने उन्हें प्रॉक्सी की तरह इस्तेमाल करके राज्य में टॉप किया था हालांकि परीक्षा घोटाले में पुलिस अब तक सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गत बुधवार को गिरफ्तार होने वालों में पांच आरोपियों में टॉप करने वाला उम्मीदवार, उसका पिता, दो टीसीएस कर्मचारी और एक परीक्षा निरीक्षक शामिल है, जिन्हें कोर्ट ने पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है।

प्रॉक्सी उम्मीदवार के जरिए टॉपर बना था आरोपी छात्र नील नक्षत्र दास

प्रॉक्सी उम्मीदवार के जरिए टॉपर बना था आरोपी छात्र नील नक्षत्र दास

गिरफ्तार लोगों की पहचान क्रमशः नील नक्षत्र दास (उम्मीदवार), उम्मीदवार का पिता डॉ. ज्योतिर्मय दास और उम्मीदवार के तीन कथित मित्र हेमेंद्र नाथ सरमा, प्रांजल कलिता और हिरुकमल पाठक के रूप में की गई है। पुलिस आयुक्त मुन्ना प्रसाद गुप्ता ने बताया कि शनिवार को मामले में एक महिला को भी पकड़ा गया था। पुलिस ने देश भर में परीक्षा आयोजित कराने वाली राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) से संपर्क किया है और जांच में सहायता के लिए डेटा की मांग की है। एनटीए ने असम में परीक्षाओं के संचालन के लिए टीसीएस के इंफ्रास्ट्रकचर और मानव संसाधन को आउटसोर्स किया था।

वायरल एक रिकॉर्डेड फोन कॉल की बातचीत के बाद घोटाला उजागर हुआ

वायरल एक रिकॉर्डेड फोन कॉल की बातचीत के बाद घोटाला उजागर हुआ

गुवाहाटी के अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) सुप्रोटीव लाल बरुआ इस घोटाले की जांच के लिए गठित एक विशेष जांच दल का नेतृत्व कर रहे हैं। घोटाला वायरल एक रिकॉर्डेड फोन कॉल की बातचीत के बाद उजागर हुआ था। रिकॉर्डड बातचीत में उम्मीदवार ने अपने दोस्त को स्वीकार किया था कि उसने गत 5 सितंबर को आयोजित परीक्षा में उपस्थित होने के लिए एक प्रॉक्सी का इस्तेमाल किया गया था।

23 अक्टूबर को मित्रदेव शर्मा नामक व्यक्ति ने मामले में दर्ज कराया था FIR

23 अक्टूबर को मित्रदेव शर्मा नामक व्यक्ति ने मामले में दर्ज कराया था FIR

मामले पर गत 23 अक्टूबर को मित्रदेव शर्मा नामक व्यक्ति द्वारा एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि जेईई (मेन्स) में 99.8 फीसदी अंक लाने वाले उम्मीदवार ने परीक्षा नहीं दी थी, बल्कि परीक्षा में बैठने के लिए उसने फ्रॉक्सी उम्मीदवार का इस्तेमाल किया था। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया था कि उम्मीदवार के डॉक्टर माता-पिता ने परीक्षा में अपने बेटे की मदद करने के लिए गुवाहाटी के एक निजी कोचिंग संस्थान को 15-20 लाख रुपये का भुगतान किया था।

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