Land for Jobs Scam: करोड़ों की जमीन के बदले कैसे दी गयीं रेलवे में नौकरियां, जानें पूरा मामला
जब लालू प्रसाद यादव केंद्र में रेल मंत्री हुआ करते थे, तब उनपर आरोप लगा था कि उनके परिवार ने लोगों से जमीन लेकर उसके बदले उन्हें रेलवे में नौकरी दी थी।

Land for Jobs Scam: देश की खबरों में इन दिनों लैंड फॉर जॉब स्कैम छाया हुआ है। अभी बीते दिनों ही बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) की वरिष्ठ नेता राबड़ी देवी के पटना स्थित आवास पर सीबीआई की टीम छापा मारने पहुंची थी। सीबीआई की यह छापेमारी लैंड फॉर जॉब केस (नौकरी के बदले जमीन) के सिलसिले में थी।
अब इस घोटाले में सीबीआई के बाद अब ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) की छापेमारी जारी है। लालू यादव के करीबी और आरजेडी के पूर्व विधायक अबू दोजाना के घर पर भी ईडी ने छापा मारा है। दोजाना के पटना स्थित घर पर ईडी ने छापेमारी की है। खबरों के मुताबिक दिल्ली-एनसीआर में भी 15 अलग-अलग जगहों पर ईडी ने छापेमारी की। ईडी लालू यादव के ठिकानों पर सर्च अभियान चला रही है। जबकि 7 मार्च 2023 को ही सीबीआई ने लालू यादव से भी पूछताछ की है।
लैंड फॉर जॉब स्कैम के मामले में कुछ दिनों पहले दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, उनकी बेटी मीसा भारती समेत 14 अन्य लोगों को 15 मार्च 2023 तक अदालत में पेश होने का आदेश दिया है। इसके बाद ही 6 मार्च को सीबीआई की टीम राबड़ी देवी के आवास पर पटना पहुंची थी।
किस-किस पर लगे आरोप?
लैंड फॉर जॉब स्कैम' के मामले में एक चार्जशीट दायर की गयी है। उसमें रेलवे की तत्कालीन जीएम सौम्या राघवन, तत्कालीन सीपीओ कमलदीप मैनराय, रेलवे में नियुक्त कथित लाभार्थी राजकुमार सिंह, मिथिलेश कुमार, अजय कुमार, संजय कुमार, धर्मेंद्र कुमार, विकास कुमार और अभिषेक कुमार और कथित बिचौलिए रवींद्र राय, किरण देवी, अखिलेश्वर सिंह और रामाशीष सिंह के नाम शामिल हैं।
क्या है लैंड फॉर जॉब मामला?
यह पूरा मामला साल 2004 से 2009 के बीच का है। जब साल 2004 में कांग्रेस की अगुवाई में यूपीए-1 की सरकार बनी थी, तब लालू प्रसाद यादव को सरकार में रेल मंत्री बनाया गया। आरोप है कि इसी दौरान लालू यादव ने अपने पद का गलत फायदा उठाते हुए, पटना के 12 लोगों को ग्रुप डी की नौकरी दे दी। शुरुआत में सब्स्टीट्यूट पर दी गई बाद में उन्हें परमानेंट कर दिया गया।
इसके बदले में उन लोगों से लालू यादव ने परिजनों के नाम पर जमीनें लिखवा लीं। दावा है कि उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटी मीसा भारती और हेमा यादव के नाम पर प्लॉट की रजिस्ट्री कराई गई और कीमत के नाम पर कुछ पैसे नकद में दिये गये।
बता दें कि साल 2021 में जांच एजेंसी द्वारा जांच शुरू की गई थी। जांच में सीबीआई ने पाया कि पटना में तीन सेल डीड (Sale Deed) राबड़ी देवी के नाम पर हैं। इसमें से दो डीड फरवरी 2008 की हैं। तीसरी सेल डीड में एक प्लॉट है। वहीं मीसा भारती और हेमा यादव के नाम भी दो गिफ्ट डीड का खुलासा हुआ। वहीं एक डीड एके इन्फोसिस्टम नाम की कंपनी के साथ किया था। बाद में जिसकी डायरेक्टर राबड़ी देवी बनीं।
वहीं सीबीआई ने जांच में पाया कि जोनल रेलवे में सब्स्टीट्यूट की भर्ती का कोई विज्ञापन या पब्लिक नोटिस जारी नहीं किया गया था। जिन परिवारों ने अपनी जमीन दी, उनके सदस्यों को रेलवे में मुंबई, जबलपुर, कोलकाता, जयपुर और हाजीपुर में नियुक्ति दी गईं।
जानिए किससे जमीन ली, किसे नौकरी दी?
इंडिया टुडे ने अपनी एक रिपोर्ट में खुलासा किया है कि लालू यादव के परिवार ने कथित तौर पर 7 लोगों को जमीन के बदले नौकरी दी थी। इनमें से पांच जमीनों की बिक्री हुई थी, जबकि दो गिफ्ट के तौर पर दी गई थी।
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● 6 फरवरी 2008 को पटना के रहने वाले किशुन देव राव ने अपनी 3,375 वर्ग फीट की जमीन राबड़ी देवी के नाम पर की थी। ये जमीन 3.75 लाख रुपये में बेची गई। उसी साल किशुन राव के परिवार के तीन सदस्यों को मुंबई में ग्रुप डी में भर्ती किया गया।
● पटना के ही रहने वाले संजय राय ने फरवरी, 2008 में 3,375 वर्ग फीट का प्लॉट राबड़ी देवी को बेचा था। ये डील 3.75 लाख रुपये में हुई थी। इसके बदले संजय राय के परिवार के दो सदस्यों को रेलवे में नौकरी दी गई।
● पटना की रहने वालीं किरण देवी ने नवंबर 2007 में अपनी 80,905 वर्ग फीट जमीन लालू यादव की बेटी मीसा के नाम पर कर दी। ये सौदा 3.70 लाख रुपये में हुआ। उनके बेटे को मुंबई में सब्स्टीट्यूट के तौर पर भर्ती किया गया।
● पटना के रहने वाले हजारी राय ने फरवरी 2007 में 9,527 वर्ग फीट जमीन सस्ते में एके इन्फोसिस्टम प्राइवेट लिमिटेड को बेची। बाद में हजारी राय के दो भतीजों को रेलवे में नौकरी मिली। साल 2014 में एके इन्फोसिस्टम की सारी संपत्तियां और अधिकार राबड़ी देवी और मीसा भारती के पास चला गया।
● मई 2015 में पटना के रहने वाले लाल बाबू राय ने 1,360 वर्ग फीट की जमीन राबड़ी देवी को बेच दी थी। सीबीआई की जांच में पाया कि साल 2006 में लाल बाबू राय के बेटे लाल चंद कुमार को रेलवे में सब्स्टीट्यूट के तौर पर भर्ती किया गया था।
● मार्च 2008 में बृज नंदन राय ने 3,375 वर्ग फीट जमीन गोपालगंज के रहने वाले ह्रदयानंद चौधरी को 4.21 लाख रुपये में बेचा। ह्रदयानंद चौधरी को 2005 में हाजीपुर में सब्स्टीट्यूट के तौर पर भर्ती किया गया। ह्रदयानंद चौधरी ने बाद में ये जमीन तोहफे में लालू यादव की बेटी हेमा यादव के नाम पर कर दी। जिसकी कीमत 62 लाख रुपये आंकी गई थी।
● मार्च 2008 में विशुन देव राय ने अपनी 3,375 वर्ग फीट जमीन सिवान के रहने वाले ललन चौधरी को बेची। 2008 में ही ललन चौधरी के पोते पिंटू को पश्चिमी रेलवे में सब्स्टीट्यूट के तौर पर भर्ती किया गया। इसके बाद फरवरी 2014 में ललन ने ये जमीन लालू यादव की बेटी हेमा यादव को दे दी।
लैंड फॉर जॉब मामले में कब-कब क्या हुआ?
● 18 मई 2022 को सीबीआई ने 16 नामजद समेत अज्ञात पर केस दर्ज किया।
● 20 मई 2022 को बिहार और दिल्ली में 16 जगहों पर छापेमारी की गई
● 27 जुलाई 2022 को एक पूर्व विधायक भोला यादव और रेलकर्मी ह्यदयानंद चौधरी को गिरफ्तार किया गया।
● 24 अगस्त 2022 को राजद नेताओं के बिहार और दिल्ली व अन्य जगहों के 17 ठिकानों पर छापेमारी की गई।
● 7 अक्टूबर 2022 को सीबीआई ने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, मीसा भारती, हेमा यादव समेत 14 लोगों के खिलाफ चार्टशीट दाखिल की।
● 27 फरवरी 2023 को दिल्ली की एक कोर्ट ने इस मामले में लालू यादव, राबड़ी देवी, मीसा भारती समेत 14 अन्य को समन जारी किया।
● 6 मार्च 2023 को सीबीआई की एक टीम राबड़ी देवी के आवास पर पटना जांच के लिए पहुंची।
● 7 मार्च 2023 को सीबीआई की एक टीम लालू यादव से मीसा भारती के घर दिल्ली में पूछताछ के लिए पहुंची।
● 10 मार्च 2023 को लालू यादव के करीबी और आरजेडी के पूर्व विधायक अबू दोजाना के घर पर भी ईडी का छापा। साथ ही लालू यादव के बेटे व बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के दिल्ली वाले घर भी छापेमारी की गई। साथ ही तेजस्वी यादव की बहन हेमा यादव और गाजियाबाद में बहन रागिनी के घर भी छापा पड़ा।
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