Funding Scams: देश में फंडिंग के नाम पर हो चुके हैं कई स्कैम, शारदा-सहारा सबसे बड़े उदाहरण
नोएडा सहित देश के कई शहरों में फंडिंग के नाम पर ‘फर्जी’ कंपनियों ने लोगों से करोड़ों रुपये इकट्ठा किये और बाद में लोगों की पूरी कमाई लेकर फरार हो गये।

नोएडा में 'विश्व का सबसे बड़ा फंडिंग फेस्टिवल' के नाम पर सबसे बड़ा स्कैम हो गया। दरअसल ग्रेटर नोएडा के एक्सपो मार्ट में 24, 25 और 26 मार्च 2023 को एक इवेंट 'वर्ल्ड स्टार्टअप कन्वेंशन' होना था। इसे दुनिया का सबसे बड़ा स्टार्टअप फंडिंग फेस्टिवल बताया गया था।
जिसमें 50 से ज्यादा देशों के इंस्टीट्यूशनल इंवेस्टर्स, 9,000 से ज्यादा एंजल इंवेस्टर्स और 75,000 से ज्यादा स्टार्टअप्स के शामिल होने का दावा किया गया था। साथ ही एलन मस्क, सुंदर पिचाई, गौतम अडानी और नितिन गडकरी जैसे बड़े नेता और उद्योगपतियों के शामिल होने की बात की गई थी। मगर सब बातें हवा-हवाई निकली।
वैसे इस स्कैम के पीछे 'वर्ल्ड स्टार्टअप कन्वेंशन' के आयोजक ल्यूक तलवार और अर्जुन चौधरी की कंपनी कोफंडर (Qofunder) का नाम सामने आया है। इन दोनों ने पिछले साल जून में एक कंपनी बनाई और अक्टूबर में इस इवेंट का ऐलान किया।
बड़ी बात यह है कि शुरुआत में इस इवेंट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आने की बात को भी प्रचारित किया गया, लेकिन बाद में उनका नाम हटा दिया गया था।
हालांकि, देश में इस तरह के फंडिंग मामले में घोटाला कोई नयी बात नहीं है। इससे पहले भी कई दफा फंडिंग के जरिए पैसा लेकर 'फर्जी' कंपनियां फरार हो चुकी हैं। आइए, आज ऐसे ही कुछ बड़े घोटालों के बारे में जानते हैं।
शारदा चिटफंड घोटाला
शारदा चिटफंड घोटाले को पश्चिम बंगाल का सबसे बड़ा घोटाला कह सकते है। शारदा ग्रुप कंपनी की स्थापना 2008 में हुई थी। चार साल में इस कंपनी ने पश्चिम बंगाल, असम और ओडिशा में करीब 300 ऑफिस खोल लिये थे। इस दौरान ग्रुप ने करीब $4 से $6 बिलियन की कमाई की थी। यह ग्रुप अप्रैल 2013 में बंद हो गया था। शारदा ग्रुप पर आरोप है कि उसने करीब 1.7 मिलियन निवेशकों से पैसे लिए और उन्हें ऑफर दिया कि उनके दिए गए पैसों को 34 गुना कर वापस दिया जाएगा। हालांकि ऐसा हो न सका और कई निवेशकों ने सुसाइड कर ली थी। इस घोटाले को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार पर भी सवाल उठे थे।
सहारा घोटाला
25 दिसंबर 2009 और 4 जनवरी 2010 को सेबी (Securities and Exchange Board of India) को दो शिकायतें मिलीं। इनमें कहा गया कि सहारा की कंपनियां वैकल्पिक पूर्ण परिवर्तनीय डिबेंचर (OFCDs) जारी कर गलत तरीके से धन जुटा रही हैं। इन शिकायतों से सेबी की शंका सही साबित हुई। सेबी ने इन दोनों कंपनियों की जांच शुरू की। सेबी ने पाया कि SIRECL और SHICL ने ओएफसीडी के जरिए दो से ढ़ाई करोड़ निवेशकों से करीब ₹24,000 करोड़ जुटाये हैं। सेबी ने सहारा की इन दोनों कंपनियों को पैसा जुटाना बंद करने का आदेश दिया और कहा कि वह निवेशकों को 15 प्रतिशत ब्याज के साथ उनका पैसा लौटाये पर सहारा ने ऐसा नहीं किया।
आगरा चिटफंड घोटाला
जनवरी 2021 में इस घोटाले का खुलासा तब हुआ जब आगरा देहात के कई लोग एसएसपी के सामने यह शिकायत लेकर गये कि एक चिट फंड कंपनी उनके पैसे नहीं लौटा रही है। जब जांच की गई तो मामले का खुलासा हुआ कि 40 एजेंटों के माध्यम से आगरा देहात की एक चिट फंड कंपनी ने एक करोड़ 37 लाख 90 हजार रुपयों का घोटाला किया है। उनके द्वारा 327 ग्रामीणों की रकम निवेश कराई गई थी। निवेशकों को 12 प्रतिशत ब्याज देने की बात की गई थी।
उत्तराखंड मुस्लिम फंड घोटाला
जनवरी 2023 में उत्तराखंड के हरिद्वार जिले स्थित ज्वालापुर क्षेत्र में कबीर म्यूचुअल बैनेफिट निधि लिमिटेड (मुस्लिम फंड) के नाम से चलाई जा रही एक चिट फंड कंपनी द्वारा घोटाले का मामला सामने आया था। दरअसल, फरवरी में फंड का मुख्य संचालक अब्दुल रज्जाक और उसके दो साथी पकड़े गये। इन्होंने खुलासा किया कि हजारों लोगों का पैसा निवेश किया गया था। वहीं जांच में खुलासा हुआ कि ये लोग काले धन को सफेद करने का भी काम करते थे। ये लोगों से 12 प्रतिशत ब्याज देने का वादा करते थे। वहीं बिजनेस बाइट के हिसाब से तकरीबन ₹30 करोड़ का यह घोटाला है।
आदर्श क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी घोटाला
आदर्श क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटी एक कोऑपरेटिव सोसायटी थी, जिसकी स्थापना 1999 में हुई थी। स्थापना के बाद से इस सोसायटी ने 31 अगस्त 2016 तक 28 राज्यों में 806 शाखाएं खोलीं। इनमें सबसे ज्यादा 309 राजस्थान में खोली गईं। यह राजस्थान में सबसे बड़े फ्रॉड में से एक है। इस सोसायटी ने तकरीबन 14 हजार करोड़ रुपये का घोटाला किया है। सोसायटी की ओर से लोगों को झांसा दिया जाता था कि उनकी निवेश की हुई रकम कंपनियों व लोगों को ऊंची ब्याज दर पर लोन के रूप में दी जा रही है। इस झांसे में आकर 20 लाख लोगों ने ₹14800 करोड़ का निवेश सोसाइटी में किया था। वहीं इस कंपनी के संचालकों ने रिश्तेदारों के नाम पर ही 45 फर्जी कंपनियां बनाईं थी और सोसाइटी में निवेश की गई रकम में से ₹12 हजार करोड़ तकरीबन इन्हीं फर्जी कंपनियों को बतौर लोन देना दिखाया गया। जब लोगों के पैसे नहीं लौटाए गये तो इस घोटाला का खुलासा मई 2018 में हुआ।
संजीवनी क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटी घोटाला
आदर्श क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटी की तर्ज पर पश्चिमी राजस्थान के जोधपुर में गठित संजीवनी क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटी द्वारा भी आम जनता को बचत पर ऊंचे ब्याज का लालच देकर अरबों रुपए की पूंजी जमा कर ली गई। देश भर में कई राज्यों में अपनी शाखाएं खोलकर संजीवनी क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटी ने लगभग एक हजार करोड़ रुपए एकत्र कर लिए। इनमें 200 से अधिक ब्रांच तो केवल राजस्थान में ही खोली गई थी। लगभग डेढ़ लाख लोगों ने अपनी जीवन भर की बचत संजीवनी क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटी के पास यह सोचकर जमा करवा दी कि इस पर उन्हें आम बैंकों की तुलना में कहीं अधिक ब्याज मिलेगा। लेकिन संजीवनी क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटी के संचालकों ने फर्जी कर्जदाताओं के नाम लोन दिखाकर लोगों की जमा पूंजी के 953 करोड़ रुपए का घोटाला कर दिया। कुछ समय बाद संजीवनी क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटी ने लोगों की बचत के पैसे लौटाने बंद कर दिए और यह दावा कर दिया कि जिन्होंने कर्ज लिया था उन्होंने वापस नहीं लौटाए इसलिए बचतकर्ताओं को उनकी बचत वापस देने में कठिनाई आ रही है। जनता की शिकायतों पर पुलिस में मामले दर्ज किए गए और उसकी जांच अभी चल रही है।
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