E-Tender Scam : ई-टेंडर घोटाले के 6 आरोपियों को जिला अदालत ने किया बरी,सरकारी पक्ष साबित नहीं कर पाया कोई आरोप
मध्य प्रदेश के बहुचर्चित 3000 करोड़ रुपए के ई- टेंडरिंग घोटाले के 6 आरोपियों को जिला कोर्ट ने बुधवार को बरी कर दिया। कोर्ट में अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ कोई सबूत पेश नहीं कर सका, इसलिए सभी को बरी किया गया। बता दो ई टें
मध्य प्रदेश के बहुचर्चित 3 हजार करोड़ रुपए के ई- टेंडरिंग घोटाले के 6 आरोपियों को जिला कोर्ट ने बुधवार को बरी कर दिया। कोर्ट में अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ कोई सबूत पेश नहीं कर सका, इसलिए सभी को बरी किया गया। बता दे EOW ने इस मामले में 6 लोगों को आरोपी बनाया था। बुधवार को जिला अदालत ने सभी आरोपियों को दोषमुक्त बताते हुए बरी कर दिया। कोर्ट ने माना कि ई-टेंडर के लिए डेमो टेंडर बनाया गया था, लेकिन इन्हीं लोगों ने बनाया, अभियोजन पक्ष इसे साबित नहीं कर सका। ऐसे में संदेह के आधार पर इन्हें दोषी नहीं माना जा सकता। सरकारी वकील आशीष त्यागी ने EOW की तरफ से कोर्ट में पक्ष रखा। मामले की सुनवाई स्पेशल जज संजीव कुमार श्रीवास्तव की कोर्ट में हुई।

बता दे 2018 के अप्रैल में 3000 करोड़ रुपए का ई-टेंडरिंग घोटाला सामने आया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने EOW को जांच के आदेश दिए थे। इस बीच विधानसभा चुनाव होने के बाद सरकार बदल गई थी। कांग्रेस सरकार बनने के बाद ई-टेंडर घोटाले की जांच में तेजी आई और 10 अप्रैल 2019 को 7 लोगों के खिलाफ एफ आई आर दर्ज की गई। तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा था कि ई-टेंडरिंग के दोषियों को नहीं बख्शा जाएगा।
ऐसे सामने आया था घोटाला
घोटाला उस समय उजागर हुआ जब एक कंपनी के कर्ताधर्ता द्वारा जल निगम की तीन निविदाओं को खोलते समय कंप्यूटर ने मैसेज डिस्प्ले किया। इससे पता चला कि निविदाओं में टेंपरिंग की जा रही है। प्रारंभिक जांच में प्राप्त हुआ कि जीवीआर इंजीनियर्स और अन्य कंपनियों ने जल निगम टेंडर में बोली की कीमत में 1769 करोड़ का बदलाव कर दिया था। ईटेंडरिंग को लेकर ईओडब्ल्यू ने कई कंपनियों के खिलाफ केस दर्ज किया था।
लेकिन 23 नवंबर 2022 को कोर्ट ने ई-टेंडरिंग घोटाले के सभी 6 आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है। दोषमुक्त किए गए 6 लोगों में मध्य प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम के तत्कालीन ओएसडी नंदकिशोर ब्रह्मोस, मूव आईटी सॉल्यूशन के डायरेक्टर वरुण चतुर्वेदी, विनय चौधरी, सुमित गोवलकर, एंटारेस कंपनी के डायरेक्टर मनोहर एमएन और भोपाल के कारोबारी मनीष खरे शामिल हैं। ये सब बुधवार को जिला कोर्ट में पेश हुए थे। उनके खिलाफ EOW ने चालन पेश किया था। ब्रह्म की तरफ से वकील प्रशांत हरने ने बताया कि 33 गवाहों की सुनवाई के बाद कोर्ट ने सभी छह आरोपियों को बरी कर दिया। कोर्ट ने निर्णय सुनाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ आरोप साबित नहीं कर सका।
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