लोकसभा चुनाव 2019: कांग्रेस की दूसरी लिस्ट कुछ पुराने योद्धा और ढेर सारे दलबदलू

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव 2019 का काउंटडाउन तिथियों की घोषणा के साथ शुरू हो गया है। फागुन में बढ़ते तापमान के साथ सियासी परा भी चढ़ता जा रहा है। 13 मार्च को कांग्रेस ने अपनी दूसरी सूची जारी कर दी जिसमें कुल 21 नाम हैं। खासबात यह है की इसमें उत्तर प्रदेश की 16 सीटें हैं। सूची में कांग्रेस ने अपने कुछ पुराने क्षत्रपों पर फिर से भरोसा किया है जो 2009 तक उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के मजबूत स्तम्भ माने जाते थे। लेकिन 2014 में नरेन्द्र मोदी की आंधी में उत्तर प्रदेश से कांग्रेस का लगभग सफाया हो गया। दूसरी लिस्ट में ढेर सारे दलबदलुओं को भी टिकट दिया गया है।

इस दफा उत्तर प्रदेश के समीकरण अलग

इस दफा उत्तर प्रदेश के समीकरण अलग

इस चुनाव में कांग्रेस की चतुरंगिणी सेना में भाई का साथ देने के लिए प्रियंका गाँधी भी मैदान में हैं। हालांकि अभी तय नहीं है कि वह लोक सभा चुनाव लड़ेंगी या नहीं। लेकिन फूलपुर से प्रियंका के चुनाव लड़ने की अटकलें तेज हैं। वैसे प्रियंका के आने से उत्तर प्रदेश के कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नये उत्साह का संचार हुआ है। लेकिन प्रियंका के पति राबर्ट वाड्रा के बहाने बीजेपी को कांग्रेस पर हमला करने का एक नया मुद्दा मिल गया है।

उत्तर प्रदेश में इस बार चुनावी समीकरण 2014 से काफी भिन्न हैं। 2014 में समाजवादी पार्टी के साथ कांग्रेस थी। इस बार अखिलेश की सपा के साथ मायावती की बहुजन समाज पार्टी है और कांग्रेस फिलहाल "एकला चलो रे" के फार्मूले पर प्रदेश में बेहतर नतीजों की उम्मीद कर रही है। सपा-बसपा गठबंधन दलित, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के वोट के सहारे प्रदेश में बीजेपी को पटखनी देने का सपना देख रही है। लेकिन कांग्रेस और सपा से अलग हुए अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल यादव की प्रगतिशील समाजवादी पार्टी सपा-बसपा के मंसूबों पर पानी फेर सकती है । वैसे प्रदेश में सपा-बसपा में गठबंधन और कांग्रेस के अलग चुनाव लड़ने से जातीय गणित उलझ गया है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही मायावती और अखिलेश मिलकर चुनाव लड़ रहे हो लेकिन उनके समर्थकों का वोट एक-दूसरे की पार्टी को पूरी तरह हस्तांतरित होगा, इसमें संदेह है। आशंका तो इस बात की भी है कि सपा समर्थक बसपा को वोट देने के बजाय कांग्रेस या बीजेपी को वोट दे दें। इसी तरह कांग्रेस के आजाने से मुस्लिम वोटबैंक भी बंटेगा। मुस्लिम मतदाताओं को पता है कि नरेन्द्र मोदी की असली चुनौती अखिलेश और मायावती नहीं बल्कि राहुल गाँधी हैं। ऐसे में इस बात की सम्भावना अधिक है कि गठबंधन की तुलना में मुस्लिम वोट कांग्रेस की झोली में अधिक गिरें। कांग्रेस मुस्लिमों के साथ ही दलितों को साधने की पूरी कोशिश कर रही है। इसी के चलते बुधवार को प्रियंका गाँधी मेरठ में भीम आर्मी के नेता चन्द्रशेखर को देखने अस्पताल पहुँचीं और उनकी जैम कर तारीफ की। कांग्रेस को उम्मीद है कि अगर उत्तर प्रदेश में मुस्लिम और दलित वोट बंटते हैं तो कांग्रेस को फायदा मिलेगा। लेकिन राजनितिक पंडितों का मानना है कि दो की लड़ाई में फायदा बीजेपी हो हो सकता है। आइये अब कांग्रेस की दूसरी सूची में शामिल उत्तर प्रदेश के कैंडिडेट पर नज़र डाल लें।

 राज बब्बर मुरादाबाद, श्रीप्रकाश जायसवाल कानपुर से लड़ेंगे

राज बब्बर मुरादाबाद, श्रीप्रकाश जायसवाल कानपुर से लड़ेंगे

मुरादाबाद : कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव 2019 के लिए उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राज बब्बर को मुरादाबाद से उम्मीदवार बनाया है। पिछली बार वह गाजियाबाद से लड़े थे जहां उन्हें भाजपा उम्मीदवार वीके सिंह के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। 2015 में राज बब्बर को उत्तराखंड से राज्यसभा भेजा गया था। 2016 से बब्बर उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की कमान संभाल रहे हैं। 2009 से 2014 तक वो फिरोजाबाद से सांसद रहे। उससे पहले 1999 से 2009 तक आगरा से सांसद रहे। लेकिन 2014 के बाद वह कांग्रेस को प्रदेश में फिर से खड़ा करने में बहुत सफल नहीं हुए।राज बब्बर 3 बार लोकसभा सांसद और 2 बार राज्यसभा सांसद रह चुके हैं।

नगीना (एससी): इस सुरक्षित लोकसभा सीट पर कांग्रेस ने ओमवती जाटव को टिकट दिया है। हाल ही में बिजनौर की पूर्व सांसद ओमवती और उनके पति पूर्व आईएएस आरके सिंह भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए थे। ओमवती ने अपनी सियासत की शुरूआत कांग्रेस से की थी। वे 1985 में नगीना सीट से विधायक बनीं। इसके बाद सपा में चली गईं। सपा के टिकट पर 1996 में विधायक और 1997 में सांसद बनीं। 2002 में सपा से विधायक बनीं। 2007 में वे सपा का दामन छोड़कर बसपा में चली गईं और चुनाव जीतकर विधायक बनीं। बसपा सुप्रीमो मायावती ने उन्हें राज्यमंत्री बनाया। लेकिन वो 2012 के चुनाव में बसपा के टिकट से विधानसभा चुनाव हार गईं।

कानपुर : कानपुर शहर से श्रीप्रकाश जायसवाल को प्रत्याशी घोषित किया गया है। तीन बार सांसद और केंद्रीय मंत्री रहे श्रीप्रकाश जायसवाल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं। श्रीप्रकाश जायसवाल 1990 में शहर के महापौर रहे। पार्टी ने वर्ष 2000 में श्रीप्रकाश जायसवाल को प्रदेश अध्यक्ष की भी जिम्मेदारी सौंपी थी। वर्ष 1999, 2004 और 2009 में शहर से लोकसभा के लिए चुने गए। 2004 में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री बने और 2009 में कोयला राज्यमंत्री की जिम्मेदारी दी गई।

दूसरी पार्टी से आए नेताओं को टिकट

दूसरी पार्टी से आए नेताओं को टिकट

मिस्रिख (एससी) : सीतापुर की मिश्रिख सुरक्षित सीट से पूर्व केंद्रीय मंत्री राम लाल राही की पुत्रवधु मंजरी राही को टिकट दिया गया है। राम लाल राही और मंजरी राही 14 फरवरी को ही कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के सामने प्रदेश मुख्यालय पर कांग्रेस में शामिल हुए थे।

संतकबीरनगर से परवेज खान और बांसगांव सुरक्षित सीट से कुश सौरभ को प्रत्याशी बनाया गया है। लालगंज सुरक्षित सीट पर कांग्रेस ने पंकज मोहन सोनकर पर दांव लगाया है। मिर्जापुर से पूर्व विधायक ललितेश पति त्रिपाठी को टिकट दिया गया है। वह प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय कमला पति त्रिपाठी के पौत्र हैं। इसके अलावा राबर्ट्सगंज सुरक्षित सीट से भगवती प्रसाद चौधरी को मैदान में उतारा गया है।

सीतापुर से हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुई पूर्व सांसद कैसर जहां को सीतापुर से कांग्रेस का टिकट दिया गया है। बहराइच में बीजेपी छोड़ कांग्रेस में शामिल हुई भाजपा की मौजूदा सांसद सावित्री बाई फूले को बहराइच से टिकट दिया गया है। मोहनलालगंज सुरक्षित सीट से हाल ही में सपा से कांग्रेस में आए रामाशंकर भार्गव को मैदान में उतारा गया है।

सुल्तानपुर से डॉ. संजय सिंह को टिकट दिया गया है। वे वर्तमान में राज्यसभा सदस्य भी हैं। प्रतापगढ़ से रत्ना सिंह को टिकट दिया गया है। वे पूर्व में भी कांग्रेस से एमपी रह चुकी हैं। खीरी सीट से जफर अली नकवी को चुनाव मैदान में उतारा गया है।

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