डीआरडीओ बना चुका है कई घातक हथियार और विशेष उपकरण, जानिए कुछ खास प्रोडक्ट्स के बारे में
DRDO: डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइज़ेशन (डीआरडीओ) ने हाल ही में भारत में सबसे हल्का बुलेटप्रूफ जैकेट तैयार किया है, जिसका वजन सिर्फ 9.7 किलोग्राम है। इस जैकेट को 'भाभा कवच' नाम दिया गया है, जिसे 7.62 मिलीमीटर गोलियों से सुरक्षा प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। डीआरडीओ ने पहले भी कई खास उपकरण और हथियार तैयार किए हैं, आइये जानते हैं उनके बारे में!
अग्नि प्राइम का सफल ट्रायल
डीआरडीओ ने ओडिशा के तट पर डॉ एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से न्यू जनरेशन की बैलिस्टिक मिसाइल 'अग्नि प्राइम' का सफलतापूर्वक फ्लाइंग ट्रायल किया। अप्रैल 2024 में हुआ यह ट्रायल, मिसाइल के तीन सफल डेवलपमेंटल ट्रायल्स के बाद किया गया पहला प्री-इंडक्शन नाइट लॉन्च था।

सफल ट्रायल ने सिस्टम की एक्यूरेसी और रिलायबिलिटी को अप्रूव किया, जिससे अग्नि प्राइम को सशस्त्र बलों में शामिल करने का रास्ता साफ़ हो गया। मिसाइल की पूरी ट्रेजेक्टरी को कवर करने वाले फ्लाइट डेटा को कैप्चर करने के लिए विभिन्न स्थानों पर रडार, टेलीमेट्री और इलेक्ट्रो ऑप्टिकल ट्रैकिंग सिस्टम जैसे रेंज इंस्ट्रूमेंटेशन तैनात किए गए थे।
प्रोपल्शन सिस्टम क्रूज मिसाइल हुई सक्सेस
डीआरडीओ ने 18 अप्रैल, 2024 को ओडिशा के चाँदीपुर में इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज में मेड इन इंडिया प्रोपल्शन सिस्टम वाली क्रूज मिसाइल का सफलतापूर्वक ट्रायल किया था। इस ट्रायल में इंडिजेनस टेक्नोलॉजी क्रूज मिसाइल (आईटीसीएम) प्रोजेक्ट शामिल था, जिसमें गैस टर्बाइन रिसर्च एस्टेब्लिशमेंट (जीटीआरई) द्वारा तैयार किया गया स्मॉल टर्बो फैन इंजन (एसटीएफई) शामिल था।
स्वदेशी प्रोपल्शन सिस्टम, मिसाइल में पहले के रूसी इंजन को रिप्लेस करेगा। 'निर्भय' के नाम से जानी जाने वाली मिसाइल 'एसटीएफई MANIK इंजन' से लैस है और ट्रायल के दौरान इसने वेपॉइंट नेविगेशन के साथ बहुत कम ऊंचाई पर समुद्र में उड़ान भरने का प्रदर्शन किया।
एमपीएटीजीएम वेपन सिस्टम किया लॉन्च
डीआरडीओ और भारतीय सेना ने 13 अप्रैल, 2024 को राजस्थान के पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज (पीएफएफआर) में मैन-पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (एमपीएटीजीएम) वेपन सिस्टम का सफलतापूर्वक ट्रायल किया था। ट्रायल में मिसाइल का परफॉरमेंस, वारहेड परफॉरमेंस और टेंडम वारहेड सिस्टम काबिल-ए-तारीफ़ पाया गया, जिसमें आधुनिक आर्मर प्रोटेक्टेड मेन बैटल टैंक्स को हराने की क्षमता है। टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट और सफल परीक्षणों ने अब सिस्टम के भारत की सेना में शामिल होने के रास्ते को आसान कर दिया है। एमपीएटीजीएम सिस्टम इतना हल्का है कि इसे एक व्यक्ति द्वारा भी आसानी से उठाया जा सकता है।
'अग्नि-5' मिसाइल का भी हुआ सफल ट्रायल
डीआरडीओ ने मार्च 2024 में 'अग्नि-5' मिसाइल का सफल ट्रायल किया। यह मिसाइल मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेबल री-एंट्री व्हीकल (एमआईआरवी) टेक्नोलॉजी से लैस है, जिससे यह अलग-अलग स्थानों पर कई वारहेड तैनात कर सकती है, जिससे भारत की न्यूक्लियर डिटरेंस कैपेसिटी को बहुत जबरदस्त मज़बूती मिली है।
'अग्नि मिसाइल फ़ैमिली' का हिस्सा अग्नि-5 मिसाइल की रेंज 5,000 किलोमीटर से अधिक है और यह लगभग 1 टन न्यूक्लियर वारहेड ले जा सकती है। अग्नि 5 मिसाइल 'मिशन दिव्यास्त्र' का हिस्सा है। मिसाइल के सफल परीक्षण के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डीआरडीओ के साइंटिस्ट्स पर गर्व जताया।
एचईएयूवी का भी सफल ट्रायल
मार्च 2024 में, डीआरडीओ ने कोच्चि में कोचीन शिपयार्ड्स इंटरनेशनल शिप रिपेयर फैसिलिटी (आईएसआरएफ) जेटी पर हाई एंड्योरेंस ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल (एचईएयूवी) का पहला सरफ़ेस रन सफलतापूर्वक पूरा किया। यह उपलब्धि भारत की अंडरवाटर टेक्नोलॉजी और डिफ़ेंस रिसर्च में एक महत्वपूर्ण कदम थी, जो ऑटोनोमस अंडरवाटर सिस्टम में देश की बढ़ती ताकत को दर्शाती है।
6000 टन वज़न और 12 मीटर लंबाई वाला एचईएयूवी पानी के भीतर निगरानी, माइन डिटेक्शन और दुश्मन की पनडुब्बियों पर नज़र रखने के लिए एडवांस्ड सेंसर मॉड्यूल, कम्युनिकेशन सिस्टम, टक्कर से बचने वाले उपकरणों और सोनार सिस्टम से लैस है।
आकाश मिसाइल का फ्लाइंग ट्रायल सफल
डीआरडीओ ने जनवरी 2024 में भारत की नेक्स्ट जनरेशन 'आकाश' मिसाइल का सफल फ्लाइंग ट्रायल किया, जिसे 'आकाश-एनजी' के नाम से जाना जाता है। यह ट्रायल ओडिशा के तट पर चांदीपुर में इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज में बहुत कम ऊंचाई पर एक तेज़ रफ़्तार वाले अनमैन्ड एरियल टारगेट पर किया गया था।
आकाश-एनजी मिसाइल सिस्टम बहुत ही एडवांस्ड है, जिसकी रेंज लगभग 80 किलोमीटर है, और इसे तेज़ रफ़्तार वाले, फुर्तीले हवाई खतरों को रोकने के लिए डिज़ाइन किया गया है। सफल ट्रायल ने इंडिजेनियस रेडियो फ्रीक्वेंसी सीकर, लॉन्चर, मल्टी-फंक्शन रडार और कमांड, कंट्रोल और कम्युनिकेशन सिस्टम के साथ मिसाइल सहित पूरे आर्मर सिस्टम को अप्रूव किया।
'उग्राम' इंडिजेनस असॉल्ट राइफल की लॉन्च
जनवरी 2024 में, डीआरडीओ ने एक प्राइवेट इंडस्ट्री पार्टनर के साथ कॉलेबोरेट करके 'उग्राम' नाम से एक इंडिजेनस असॉल्ट राइफल लॉन्च की थी। 7.62 x 51 मिलीमीटर के कैलिबर वाली राइफल को एक प्राइवेट इंडस्ट्री पार्टनर के कॉलेबोरेशन से डिजाइन, डेवलोप और मैन्युफैक्चर किया गया था। राइफल के पहले प्रोटोटाइप का लॉंच पुणे में डीआरडीओ के आर्मामेंट एंड कॉम्बैट इंजीनियरिंग सिस्टम में किया गया था। इसकी इफेक्टिव रेंज 500 मीटर है और इसका वजन चार किलोग्राम से कम है।
इस राइफल को भारतीय सेना की जनरल स्टाफ क्वालिटेटिव रिक्वायरमेंट्स (जीएसक्यूआर) के आधार पर डिजाइन किया गया था और इसमें 20 राउंड की मैगजीन है तथा यह सिंगल और फुल ऑटो मोड दोनों में फायर करती है।
भारत के एयरोस्पेस को मज़बूत करने के लिए तैयार किया यूएवी
डीआरडीओ ने स्वदेशी हाई-स्पीड फ्लाइंग विंग यूएवी (अनमैन्ड एयर व्हीकल) ऑटोनॉमस फ्लाइंग विंग टेक्नोलॉजी डेमोस्ट्रेटर का सफल फ्लाइंग ट्रायल पूरा किया। यह ट्रायल 15 दिसंबर, 2023 को कर्नाटक के चित्रदुर्ग में किया गया था। यह उपलब्धि भारत को उन देशों के विशिष्ट समूह में शामिल करती है, जिन्होंने फ्लाइंग विंग टेक्नोलॉजी में महारत हासिल कर ली है।
डीआरडीओ के एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट द्वारा डिजाइन और डेवलप किया गया यूएवी टेललेस कॉन्फ़िगरेशन के साथ आता है, जो भारत की एयरोस्पेस कैपेसिटी को मज़बूत करता है। इसकी ऑटोनोमस लैंडिंग कैपेसिटी की वजह से ग्राउंड रडार, इंफ्रास्ट्रक्चर या पायलट की जरूरत को खत्म हो जाती है।
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