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जनरल बाजवा ने 1971 की जंग पर दिया विवादित बयान, कहा- सिर्फ 34 हजार सैनिकों ने किया था सरेंडर

जनरल बाजवा ने बांग्‍लादेश उदय और वहां पर भारतीय सेना के सामने पाकिस्‍तानी सेना के जवानों के आत्‍मसमर्पण को लेकर एक विवादित बयान दिया है।

पाकिस्‍तान में 29 सितंबर को जनरल कमर जावेद बाजवा आर्मी चीफ के पद से रिटायर होने जा रहे हैं। इससे पहले उन्होंने बांग्लादेश की स्थापना के दौरान पाकिस्तानी सेना के जवानों के आत्मसमर्पण को लेकर एक विवादित बयान दिया है। जनरल बाजवा ने कहा कि 1971 के युद्ध में भारतीय सेना के सामने पाकिस्‍तान के सिर्फ 34,000 जवानों ने सरेंडर किया था। जनरल बाजवा का दावा भारत के उस दावे से कही कम है जिसमें पाकिस्तान के करीब 90,000 से अधिक जवानों के आत्मसमर्पण करने की बात कही जाती है।

Image: File

'बांग्लादेश का निर्माण एक राजनीतिक विफलता थी'

'बांग्लादेश का निर्माण एक राजनीतिक विफलता थी'

मुख्य अतिथि के रूप में रक्षा और शहीद दिवस समारोह को संबोधित करते हुए, सेना प्रमुख बाजवा ने कहा, "पूर्वी पाकिस्तान संकट, एक सैन्य नहीं बल्कि एक राजनीतिक विफलता थी। बांग्लादेश जो कि कभी पूर्वी पाकिस्तान का हिस्सा था वो सेना की खामियों का नतीजा नहीं बल्कि राजनीतिक असफलता के कारण बना था।" पाकिस्तान टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक जनरल बाजवा ने कहा कि इस युद्ध में पाकिस्तान की तरफ से लड़ने वाले सैनिकों की संख्या 92,000 नहीं बल्कि 34,000 थी।

जनरल बाजवा ने कहा, बहादुरी से लड़े जवान

जनरल बाजवा ने कहा, बहादुरी से लड़े जवान

जनरल बाजवा ने आगे कहा कि ये 34,000 सैनिक भारत के ढाई लाख सैनिकों और दो लाख प्रशिक्षित मुक्ति वाहिनी सेना का सामना कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जिन 34 हजार पाकिस्‍तानी जवानों ने सरेंडर किया था वो इतनी बड़ी तादात में विपक्षी सैनिकों से लोहा ले रहे थे। वे जानते थे कि वो भारतीय सेना के आगे काफी कम हैं, फिर भी वो बहादुरी से लड़े। बाजवा ने कहा कि इन बहादुर गाजियों और शहीदों के बलिदान को आज तक पाकिस्तान द्वारा उचित रूप से स्वीकार नहीं किया गया। हम उन जवानों के बलिदान को भूल गए जो कि एक बहुत बड़ा अन्याय है।

सेना पर उठ रही अंगुलियों पर कही ये बात

सेना पर उठ रही अंगुलियों पर कही ये बात

बांग्‍लादेश उदय के बारे में ज‍िक्र करते हुए जनरल बाजवा ने कहा कि पूर्वी पाकिस्‍तान के चीफ मार्शल ला प्रशासक और पाकिस्‍तान सेना के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल आमिर अब्‍दुल्‍ला खान नियाजी ने 16 दिसंबर 1971 को भारतीय कमांडर के सामने आत्‍मसमर्पण किया था और इसके दस्‍तावेज को साइन किया था। इसके साथ ही बांग्‍लादेश का उदय हुआ था। जनरल बाजवा ने पाकिस्‍तान सेना पर उठाई जा रही अंगुलियों के जवाब में कहा कि इसको सहने की एक सीमा होती है।

‘सेना को बदनाम करने के लिए गढ़ी गई फर्जी कहानी’

‘सेना को बदनाम करने के लिए गढ़ी गई फर्जी कहानी’

सेना प्रमुख ने कहा कि पाकिस्तानी सेना के वरिष्ठ नेतृत्व को बदनाम करने के लिए एक नकली कहानी गढ़ी गई थी और सेना को बदनाम करने के लिए अभद्र शब्दों का इस्तेमाल किया गया था लेकिन सेना के नेतृत्व ने संसाधन और विकल्प होने के बावजूद संयम बरता। जनरल बाजवा ने किसी का नाम लिए बगैर कहा कि देश में अस्थिरता पैदा करने के लिए एक फर्जी कहानी गढ़ी गई थी और अब इस फर्जी कहानी से दूर होने की कोशिश की जा रही है।

देश के खिलाफ कभी नहीं जाएगी सेनाः बाजवा

देश के खिलाफ कभी नहीं जाएगी सेनाः बाजवा

इमरान खान पर अप्रत्यक्ष रूप से हमला करते हुए जनरल बाजवा ने कहा कि सेना का नेतृत्व कभी भी राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा। क्या आप मानते हैं कि सशस्त्र बल एक विदेशी साजिश के खिलाफ वैसे ही चुप बैठे रहेंगे। यह असंभव है, बल्कि एक बड़ा पाप है। जो लोग सेना और जनता के बीच दरार पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं वे जान लें कि उनकी कोशिश कभी सफल नहीं होगी। उन्होंने कहा, "यह भी एक तथ्य है कि गलतियां हर संस्था, राजनीतिक दल और नागरिक समाज से हुई हैं। हमें इन गलतियों से सीख लेनी चाहिए और आगे बढ़ना चाहिए।" सेना प्रमुख ने कहा कि उन्हें गर्व है कि वह पिछले छह साल से पाकिस्तानी सेना के कमांडर हैं।

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