Pakistan: इमरान खान का आरोप, पूर्व सेना प्रमुख बाजवा ने भारत के साथ दोस्ती करने का डाला था दबाव
इमरान खान ने कहा है कि पूर्व सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा ने उन पर भारत के साथ दोस्ती बहाल करने के लिए दबाव डाला था। बाजवा भारत के साथ दोस्ती चाहते थे और इसके लिए उनपर दबाव बनाते थे।

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पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने आरोप लगाया है कि पूर्व सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा ने उन पर पड़ोसी देश भारत के साथ दोस्ती करने का दबाव डाला था। इमरान खान ने दावा किया है कि पूर्व सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा दो देशों के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध विकसित करना चाहते हैं। पाकिस्तानी समाचार चैनल दुनिया न्यूज की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ प्रमुख ने यह भी आरोप लगाया कि बाजवा सिद्धांतों से जुड़े व्यक्ति नहीं हैं।
बाजवा सेना के प्रति जवाबदेह नहीं
इमरान खान ने कहा कि बाजवा एक दिन पहले कुछ कहते थे और एक दिन के बाद वह अपनी ही बात से मुकर जाते थे। इमरान ने कहा कि बाजवा को सेना के प्रति जवाबदेह होना चाहिए। आम चुनाव के बारे में एक सवाल का जवाब देते हुए खान ने कहा कि अगर 90 दिनों में चुनाव नहीं हुए तो देश में संविधान नहीं बचेगा। उन्होंने कहा कि इससे उन्हें सीधी कार्रवाई करने में मदद मिलेगी। इमरान की यह टिप्पणी शहबाज सरकार की उस पृष्ठभूमि में आई है जिसमें कहा गया था कि पाकिस्तान नई दिल्ली के साथ पर्दे के पीछे किसी तरह की बातचीत से इनकार करता है।
बैकचैनल वार्ता के दावे से इनकार
आपको बता दें कि भारत और पाकिस्तान जटिल संबंधों को साझा करते हैं, जो अक्सर सीमा पार आतंकवाद, युद्धविराम उल्लंघन, क्षेत्रीय विवादों और अन्य चीजों से प्रभावित होते हैं। इस महीने की शुरुआत में, पाकिस्तान ने फिर से इनकार किया कि वह सीमावर्ती भारत के साथ कोई बैकचैनल वार्ता कर रहा है। विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मुमताज जहरा बलूच ने इससे पहले एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा था कि आज जो हालात हैं, इस दौर में पाकिस्तान और भारत के बीच पर्दे के पीछे किसी तरह की बातचीत संभव नहीं है।
2019 से और बिगड़े रिश्ते
आपको बता दें कि भारत के साथ पाकिस्तान के संबंधों पर साल 2019 से बर्फ जमी है। पुलवाम आतंकी हमले के बाद भारत ने प्रतिक्रिया के रूप में बालाकोट एयर स्ट्राइक को अंजाम दिया था। इसके बाद अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर से विशेष दर्जा वापस लिए जाने के बाद पाकिस्तान ने भारत के साथ राजनयिक संबंधों को कम कर लिया था बल्कि द्विपक्षीय व्यापार को भी निलंबित कर दिया था। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक 2021 में जब दो देश बैकचैनल वार्ता में शामिल हुए तो, संबंधों में बदलाव की संभावना थी।
2021 में हुई थी गुप्त बैठक
फरवरी 2021 में संयुक्त अरब अमीरात में भारत और पाकिस्तान के वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों के बीच गुप्त बैठकों में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के संघर्ष विराम समझौते का नवीनीकरण हुआ था। इसके बाद आने वाले दिनों में ऐसे और कदम उठाए जाने की उम्मीद जगी थी। लेकिन इसके बाद से दोनों देशों के रिश्तों में गर्मजोशी का कोई संकेत देखने को नहीं मिला। हालांकि, भारत ने पड़ोसी देश के साथ सामान्य संबंधों की अपनी इच्छा को बनाए रखा है।












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