Imran Khan: 'सेना सिर्फ सरहद पर रहेगी', जानिए इमरान खान के किस प्लान से बौखलाई है PAK आर्मी?
इमरान खान के खिलाफ पूरे पाकस्तान में 80 से ज्यादा मुकदमे दर्ज किए गय हैं और उनके खिलाफ हर दिन, किसी ना किसी कोर्ट में मुकदमा चलता रहता है।

Imran Khan Vs Pak Army: पाकिस्तान में कहा जाता है, कि पाकिस्तानी सेना ही देश में नेता को पैदा करती है। जिसे मर्जी चाहा प्रधानमंत्री बना दिया और जब मर्जी चाहा, उसे सत्ता से बेदखल कर दिया। पाकिस्तान की राजनीति को पूरी तरह से सेना कंट्रोल करती है और अभी तक यही होता आया है। लेकिन, इमरान खान ने इस परंपरा को ही चुनौती दे डाली है। हालांकि, इमरान खान को भी प्रधानमंत्री बनाने में सेना का ही हाथ था, लेकिन इमरान खान ने सेना के खिलाफ ही बगावत कर दी, जिसका नतीजा ये हुआ, कि सेना ने इमरान को सत्ता से बाहर फेंक दिया। लेकिन, इमरान खान ने हार नहीं मानी है और उन्होंने उस प्लान पर काम शुरू कर दिया है, जिससे पाकिस्तान की राजनीति में सेना का वर्चस्व ही खत्म हो जाएगा और सेना, इमरान खान के इस प्लान को जान गई है। आखिर क्या करना चाहते हैं इमरान, आइये जानते हैं।

सेना बनाम इमरान खान
नाम न छापने की शर्त पर एक शीर्ष सैन्य सूत्र ने CNN-News18 को बताया, कि पाकिस्तानी सेना के शीर्ष नेतृत्व को लगता है, कि पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के प्रमुख इमरान खान, पाकिस्तानी सेना के "अस्तित्व के लिए खतरा" हैं। सूत्र के मुताबिक, 'अगर इमरान खान सत्ता में वापस आते हैं, तो वह सिस्टम में कई चीजें बदल देंगे, जो संस्थान के अनुरूप नहीं होगा।' यानि, इमरान खान पाकिस्तानी सेना को सरहद तक ही सीमित कर देना चाहते हैं, ना कि घरेलू राजनीति में सेना का दखल चाहते हैं और इस बात से सेना चिढ़ी हुई है। सूत्र ने कहा, कि "सेना के शीर्ष नेतृत्व को लगता है, कि इमरान खान पूर्व सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा के खिलाफ बदला लेंगे, लिहाजा पाकिस्तानी सेना इमरान खान को एक संभावित खतरा मानती है।"

संसद के जरिए सेना के कतरेंगे पर?
इमरान खान के करीबी सहयोगियों के हवाले से सूत्र ने कहा, कि 'इमरान खान देश की संसद की मदद से पाकिस्तानी सेना में बड़े संरचनात्मक बदलाव की योजना बना रहे हैं। जब वह सत्ता में आएंगे, तो वह पाकिस्तानी सेना के ढांचे को पूरी तरह से बदल देंगे। इसके तहत, प्रधानमंत्री ही, ग्रेड 21 और 22 संघीय सरकारी अधिकारियों के समान मेजर जनरल, लेफ्टिनेंट जनरलों की नियुक्तियां करेंगे या फिर उनका प्रमोशन करेंगे"। यानि, इमरान खान पाकिस्तान की सेना को पूरी तरह से सरकार के अधीन लाएंगे, यानि जो सेना सालों से पाकिस्तानी राजनीति को कंट्रोल करती आई है, उसका कंट्रोल राजनीति से पूरी तरह हट जाएगा, तो किसी भी हाल में पाकिस्तानी आर्मी नहीं चाहती है।

बाजवा से कैसे बदला लेंगे इमरान?
सूत्र ने खुलासा किया, कि एक वक्त इमरान खान और पूर्व पाकिस्तानी आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा सबसे अच्छे दोस्त थे, लेकिन पाकिस्तान के इंटर-स्टेट इंटेलिजेंस (आईएसआई) के महानिदेशक के रूप में जनरल फैज को हटाने के बाद उनके बीच मतभेद शुरू हो गया, जो आखिरकार इमरान की सत्ता से विदाई का कारण बना। सूत्र ने कहा, कि इमरान खान, पूर्व आईएसआई प्रमुख फैज हमीद को सेना प्रमुख बनाना चाहते थे, लेकिन पाकिस्तानी सेना के कमांडरों ने आंतरिक रूप से इसका विरोध किया था। सूत्र ने कहा, कि "इमरान ने अपने वादों और प्रतिबद्धताओं पर बहुत सारे यू-टर्न लिए। उन्होंने सत्ता से किए अपने वादों को भी कभी पूरा नहीं किया और हमेशा इनकार करने की अवस्था में ही रहे। इसलिए संस्था (सेना) अब उन पर भरोसा करने को तैयार नहीं है।' इसके साथ ही, इमरान खान किसी भी तरह से बाजवा से बदला लेना चाहते हैं, लिहाजा उन्होंने सेना के खिलाफ ही जंग छेड़ दी है।

विदेशों से भी इमरान के संबंध हुए खराब
पाकिस्तानी सूत्र ने दावा किया, कि "प्रधानमंत्री के रूप में, इमरान खान ने चीन, संयुक्त राज्य अमेरिका और पाकिस्तान की हमेशा से मदद करने वाले देशों, जैसे सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जैसे अपने शीर्ष सुरक्षा भागीदारों के साथ पाकिस्तान के संबंधों को खराब कर दिया।" सूत्र ने खुलासा किया, कि बाजवा ने इमरान खान को रूस नहीं जाने के लिए कहा था, लेकिन यूक्रेन-रूस युद्ध के दौरान इमरान खान, अपनी योजना के साथ आगे बढ़े और अमेरिका के खिलाफ बात की, जिससे यह पाकिस्तान की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ बन गया। सूत्र ने कहा, कि पिछले साल रूस की यात्रा के बाद, दुनिया में उच्च मुद्रास्फीति के बावजूद, इमरान खान ने पेट्रोलियम की कीमत कम कर दी और अधिकतम सब्सिडी की घोषणा कर दी। सूत्र ने ये भी कहा, कि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) सौदे को भी तोड़ दिया, जिसने पाकिस्तान को "डिफ़ॉल्ट जोखिम" में डाल दिया है।

क्या पाकिस्तान में इस साल होंगे चुनाव?
वहीं, पाकिस्तान में आम और प्रांतीय चुनावों पर एक सवाल के जवाब में सूत्र ने कहा, कि पाकिस्तान चुनाव कराने की स्थिति में नहीं है। उन्होंने कहा, कि "अगर इस साल चुनाव होते हैं, तो पाकिस्तान में एक त्रिशंकु संसद का निर्माण हो जाएगा, जो उन्हीं मुद्दों को जन्म देगी। पाकिस्तान को पहले राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता चाहिए"। इस्लामाबाद को बलूच अलगाववादियों, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी), इस्लामिक स्टेट - खुरासान प्रांत (आईएसकेपी) और पश्चिमी सीमाओं जैसे कई पक्षों से सुरक्षा खतरे हैं और सेना की ताकत कई खतरों और अभियानों का सामना करने के लिए पर्याप्त नहीं है। सूत्र ने कहा, कि बाजवा भारत के साथ दोस्ती चाहते थे, लेकिन इमरान खान ने कश्मीर में धारा 370 और 35-ए को हटाने का हवाला देते हुए ऐसा करने से मना कर दिया था।
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