पूर्व PAK आर्मी चीफ बाजवा की मंजूरी के बाद तालिबान ने की थी भारत से दोस्ती, किताब में दावा, लालच में दिया साथ
तालिबान ने 15 अगस्त 2021 को अफगानिस्तान पर कब्जा किया था, जिसके बाद भारत ने काबुल में अपना दूतावास बंद कर दिया। हालांकि, पिछले साल भारत ने फिर से अपने दूतावास का कामकाज शुरू कर दिया है।

India Pakistan Taliban: भारत और तालिबान के बीच के संबंध अब काफी सामान्य हो चुके हैं और राजधानी काबुल में भारतीय विदेश विभाग के अधिकारी फिर से काम कर रहे हैं, जबकि भारत लगातार अफगानों की मदद के लिए गेहूं की सप्लाई कर रहा है।
भारत और तालिबानी नेताओं के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है और तालिबान भारत से अफगानिस्तान में अपने रूके हुए प्रोजेक्ट्स को फिर से शुरू करने की अपील भी कर चुका है। इस बीच अफगानिस्तान पर आई एक किताब में दावा किया गया है, कि तालिबान ने भारत से संबंध सुधारने से पहले पूर्व पाकिस्तानी आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा की मंजूरी ली थी।
पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स में अफगानिस्तान पर आई किताब, 'द रिटर्न ऑफ द तालिबान' के हवाले से ये दावा किया गया है, जिसे वॉशिंगटन में पढ़ाने वाले हसन अब्बास ने लिखा है।
डॉन ने इस अखबार के हवाले से लिखा है, कि "तालिबान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी ने भारत से काबुल में अपने राजनयिकों और तकनीकी कर्मचारियों को वापस बुलाने के लिए कहने से पहले, पाकिस्तान के पूर्व सेना प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा के साथ एक विस्तृत बैठक की"।

किताब में भारत-पाकिस्तान तालिबान पर दावे
दक्षिण एशियाई मामलों के वरिष्ठ स्कॉलर मार्विन जी. वेनबॉम ने कहा, कि तालिबान की वापसी "तालिबान की सत्ता पर कब्जा करने के लिए महत्वपूर्ण फैसलों" को उजागर करती है।
इस किबात में दावा किया गया है, कि "काबुल में भारत की वापसी पाकिस्तान के बिना नहीं हो सकती थी, और पाकिस्तान ने इस तरह से काम किया, क्योंकि यह अफगानिस्तान में तालिबान के लिए कुछ सहायता की संभावनाएं खोल सकता था।"
किताब के लेखक हसन अब्बास ने दावा किया है, कि "अफगानिस्तान के लिए वित्तीय सहायता हासिल करने के लिए पाकिस्तान बेताब था और खुद तालिबान भी किसी तरह से वित्तीय मदद हासिल करना चाहता था, लिहाजा तालिबान को भारत की जरूरत थी, जो अफगानिस्तान में मदद पहुंचा सकता था।"
किताब में दावा किया गया है, कि "भारत के अफगानिस्तान में रणनीतिक हित हैं, लेकिन रूस और चीन के विपरीत, भारत ने तालिबान के काबुल अधिग्रहण के बाद अफगानिस्तान के साथ राजनयिक संबंध तोड़ दिए थे।"
लेकिन किताब में यह भी कहा गया है, कि "भारत अब गंभीरता से अपनी स्थिति का पुनर्मूल्यांकन कर रहा है और तालिबान के साथ जुड़ने और अफगानिस्तान को स्थिर करने में मदद करने के अपने प्रयास में एक संतुलन बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है"।
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भारत से दोस्ती को उत्साहित क्यों है तालिबान?
किताब में इस बात पर प्रकाश डाला गया है, कि आखिर तालिबान भारत से दोस्ती करने के लिए इतना उत्सुक क्यों रहा है? किताब में दावा किया गया है, कि "तालिबान की इच्छा काफी सामान्य है, कि उसे अंतर्राष्ट्रीय वैधता और मान्यता चाहिए"। काबुल के नए शासकों को भी "विशाल बाहरी निवेश ... देश के पुनर्निर्माण और पुनरुद्धार के लिए" की वित्तीय मदद की आवश्यकता है और भारत के पास ऐसा करने के लिए संसाधन हैं।"
इस किताब में तालिबान के काबुल पर कब्जा करने के बाद पूर्व आईएसआई प्रमुख जनरल फैज हमीद की काबुल यात्रा और तालिबानी नेताओं से मुलाकात की भी चर्चा की गई है।

किताब में दावा किया गया है, कि "तालिबान के अधिग्रहण के तुरंत बाद आईएसआई के पूर्व प्रमुख फैज हामिद ने काबुल यात्रा की थी, जिसकी तस्वीर पूरी दुनिया में वायरल हो गई थी"। किताब में लिखा गया है, कि "पाकिस्तान विदेश कार्यालय ने जनरल हामिद को काबुल में पाकिस्तानी दूतावास में ही रहने की सलाह दी थी, लेकिन अति आत्मविश्वास वाले आईएसआई प्रमुख ने इसे खारिज कर दिया था"।












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