गृहयुद्ध या नेताओं का फिर मांग रहा बलिदान? अगले 17 दिन पाकिस्तान पर बहुत भारी पड़ने वाले हैं
पाकिस्तान में प्रधानमंत्री ही आर्मी चीफ की नियुक्ति करता है और उसके बाद आर्मी चीफ के इशारे पर ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री काम करते हैं।
Pakistan News: पाकिस्तान में जारी भारी राजनीतिक उथल-पुथल के बीच इस महीने काफी कुछ होने वाला है और केन्द्र में मौजूदा पाकिस्तानी राजनीति के तीन चेहरे हैं। एक प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, दूसरे पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और तीसरे शख्स हैं पाकिस्तानी आर्मी चीफ के प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा। आर्मी चीफ बाजवा इस महीने ही रिटायर हो रहे हैं और पाकिस्तान में इसी बात को लेकर कोहराम मचा हुआ है, कि अगला आर्मी चीफ कौन होगा और जिसने आर्मी चीफ को अपने पाले में कर लिया, पाकिस्तान पर उसी का राज होगा। ये बात बच्चा-बच्चा भी जानता है और इसीलिए इमरान खान पूरी ताकत के साथ आर्मी चीफ की नियुक्ति में अपनी भूमिका के लिए आंदोलन पर निकले हुए हैं। लिहाजा, इसी महीने तय हो जाएगा, कि पाकिस्तान का अगला प्रधानमंत्री कौन होने वाला है?

पाकिस्तान में राजनीतिक तूफान
रैली में गोलीबारी की घटना में बचने के बाद इमरान खान ने तत्काल चुनाव की मांग के साथ इस्लामाबाद की यात्रा को जारी रखने का फैसला किया है और उनकी रैली लाहौर होते हुए इस्लामाबाद तक पहुंचने वाली है। इमरान खान ने 28 अक्टूबर को हुए हमले के बाज "लॉन्ग मार्च" को बंद नहीं करने का फैसला किया है। दूसरी तरफ शहबाज शरीफ सरकार ने भी अपनी हाथों में महत्वपूर्ण पत्ते रखे हुए हैं, लेकिन असली लड़ाई पर्दे के पीछे चल रही है, जो इमरान खान और सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा के बीच है और पाकिस्तान में मची अराजकता की वजह ही ये है, कि इमरान खान अपनी मर्जी का सैन्य प्रमुख चाहते हैं। लेकिन, शहबाज शरीफ आर्मी चीफ के चयन में इमरान खान को किसी भी तरह की भूमिका देने से साफ इनकार कर चुके हैं और इमरान खान मानने के लिए तैयार नहीं हैं। ऐसे में आइये जानते हैं, वो चार हालात, जिनके पाकिस्तान में इस महीने होने की संभावनाए हैं।

1- बाजवा रिटायर्ड होंगे और नये आर्मी चीफ की नियुक्ति होगी
सभी तरह के संकेत यही हैं और सबसे संभावित परिदृश्य भी यही है कि पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरकल कमर जावेद बाजवा इसी महीने 29 नवंबर को रिटायर्ट हो जाएंगे। उन्होंने पिछले महीने भी साफ कर दिया है, कि उन्हें एक्सटेंशन नहीं चाहिए और वो 29 नवंबर को रिटायर्ड हो जाएंगे। 10 नवंबर को पाकिस्तानी सेना की मीडिया विंग इंटर सर्विस पब्लिक रिलेशंस ने एक बयान में कहा कि, जनरल बाजवा ने "अपनी विदाई यात्राओं के हिस्से के रूप में" सियालकोट और मंगला गैरिसन का दौरा किया था। 9 नवंबर को, उन्होंने पेशावर कोर का दौरा किया था और उन्होंने रावलपिंडी में कोर कमांडरों की बैठक भी की थी, जिसमें उन्होंने सभी सैन्य अफसरों से राजनीति से बचकर सलाह दी थी। बाजवा ने इन विदाई कार्यक्रमों की शुरुआत एक नवंबर को आर्मी एयर डिफेंस कमांड के दौरे के साथ कर दी थी। बाजवा के बाद अगला आर्मी चीफ कौन होगा, इसका ऐलान उनके रिटायर होने के अगले दिन यानि 30 नवंबर को होगा। अभी तक किसी के भी नाम की घोषणा नहीं की गई है, जो हैरान करने वाला है और इसके पीछे वर्तमान राजनीतिक गतिरोध है। हालांकि, ऐसी संभावना है, कि शहबाज शरीफ ने अगले आर्मी चीफ के नाम का फैसला कर लिया है और इसके लिए उन्होंने लंदन में पाकिस्तान से भाग चुके अपने भाई नवाज शरीफ की मदद ली है।

नये आर्मी चीफ से कैसे होंगे इमरान के संबंध?
पाकिस्तान में प्रधानमंत्री ही आर्मी चीफ की नियुक्ति करता है और उसके बाद आर्मी चीफ के इशारे पर ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री काम करते हैं। लिहाजा, जो आर्मी चीफ बनेगा, वही तय करेगा, कि देश का अगला प्रधानमंत्री कौन होगा, लिहाजा इमरान खान इस बात को लेकर टेंशन में हैं, कि अगर आर्मी चीफ उनके पसंद का नहीं हुआ, तो फिर उनकी राजनीति ही खत्म कर दी जाएगी। डॉन के एक करीबी सूत्र ने बताया कि, लंदन में अपने भाई नवाज से मिल चुके शहबाज शरीफ किसी भी कीमत पर सेना प्रमुख की नियुक्ति के लिए प्रधानमंत्री की शक्ति का 'समर्पण' नहीं करेंगे और इमरान खान की बात नहीं मानेंगे। इमरान खान ने अपने हिस्से के लिए, पहले से ही यु द्ध की रेखाएं खींच रखी हैं, जिसमें उन्होंने कहा था, कि "चोरों" और "देशद्रोहियों" द्वारा नियुक्त एक नया सेना प्रमुख भी उनके साथ मिलकर 'चोर' हो जाएगा। अगर इमरान खान किसी भी तरह से अपने मनपसंद आर्मी चीफ की नियुक्ति करवा भी लेते हैं, तो फिर भी नया प्रमुख उनके प्रति वफादार रहेगा, इसकी संभावना कम है। बाजवा को नवाज शरीफ ने 2016 में चुना था और 2017 में बाजवा ने नवाज शरीफ को प्रधानमंत्री पद से बर्खास्त करवा दिया और नवाज शरीफ को देश छोड़कर भागना पड़ा।

2- आर्मी चीफ पद से नहीं हटते हैं बाजवा?
दूसरी संभावना ये है, कि अगर जनरल बाजवा आर्मी चीफ के पद से नहीं हटते हैं और शहबाज शरीफ किसी 'डील' के तहत उन्हें एक्सटेंशन दे देते हैं। पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकारों के मुताबित, इस संकेत के बावजूद कि बाजवा पद छोड़ने की योजना बना रहे हैं, इस संभावना के बारे में भी अटकलें जारी हैं, कि वह ऐसा नहीं कर सकते हैं। हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इमरान खान ने इसे "एक अरब डॉलर का सवाल" कहा था। यदि बाजवा बने रहते हैं (भले ही इस बिंदु पर इसकी संभावना कम लगती है) तो यह दो कारणों में से एक हो सकता है। पहला कारण ये कि, शहबाज शरीफ के साथ उनका सौदा तय हो गया हो और दोनों एक दूसरे को लाभ पहुंचाने के लिए तैयार हो गये हों। वहीं, आश्चर्यजनक ये भी है, कि पिछले हफ्ते हुए हमले के बाद इमरान खान ने प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और आईएसआई के मेजर जनरल पर तो आरोप लगाए, लेकिन उन्होंने आर्मी चीफ का नाम नहीं लिया, जिससे यह अनुमान लगाया जा रहा है, कि वह सेना प्रमुख के लिए एक दरवाजा खुला रख रहे हैं, और गतिरोध के संभावित अंत के लिए बातचीत कर रहे हैं।

तीसरी संभावना- चुनाव तक बने रहेंगे बाजवा
पाकिस्तान में एक तीसरे संभावना पर भी चर्चा हो रही है, जिसकी संभावना काफी कम है, कि शहबाज शरीफ और इमरान खान एक फैसले पर पहुंचते हैं, जहां चुनाव खत्म होने कर आर्मी चीफ को एक्सटेंशन दे दिया जाए और चुनाव के बाद बनी नई सरकार तय करे, कि नया आर्मी चीफ कौन हो। इस समझौते के तहत शहबाज शरीफ को अपनी सरकार को बर्खास्त करना होगा और नये चुनाव का ऐलान करना होगा, जिसकी मांग इमरान खान लंबे वक्त से कर रहे हैं। पाकिस्तान में ऐसा भी हो चुका है, जब 1993 में राष्ट्रपति गुलाम इशाक खान और प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के बीच मतभेद काफी ज्यादा बढ़ गया था, जब सेना प्रमुख जनरल वहीद कक्कड़ ने गतिरोध खत्म करने के लिए हस्तक्षेप किया था और उन्होंने प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति, दोनों से इस्तीफा ले लिया था और फिर मोईन कुरैशी को नया प्रधानमंत्री बनाते हुए देश में एक कार्यवाहक सरकार का गठन किया था, जिसके बाद बेनजीर भुट्टो चुनाव जीत गईं थीं। हालांकि, बेनजीर भुट्टो को 1988-90 के उनके पहले कार्यकाल में सेना उन्हें बर्खास्त कर चुकी थी, लिहाजा अपने दूसरे कार्यकाल में बेनजीर भुट्टो काफी सतर्क थी, लेकिन उसके बाद भी उन्हें दूसरे कार्यकाल में भी समय से पहले गद्दी से हटा दिया गया, वजह उनके पति आसिफ अली जरदारी पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप को बताया गया।

चौथी संभावना- इमरान खान को झुका दिया जाए
इमरान खान की हत्या की कोशिश की जा चुकी है और चौथी संभावना ये है, कि अब इमरान खान को सेना बलपूर्वक झुका दे और जनता को ये संदेश दे, कि इमरान खान को मना लिया गया है। इसकी संभावना पिछले एक हफ्ते में कई अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ियों, पूर्व क्रिकेटरों के बयानों से बन रही है, जब इमरान खान से अपील की गई है, कि वो अरनी लांग मार्च रैली को इस्लामाबाद पहुंचने से पहले ही रोक दे। वहीं, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार 2023 के मध्य तक सत्ता में रहने वाली है, जब अगले आम चुनाव का वक्त है, लिहाजा इतने वक्त में उन्हें अर्थव्यवस्था को स्थिर करने के लिए पर्याप्त समय मिल जाएगा। लेकिन, ऐसी स्थिति में फिर इमरान खान पूरी तरह से राजनीति से साइड कर दिए जाएंगे, जैसे नवाज शरीफ अलग-थलग कर दिए गये हैं। पाकिस्तान के लिए ये स्थिति काफी विडंबनापूर्ण है, क्योंकि ये स्थिति देश को एक भीषण गृहयुद्ध की तरह ले जा सकती है। ऐसे में नवंबर का महीना पाकिस्तान के भविष्य के लिए काफी अहम होने वाला है और पाकिस्तान की जनता तो कम से कम यही चाह रही है, कि शांतिपूर्वक मामले का समाधान हो जाए।
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