PAK में आज से बाजवा के उत्तराधिकारी की तलाश शुरू, सेना के नये 'बॉस' पर शहबाज की माथापच्ची
खबर है कि, शहबाज शरीफ ने नवाज शरीफ के साथ 70 साल पुरान सैन्य कानून में संशोधन को लेकर मुलाकात की है, जिसके तहत प्रधानमंत्री को सेना प्रमुख से ज्यादा अधिकार हासिल हो जाएंगे।
Pakistan news army chief: अपने हथियारों के जखीरे में परमाणु बम रखने वाला एकमात्र इस्लामिक देश पाकिस्तान में आज से नये आर्मी चीफ की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हो रही है और इस्लामिक देशों में सबसे शक्तिशाली माने जाने वाली पाकिस्तान की सेना का नेतृत्व कौन करेगा, इसका फैसला अब प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को करना है। जनरल कमर जावेद बाजवा इसी महीने 29 तारीख को अपने पद से रिटायर हो जाएंगे और उन्हें रिप्लेस करने के लिए कई नाम अब धीरे धीरे सामने आने लगे हैं, जिनमें सैन्य अधिकारियों के अलावे जासूसी एजेंसी आईएसआई के भी कई नाम हैं। पाकिस्तान का नया आर्मी चीफ कौन होगा, इसपर पूरी दुनिया की नजर है और ऐसा इसलिए, क्योंकि जो भी नया आर्मी चीफ बनेगा, वही देश की राजनीति और विदेश नीति को कंट्रोल करेगा। ऐसे में आइये जानते हैं, कि आर्मी चीफ की रेस में कौन कौन दावेदार शामिल हैं और क्या शांति के साथ नये आर्मी चीफ की नियुक्ति हो सकती है?

किसी के लिए राह आसान नहीं
पाकिस्तानी संविधान के मुताबिक, आर्मी चीफ के चुनाव का अधिकारी प्रधानमंत्री के पास होता है, लेकिन शहबाज शरीफ की नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार के लिए ये फैसला कतई आसान नहीं है और यही वजह है, कि शहबाज शरीफ पिछले दो महीने में लंदन में रह रहे अपने बड़े भाई नवाज शरीफ से आर्मी चीफ की नियुक्ति को लेकर दो बार मुलाकात कर चुके हैं। शहबाज शरीफ के लिए किसी भी नाम को फाइनल करना एक राजनीतिक जुआ ही होगा., क्योंकि सेना प्रमुख ही इस्लामिक गणराज्य पाकिस्तान में सबसे शक्तिशाली व्यक्ति हैं। जो भी सेना प्रमुख बनेगा, उसके सामने भी चुनौतियों का अंबार ही होगा, क्योंकि भारत के साथ युद्धविराम जरूर चल रहा हो, लेकिन अफगानिस्तान सीमा पूरी तरह से अशांत है। पिछले एक साल में 300 से ज्यादा पाकिस्तानी सैनिक अफगानिस्तान सीमा पर मारे जा चुके हैं। 6 लाख जवानों का भी प्रमुख बनेगा, उसके सामने एक तरह इस्लामिक कट्टरपंथी चुनौती होंगे, तो दूसरी तरफ बलूचिस्तान में चीन के खिलाफ शुरू हो चुकी सीधी लड़ाई है, जिसका संबंध सीधे तौर पर चीन से जुड़ा हुआ है। इसके साथ ही देश में आए आर्थिक संकट से सेना के बजट पर भी असर पड़ा है, जिससे भी नये सेना प्रमुख को जूझना होगा।

शहबाज शरीफ के सामने चुनौती
पाकिस्तान में नये आर्मी चीफ की नियुक्त सबसे बड़ा राजनीतिक दांव माना जाता है और 1947 के बाद से अभी तक 15 आर्मी चीफ बने हैं, जिनमें से चार सैन्य प्रमुखों ने देश की सत्ता का तख्तापलट करते हुए सीधा देश पर शासन किया है और कम से कम जनरल बाजवा इस मामले में थोड़े अलग दिखे और उन्होंने अपने बयानों में सेना को राजनीति से अलग रहने की बात कही और सेना को न्यूट्रल बताया, हालांकि एक एक्सटेंशन उन्होंने भी लिया। लिहाजा, पाकिस्तान की "हाइब्रिड डेमोक्रेसी" में, जहां एक चुनी हुई सरकार का ज्यादातर वक्त सेना को खुश रखने, जनरलों के विशेषाधिकार की रक्षा का ख्याल रखते हुए गुजरता है, वहां की सेना पर्दे के पीछे से सरकार को नियंत्रित करने के साथ साथ पाकिस्तान की विदेश नीति को भी कंट्रोल करने हैं। इसके साथ ही पाकिस्तान की सेना देश की मुख्य राजनयिक होने के साथ साथ कई बार मुख्य अर्थशास्त्री की भूमिका भी निभाते हैं। लिहाजा, शहबाज शरीफ के लिए आर्मी चीफ का चुनाव कतई आसान नहीं होगा।

नवाज शरीफ करेंगे फैसला?
पाकिस्तान के एक्सपर्ट्स का कहना है, नये सेना प्रमुख की नियुक्ति पर फैसला उस शख्स को लेना है, जिसके पास नियुक्ति पत्र पर हस्ताक्षर करने का अधिकार नहीं है और वो पाकिस्तान में भी नहीं रहता है। पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ, वर्तमान प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के बड़े भाई और पाकिस्तान मुस्लिम लीग के गॉडफादर (नवाज), जिसका नाम उन्होंने अपने नाम पर रखा है। नवाज शरीफ वो शख्स हैं, जिन्होंने परवेज मुसर्रफ को सेना प्रमुख चुना था, जिन्होंने नवाज शरीफ का ही तख्तापलट कर दिया था। लिहाजा, नवाज शरीफ अपने प्रधानमंत्री भाई की सलाहकार की भूमिका मे हैं। खास बात यह है कि, नवाज शरीफ के नाम एक और रिकॉर्ड है। देश के 15 आर्मी कमांडरों में से उन्होंने पांच को खुद नॉमिनेट किया है। फिर भी, या सैन्य जनरलों के साथ उनके संबंध खराब हो गये और उन्हें अपना पद बार बार गंवाना पड़ा। पिछले हफ्ते, बड़े शरीफ ने अपने छोटे भाई प्रधानमंत्री शरीफ को लंदन बुलाया था और प्रधान मंत्री कार्यालय के सूत्रों ने कहा कि, प्रमुख उम्मीदवारों के प्रोफाइल के साथ-साथ देश में राजनीतिक अराजकता पर चर्चा की गई है।

प्रधानमंत्री की शक्ति बढ़ाने की कोशिश
खबर तो यहां तक है, कि छोटे शरीफ ने लंदन में बड़े शरीफ के साथ कई अहम जानकारियां शेयर की हैं, जिनमें सबसे अहम जानकारी है, पाकिस्तान के 70 साल पुराने सैन्य कानून में संशोधन। इस कानून में संशोधन होने के बाद आर्मी चीफ के मुकाबले प्रधानमंत्री की शक्तियां बढ़ जाएंगी। इस बाबत लंबे समय से पाकिस्तान की राजनीति में अफवाह तैर कर रही है, लेकिन फिलहाल इस बात की संभावना बढ़ गई है, कि आर्मी लॉ में संशोधन संभव है। खबर तो ये भी है, कि ऐसा करने के साथ जनरल बाजवा के कार्यकाल को बढ़ाया जा सकता है, क्योंकि जनरल बाजवा अपने जूनियर अधिकारियों किसी को सैन्य प्रमुख पद के लिए योग्य नहीं मान रहे हैं। लिहाजा, सैन्य प्रमुख को लेकर पाकिस्तान में लगातार बहस जारी है। पाकिस्तान के तमाम टीवी और यूट्यूब चैनलों पर एक्सपर्ट्स इसी बात को लेकर चर्चा कर रहे हैं। वहीं, एक शख्स और है, जिसने शहबाज शरीफ की नाक में दम कर रखा है और वो नाम है, इमरान खान, जो लोकप्रियता के रथ पर सवार हैं और तीन गोलियां खाने के बाद अब खुद को 'शहीद' भी बताने लगे हैं।

जनरल असीम मुनीर
अगले सैन्य प्रमुख को लेकर अब कुछ नाम जो धुंधला-धुंधला सा दिखाई दे रहे हैं, उनमें एक नाम है इन्फैंट्रीमैन लेफ्टिनेंट जनरल असीम मुनीर का, जो वरिष्ठता की लिस्ट में जनरल बाजवा के बाद शीर्ष पर हैं। हालांकि, वह पाकिस्तान सैन्य अकादमी के ग्रेजुएट नहीं है, लेकिन वह सेना के एक फीडर स्कूल से "स्वॉर्ड ऑफ ऑनर" श्रेणी के टॉपर हैं, जिनकी पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी में अच्छी खासी पकड़ है। इसके अलावा कहा जाता है, कि पूरा कुरान उन्हें याद है। पाकिस्तान के अलावा उन्होंने सऊदी अरब में भी काम किया है। लेकिन, मुनीर के सामने सबसे बड़ी दिक्कत ये है, कि वो जनरल बाजवा से भी दो दिन पहले रिटायर्ट हो रहे हैं, लिहाजा उन्हें सेना प्रमुख बनाने के लिए पहले उनके कार्यकाल को बढ़ाना होगा और इसके लिए शहबाज शरीफ को राजनीतिक पैंतरेबाजी करनी होगी और सैन्य अधिनियमों में संशोधन करना होगा। ऐसे में उम्मीद कम है, कि शहबाज शरीफ जनरल असीम मुनीर को लेकर किसी विवाद में पड़ना चाहेगी। वहीं, कुछ सैन्य अंदरूनी सूत्रों ने चेतावनी दी है, कि उन्हें नामित करने से पाकिस्तान की राजनीति में भयावह राजनीति ध्रुवीकरण होगा। वहीं, सेना पर दो किताबें लिखने वाले नवाज शरीफ ने अपनी किताब में लिखा है, कि सैन्य प्रमुख के लिए उस उम्मीदवार का नाम सबसे पहले हटा देना चाहिए, जो 'खुफिया एजेंसी आईएसआई' का डार्क हाउस हो।

लेफ्टिनेंट जनरल साहिर शमशाद मिर्ज़ा
वरिष्ठता में दूसरे स्थान पर लेफ्टिनेंट जनरल साहिर शमशाद मिर्जा हैं, जिन्हें सैन्य अभियानों के प्रमुख के रूप में उनके अनुभव के आधार पर सेना की टेक्टिकल जीनियस माना जाता है। मिर्जा ने सबसे प्रतिष्ठित स्टाफ और कमांड पोस्ट पर काम किया है, जिसमें एक्स कॉर्प्स के कमांडर शामिल है, जिसमें उनके अधीन ढाई लाख सैन्य जवान थे। उन्हें संयुक्त राष्ट्र के कई शांति अभियानों में भी तैनात किया गया है। मिर्जा, मुनीर की तुलना में काफी कम विवादास्पद हैं और उन्हें सेना के अंदर भी ज्यादातर अधिकारियों का समर्थन प्राप्त है।

लेफ्टिनेंट जनरल अजहर अब्बास
वहीं, तीसरी पंक्ति में लेफ्टिनेंट जनरल अजहर अब्बास हैं, जिन्होंने इन्फेंट्री सेना स्कूल का नेतृत्व किया है, साथ ही कश्मीर के विवादित क्षेत्र में भारत के को लेकर काम करने वाले डिवीजन और कोर का नेतृत्व किया है। उन्होंने मिर्जा के समान ही वेंचर स्टाफ और अलग अलग कमांड पोस्ट्स पर काम किया है। इसके साथ ही उन्होंने भारत के साथ हालिया संघर्ष विराम के दौरान काफी अहम भूमिका निभाई है। इसके साथ ही लेफ्टिनेंट जनरल अजहर अब्बास ने साल 2019 में भारत के साथ चौतरफा युद्ध छिड़ने की आशंका के वक्त भी अहम जिम्मेदारियां निभाई थीं। वह भी बाजवा के समान रेजिमेंट से हैं और प्रिंसिपल स्टाफ ऑफिसर रह चुके हैं। इसके साथ ही पूर्व सैन्य प्रमुख जनरल राहील शरीफ का दाहिना हाथ बनकर काम कर चुके हैं, जो फिलहाल अब 41 देशों के इस्लामी सैन्य आतंकवाद विरोधी गठबंधन की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। हालांकि, जनरल अजहर अब्बास की दावेदारी उनकी शिया पहचान कमजोर करता है और पाकिस्तानी सेना, जो शिया और सुन्नी के नाम पर बुरी तरह से बंटी है, उसमें जनरल अजहर अब्बास की स्वीकार्यता की संभावना काफी कम है।

कुछ अन्य प्रमुख दावेदार
वरिष्ठता के आधार पर चौथे, पांचवें और छठे उम्मीदवारों में लेफ्टिनेंट जनरल नौमान महमूद, लेफ्टिनेंट जनरल फैज हमीद और लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद आमिर शामिल हैं। हालांकि, इन उम्मीदवारों की वरिष्ठता सूचि में इतनी कमी इनकी संभावनाओं को कम कर देता है, लेकिन शीर्ष तीन में नहीं होने के बावजूद कई पाकिस्तानी जनरल सेना प्रमुख बन चुके हैं, लिहाजा इन लोगों ने उम्मीदें नहीं छोड़ी हैं। खासकर जनरल फैज हमीद, जो पूर्व आईएसआई प्रमुख हैं, वो इमरान खान के बेहद करीबी हैं, उन्हें नया आर्मी चीफ बनाने के लिए इमरान खान एड़ी-चोटी का जोर लगा चुके हैं। जनरल फैज हमीद को पाकिस्तान में सेलिब्रिटी जनरल कहा जाता है और उनकी सबसे बड़ी योग्यता अफगानिस्तान में उनकी पकड़ है। जनरल फैज हमीद का तालिबान के अंदर काफी पकड़ है और उसी वजह से उन्हें पिछले साल आईएसआई प्रमुख पद से हटाया भी गया था, लेकिन अब वो एक डार्क हाउस बनकर ऊभर सकते हैं, लेकिन इमरान खान से नजदीकी उनके रास्ते का सबसे बड़ा पत्थर है।
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