जनरल आसिम मुनीर बने पाकिस्तान के 17वें आर्मी चीफ, बाजवा के जाते ही इमरान की पार्टी हुई हमलावर
रॉ अधिकारी रामनाथन ने कहा कि, 'पाकिस्तान में पहले भी कुछ ऐसे सैन्य अधिकारी हो चुके हैं, जो हाफिज-ए-कुरान रह चुके हैं, लेकिन पहली बार कोई ऐसा अधिकारी सैन्य प्रमुख बना है।'
General Asim Munir: जनरल आसिम मुनीर आज पाकिस्तान के 17वें आर्मी चीफ बन गये हैं और रावलपिंडी में जनरल हेडक्वार्टर (जीएचक्यू) में आयोजित एक समारोह के दौरान जनरल बाजवा ने नये आर्मी चीफ आसिम मुनीर को अपना पदभार सौंप दिया। यानि, जनरल आसिम मुनीर आज से पाकिस्तान के 17वें आर्मी चीफ बन गये हैं और अगले तीन सालों तक उनके पास देश की सेना का कार्यकाल रहेगा। जनरल मुनीर को प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पिछले हफ्ते जनरल बाजवा की जगह अगले आर्मी चीफ के तौर पर चुना था और उसी दिन पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने उनकी नियुक्ति पर मुहर लगा दी थी।

जनरल बाजवा की हुई विदाई
जनरल आसिम मुनीर को आर्मी का कमान सौंपने से पहले समारोह को संबोधित करते हुए निवर्तमान सीओएएस जनरल कमर जावेद बाजवा ने कहा कि, वह पाकिस्तानी सेना का नेतृत्व करने का अवसर दिए जाने के लिए आभारी हैं। जनरल बाजवा ने जनरल मुनीर को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किए जाने पर बधाई दी और उम्मीद जताई, कि उनकी पदोन्नति देश और सेना की प्रगति का कारण बनेगी। उन्होंने कहा कि जनरल मुनीर के साथ उनका जुड़ाव 24 साल पुराना है। जनरल बाजवा ने कहा कि, "हाफिज-ए-कुरान होने के अलावा वह एक प्रोफेशनल, सक्षम और सैद्धांतिक अधिकारी हैं। मुझे विश्वास है कि उनके नेतृत्व में सेना सफलता की नई ऊंचाइयों को छुएगी।" वहीं, अपनी सैन्य यात्रा के बारे में बताते हुए जनरल बाजवा ने कहा कि, कई दशक पहले शुरू हुई यात्रा अब समाप्त हो रही है।

आसिम मुनीर के हाथ कमान
लेफ्टिनेंट जनरल मुनीर, जिन्होंने 1986 में ऑफिसर्स ट्रेनिंग स्कूल मंगला से ग्रेजुएशन किया था, वो पाकिस्तान के फ्रंटियर फोर्स रेजिमेंट से संबंधित हैं, जो पाकिस्तान सेना की छह पैदल सेना रेजिमेंटों में से एक है। वर्तमान में वह जीएचक्यू रावलपिंडी में क्वार्टर मास्टर जनरल थे और वरीयता क्रम में जनरल बाजवा के ठीक नीचे थे। आसिम मुनीर को जनरल बाजवा का करीबी बताया जाता है, जिनके साथ उन्होंने दिसंबर 2016 से अक्टूबर 2018 तक डायरेक्टर-जनरल मिलिट्री इंटेलिजेंस और बाद में अक्टूबर 2018 से जून 2019 तक डायरेक्टर-जनरल इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) के रूप में काम किया। जनरल आसिम मुनीर जब पाकिस्तानी सेना में कर्नल थे, उस वक्त मुनीर को हाफिज-ए-कुरान की उपाधि दी गई थी, यानी उन्होंने पूरा कुरान कंठस्थ कर लिया था और बिना कुरान देखे पवित्र किताब का पूरा पाठ कर सकते हैं।

भारत के लिए कितना खतरा?
भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ के अधिकारी रामनाथन कुमार, जिन्होंने साल 2015 से 2020 के बीच पाकिस्तान डेस्क पर काम किया, उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए कहा कि, "जिया उल हक ने पाकिस्तानी सेना में जो मजहबी लहर चलाई थी, जनरल मुनीर उस परिवर्तन की पराकाष्ठा हैं।" वहीं, इस सवाल पर, कि क्या आसिम मुनीर कट्टरपंथी भी हैं? रॉ के एक और वरिष्ठ अधिकारी राणा बनर्जी, जिन्होंने पहले रॉ में पाकिस्तान डेस्क का नेतृत्व भी किया है, उन्होंने कहा कि, आसिम मुनीर की धार्मिक मानसिकता के बावजूद उसके कट्टरपंथी होने की संभावना कम है। रॉ अधिकारी रामनाथन ने कहा कि, 'पाकिस्तान में पहले भी कुछ ऐसे सैन्य अधिकारी हो चुके हैं, जो हाफिज-ए-कुरान रह चुके हैं, लेकिन पहली बार कोई ऐसा अधिकारी सैन्य प्रमुख बना है।' उन्होंने कहा कि, ' हो सकता है, कि जनरल मुनीर सीधे तौर पर कट्टरपंथियों को उत्साहित ना करें, लेकिन इस बात की प्रबल संभावना है, कि उनके कार्यकाल में इस्लामिक कट्टरता एक नये बेंचमार्क स्थापित कर सकता है, लिहाजा भारत को अलर्ट रहने की जरूरत है।'
इमरान की पार्टी हुई हमलावर
वहीं, जनरल बाजवा के आर्मी चीफ पद से रिटायर होते ही इमरान खान की पार्टी ने उन्हें सीधे निशाने पर लिया और पाकिस्तान की राजनीति में उठे बवंडर के लिए उन्हें सीधा जिम्मेदार ठहराया। इमरान खान के करीबी और पीटीआई नेता असद उमर ने एक ट्वीट करते हुए कहा कि, 'जनरल बाजवा अपने पीछे पाकिस्तान की राजनीति में उथल-पुथल को छोड़कर गये हैं।' उन्होंने अपने ट्वीट में आगे कहा कि, 'उनके कार्यकाल में देश की आर्थिक स्थिति बिखर गई और इन सबसे भी ज्यादा खराब बात ये है, कि जनरल बाजवा के फैसलों की वजह से उनके कार्यकाल के दौरान आर्मी और जनता के बीच विश्वास वाला रिश्ता टूट गया।'












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