पिछले चुनाव में था पुरुष, अब सेक्स चेंज कराने के बाद महिला बन डालेगी वोट

अहमदाबाद। 2012 के विधानसभा चुनावों में मानवी वैष्णव ने एक पुरुष के रुप में मतदान किया था। तब उनके वोटर आईडी पर नाम था योगेश वैष्णव और लिंग वाले कॉलम नें लिखा था पुरुष। लेकिन अब वहीं योगेश वैष्णव 2017 के चुनावों में मानवी वैष्णव के नाम से मतदान करेगी और लिंग वाले कॉलम में लिखा होगा महिला। हम बात कर रहे हैं वडोदरा की रहने वाली 31 वर्षीय मानवी वैष्णव की, जो 14 दिसंबर अपने नए चुनावी फोटो पहचान पत्र (EPIC) के साथ विधानसभा चुनाव में वोट डालने जाएंगी। योगेश वैष्णव के तौर पर पैदा होने वाली मानवी सर्जरी कराकर पुरुष से महिला बन गईं हैं।

दूसरा किस्सा भरुच की रहने वाली आकृति पटेल (27) का

दूसरा किस्सा भरुच की रहने वाली आकृति पटेल (27) का

टाइम्स में छपी खबर में दूसरा किस्सा भरुच की रहने वाली आकृति पटेल (27) का है। आकृति पहले योगेश पटेल के रुप जाने जाते हैं। आकृति भी अब महिला के तौर पर मतदाता पहचान पत्र बनवाकर वोट डालेंगी। अपने लैंगिक पहचान को लेकर हमेशा भ्रम में रहने वाली आकृति ने बताया, 'मुझे हमेशा लगता था कि मैं एक पुरुष के शरीर में फंसी हुई औरत हूं। आकृति ने 2015 में एक निजी अस्पताल में अपना जेंडर चेंज करवाया था।

मार्च 2017 में लिंग परिवर्तन सर्जरी करवाई

मार्च 2017 में लिंग परिवर्तन सर्जरी करवाई

अगर मानवी की बात करें तो उसने बचपन में ही अपना घर छोड़ दिया था। मानवी बाद में किन्नर समुदाय के साथ रहने लगी थी और मार्च 2017 में लिंग परिवर्तन सर्जरी करवा लिया था। मानवी ने बताया, 'ऑपरेशन के बाद मुझे सिविल सर्जन से एक सर्टिफिकेट मिला और इसकी आधिकारिक सूचना भी जारी करा दी गई थी। इसके बाद मैं डॉक्युमेंट्स के साथ चुनाव अधिकारी के पास गई और वोटर पहचान पत्र में बदलाव करा लिया।' मानवी एक एनजीओ के साथ काम करती हैं।

अब मैं अपना बर्थडे 30 मार्च को ही मनाती हूं

अब मैं अपना बर्थडे 30 मार्च को ही मनाती हूं

30 मार्च को सेक्स चेंज की सर्जरी करवाकर लड़के से लड़की बनी ‘मानवी' ने अब अपना बर्थडे भी बदल लिया है। इस बारे में मानवी का कहना है..‘वैसे, मेरा जन्म तो 27 अप्रैल को हुआ था, लेकिन अब मैं अपना बर्थडे 30 मार्च को ही मनाती हूं। क्योंकि, इस दिन मेरी सर्जरी हुई और मुझे नया जीवन मिला। ‘भरूच के खोबला गांव में मेरा जन्म एक लड़के के रूप में हुआ। मेरा नाम योगेश रखा गया था। परिवार में बहुत खुशी थी और घरवालों को मुझसे बहुत सारी अपेक्षाएं थीं। शुरुआत के 4-5 साल तो सबकुछ नॉर्मल रहा, लेकिन इसके बाद मुझमें शारीरिक बदलाव आने लगे। मुझे शर्ट-पैंट नहीं, बल्कि फ्रॉक पहनना पसंद था। मैं अक्सर लड़कियों के कपड़े ही पहनती थी। इससे मेरे परिजन मुझ पर बहुत गुस्सा होते थे।

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