भीलवाड़ा : बेटी को ताले में बंद कर पुलिस कांस्टेबल मां व कम्पाउंडर पिता बने कोरोना वॉरियर

भीलवाड़ा। कोरोना वायरस का राजस्थान में सबसे पहले हॉटस्पॉट भीलवाड़ा जंग जीतने की ओर है। कोरोना पॉजिटिव मरीजों के बढ़ते आंकड़े पर लगाम लगा दी गई है। यह सब यहां के प्रशासन, चिकित्सकों, पुलिस, नर्सिंग स्टाफ व आमजन के सहयोग की बदौलत हुआ है। यहां पर हर कोई कोरोना वॉरियर की भूमिका है। यही वजह है कि कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या 28 पर रुक सी गई है। भीलवाड़ा के कोरोना वॉरियर्स में एक महिला पुलिस कांस्टेबल, कम्पाउंडर और सात साल की बच्ची का भी नाम शामिल किया जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी।

बेटी दिक्षिता घर पर रहती अकेली

बेटी दिक्षिता घर पर रहती अकेली

दरअसल, भीलवाड़ा शहर के मीरा नगर में रहने वाला यह दंपति सरकार सेवा में है। पत्नी सरोज भीलवाड़ा पुलिस में कांस्टेबल और पति दिलखुश भीलवाड़ा जिला मुख्यालय स्थित महात्मा गांधी जिला अस्पताल में कम्पाउंडर हैं। कोरोना संकट के बीच पति-पत्नी कई घंटे तक लगातार ड्यूटी दे रहे हैं। ऐसे में घर पर सात साल की मासूम बेटी को अकेले रहना पड़ रहा है। जब पति और पत्नी दोनों ड्यूटी पर होते हैं तो यह मासूम बेटी दिक्षिता राज सिंह कई घंटे घर में अकेली ताले में बंद रहती है।

 13 अप्रैल तक महा-कर्फ्यू लगा हुआ है

13 अप्रैल तक महा-कर्फ्यू लगा हुआ है

बता दें कि भीलवाड़ा में कोरोना संक्रमण के चलते पहले 20 मार्च से 3 अप्रैल तक कर्फ्यू लगा था। अब यहां 3 अप्रैल से 13 अप्रैल तक महा-कर्फ्यू लगा हुआ है। पति-पत्नी दोनों के विभाग ऐसे हैं, जो संकट की इस घड़ी सबसे ज्यादा सक्रिय और वे दिन रात आमजन की सेवा में लगे हैं। दिलखुश और सरोज की बेटी पिछले करीब 10 दिनों से दिनभर घर में अकेली ताले में बंद रहती है। हालात ऐसे हैं कि इसकी सार संभाल करने के लिए परिवार से भी कोई व्यक्ति भी यहां नहीं आ सकता। लिहाजा पति-पत्नी और बेटी कोरोना संकट के इस काल में अलग-अलग मोर्चों पर जूझ रहे हैं। दिलखुश अस्पताल में लगातार 10 दिन की ड्यूटी पर हैं। वो घर आएंगे तो भी बेटी से नहीं मिल पाएंगे, क्योंकि लगातार आइसोलेशन वार्ड में ड्यूटी देने के बाद उन्हें अगले 10 दिन घर में आइसोलेशन में रहना होगा।

 मां बोली- भगवान सबकी रक्षा करेगा

मां बोली- भगवान सबकी रक्षा करेगा

वहीं, दिक्षिता की मां सरोज भीलवाड़ा शहर में लगे महा कर्फ्यू के दौरान अपनी टीम के साथ गली मोहल्लों में बाइक पर सायरन बजाते हुए लोगों को घरों में सुरक्षित रहने की हिदायत देते हुए ड्यूटी को अंजाम देती है। वह एक बार ड्यूटी पर निकलने के बाद 8-9 घंटे बाद ही घर लौटती हैं। ऐसे हालात में दिक्षिता दिनभर अकेली ताले में बंद रहती है। मीडिया से बातचीत में पुलिस कांस्टेबल सरोज कहती हैं कि मेरे और मेरे पति के लिए ड्यूटी पहले है। देश के लिए हम दोनों मिलकर काम कर रहे हैं। हमें कोरोना संक्रमण की चेन को तोड़ना है। बेटी को अकेले छोड़ने पर सरोज कहती है कि भगवान सबकी रक्षा करेगा। घबराने की इसमें कोई बात नहीं है।

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