Rajasthan: पूर्व CM गहलोत व वसुंधरा के बेटे वैभव-दुष्यंत में दिन-रात का अंतर, साल 2024 में कौन जीतेगा चुनाव?
Vaibhav Gehlot vs Dushyant Singh: राजस्थान में अशोक गहलोत ने 15 साल और वसुंधरा राजे ने 10 साल राज किया। वर्तमान में ये दोनों सिर्फ विधायक हैं, मगर 26 अप्रैल को लोकसभा चुनाव 2024 के इनकी भी प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है।
पूर्व अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत जालौर-सिरोही सीट से कांग्रेस उम्मीदवार हैं जबकि पूर्व सीएम वसुंधरा राजे सिंधिया के बेटे दुष्यंत सिंह झालावाड़-बारां सीट से भाजपा उम्मीदवार हैं। दुष्यंत सिंह तो मौजूदा सांसद भी हैं।

अशोक गहलोत और वसुंधरा राजे में सिर्फ ये ही समानता नहीं कि दोनों राजस्थान के मुख्यमंत्री रह चुके हैं बल्कि ये दोनों ही पांच-पांच बार अपने अपने क्षेत्र से सांसद भी रहे हैं। इस मामले में दोनों के बेटों में दिन-रात का अंतर है।
वसुंधरा राजे-अशोक गहलोत कब बने सांसद?
राजस्थान सीएम बनने से पहले अशोक गहलोत साल 1980, 1984, 1991, 1996, 1998 में जोधपुर संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस के सांसद रहे जबकि वसुंधरा राजे सिंधिया साल 1989, 1991, 1996, 1998 व 1999 में झालावाड़-बूंदी सीट से सांसद चुनी गईं।
बेटों को सौंपी अपनी सीट
अशोक गहलोत व वसुंधरा राजे सिंधिया ने अपनी सांसदी वाली सीट अपने-अपने बेटे वैभव गहलोत व दुष्यंत सिंह को सौंपी। दुष्यंत सिंह ने मां की राजनीति विरासत को बूखबी संभाल लिया जबकि वैभव गहलोत इस मामले में सफल नहीं हुए।

वैभव गहलोत पहले जोधपुर अब जालोर
अशोक गहलोत अपने प्रभाव वाली सीट जोधपुर से साल 2019 के लोकसभा चुनाव में बेटे वैभव गहलोत को भाजपा के गजेंद्र सिंह शेखावत के सामने उतारा, मगर वैभव जीत नहीं पाए।
अब लोकसभा चुनाव 2024 में गहलोत ने बेटे वैभव को फिर टिकट दिलवा। इस बार जोधपुर की बजाय जालोर-सिरोही सीट पर भाजपा के लुंबाराम चौधरी के सामने चुनाव लड़ रहे हैं।

झालावाड़ सीट पर पहले मां अब बेटा
झालावाड़ सीट पर साल 1989 से लगातार भाजपा जीत दर्ज करती आ रही है। पहले मां वसुंधरा राजे सिंधिया और अब बेटा दुष्यंत सिंह।
दुष्यंत सिंह ने झालावाड़ सीट पर मां की राजनीति विरासत को बखूबी संभाल लिया। साल 2004 के बाद दुष्यंत सिंह झालावाड़ के सांसद बनते आ रहे हैं।
लोकसभा चुनाव 2024 में दुष्यंत सिंह का मुकाबला कांग्रेस की उर्मिला जैन भाया से है। 15 साल बाद फिर दोनों आमने-सामने हैं।












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