इन सवालों पर विधायक धोखेबाज या बिहार सरकार?
पटना। बिहार में चल रहे विधान मंडल का बजट सत्र, जिसमें करोड़ों रूपए खर्च होते हैं, लेकिन जब बात जनता के दर्द की आती है तो कहीं न कहीं धोखा नजर आता है। अब स्कूलों और डॉक्टरों की मनमानी को ही ले लीजिये। इनकी बात आते ही ऐसा लगता है कि सरकार की आंखों पर पट्टी बंधी हुई है। सदन में विधायक अपने मन में आये सवाल तो पूछते हैं, लेकिन जनता से जुड़ी समस्याओं को सदन में नहीं उठाते।
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जनता के कई ऐसे महत्वपूर्ण सवाल हैं जो बजट सत्र में नहीं उठये गये हैं। बात सिर्फ एक सत्र की नहीं बल्कि उन तमाम सत्रों की है, जिसमें अपेक्षा रहती है कि जनता के सवाल उठें, लेकिन सवाल-सवाल बनकर ही रह जाते हैं, कभी उत्तर नहीं बन पाते।
बिहार की जनता के सवाल
प्राइवेट स्कूलों के विरुद्ध क्यों नहीं उठते सवाल?
प्राइवेट स्कूलों की मनमानी का सवाल इतने दमदार तरिके से सदन में क्यों नहीं उठता कि उसका समाधान खोजने पर सरकार बाध्य हो जाये।
प्रदेश के प्राइवेट स्कूलों के मैनेजमेंट परिजनों का कई तरह से शोषण करते हैं, जैसे गर्मी की छुट्टी में भी फीस लिया जाना, किताबें बदलना, ड्रेस बदलना और हर साल री-एडमिशन के नाम पर वसूली। और तो और एडमीशन के वक्त डोनेशन के नाम पर 50 हजार से लेकर 1 लाख रुपए तक की कैपिटेशन फीस, जिसकी कोई रसीद नहीं होती। अगर बिहार सरकार प्राइवेट स्कूलों को एनओसी देती है, तो वह इन स्कूलों पर नियंत्रण क्यों नहीं रखती है।
बिहार सरकार
सूबे में प्राइवेट प्रेक्टिस पर बैन क्यों नहीं लगाया जाता?
आईजीआईएमएस के कई डॉक्टर एनपीए भी ले रहे हैं और प्राइवेट प्रैक्टिस भी कर रहे हैं। प्राइवेट प्रैक्टिस ने पूरे हेल्थ सिस्टम को चरमरा कर रख दिया है, पर सदन में दमदार तरिके से न तो कोई सवाल उठता है ना सरकार समाधान को जमीन पर उतारती है।
सीनेट और सिंडिकेट की तरह होता जा रहा विधान मंडल का व्यवहार
- आपको बताते चले कि बिहार विधान मंडल मे आश्वासनो की संख्या मे लगातार बढोतरी होती जा रही है।
- 12 सालों से विधान परिषद में 71.9% और विधान सभा में 75.7% आश्वासन क्रियान्वयन के लिए लंबित हैं। नियमानुसार उच्च सदन विधान परिसद में आश्वासन का अनुपालन सरकार के संबंधित विभागों की ओर से अधिक से अधिक तीन महिनों मे किया जाना चाहिये।
- 12 सालों में विधान परिषद् में 6092 आश्वासन दिए गय हैं। जिनमें से 4385 आश्वासन कार्यान्वयन के लिए लंबित हैं।
- विधान सभा में 12 सालों में 11548 आश्वासन दिए गये जिनमें कुल कार्यान्वित आश्वासनों की संख्या 2802 रही।












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