Lok Sabha Election 2024: पूर्णिया में तेजस्वी यादव ने डाल दिए हथियार! किसे मिलेगा फायदा?

Bihar Lok Sabha Election 2024: बिहार में सीमांचल की राजधानी समझी जाने वाली पूर्णिया लोकसभा सीट पर इंडिया ब्लॉक चुनाव से पहले ही हथियार डालता नजर आ रहा है। राजद नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव की यह अपील काफी वायरल हो रही है कि इंडिया ब्लॉक को नहीं चुनना है तो एनडीए को चुन लें।

दरअसल, पूर्णिया सीट पर पूर्व सांसद पप्पू यादव की निर्दलीय उम्मीदवारी ने राष्ट्रीय जनता दल का पूरा गणित बिगाड़ दिया है। पप्पू ने यह सीट तालमेल में कांग्रेस को मिलने की उम्मीद में अपनी पार्टी का उसमें विलय भी किया, लेकिन राजद ने इस बार यह सीट अपने पास रख ली।

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पप्पू यादव ने बिगाड़ा सभी का समीकरण
आरजेडी ने यहां जेडीयू छोड़कर आईं रुपौली विधायक बीमा भारती को उतारा है। इसके बाद पप्पू यादव ने इंडिया ब्लॉक की चिंता किए बगैर निर्दलीय ही ताल ठोक दिया। जेडीयू ने यहां से अपने दो बार के सांसद संतोष कुशवाहा को ही फिर से मौका दिया है। लेकिन, पप्पू की मौजूदगी से आरजेडी और जेडीयू दोनों का समीकरण बिगड़ गया है।

इंडिया को चुनो या एनडीए को साफ बात- तेजस्वी यादव
पप्पू की उम्मीदवार से लालू यादव की पार्टी किस कदर अपसेट है, यह तेजस्वी यादव के बयान में नजर आ रहा है। वह कह रहे हैं, '..या तो एनडीए या तो इंडिया की लड़ाई है...या तो आप इंडिया को चुनो और यदि इंडिया को नहीं चुनते हो बीमा भारती को, तो आप एनडीए को चुनो, साफ बात, साफ बात।'

पूर्णिया में तेजस्वी यादव ने डाल दिए हथियार!
पूर्णिया सीट पर सबसे ज्यादा यानी करीब 6.5 लाख मुसलमान वोटर हैं। उसके बाद यादवों की संख्या 1.5 लाख है। आरजेडी जिस एमवाई समीकरण को अपना कोर वोट मानती है, उसके 8 लाख वोटर हो जाते हैं।

राजद ने इस समीकरण को और मजबूत करने के लिए गैर-यादव ओबीसी बीमा भारती को टिकट दिया है, फिर भी तेजस्वी की बातों में हथियार डालने जैसा संकेत है तो उसकी वजह पप्पू यादव की मौजूदगी है। उनकी वजह से उन्हें अपना कोर वोट बैंक हाथों से खिसकता नजर आ रहा है।

पप्पू फैक्टर ने एनडीए को भी किया असहज
दूसरी तरफ पूर्णिया में 3.5 लाख कुशवाहा या कोइरी मतदाता हैं। इनके अलावा 2.5 लाख वैश्य, 1.5 लाख गंगोता (अति पिछड़े) और करीब 1.5 लाख सवर्ण मतदाता हैं। इनके और मोदी फैक्टर के दम पर जेडीयू को तीसरी बार भी अपने उम्मीदवार की बाजी मजबूत नजर आ रही है। लेकिन, तथ्य यह है कि पप्पू फैक्टर ने सत्ताधारी गठबंधन को भी असहज कर दिया है।

पप्पू ने बनाई हर वर्ग में पैठ
पहली बात तो ये है कि जेडीयू उम्मीदवार और सांसद कुशवाहा को लेकर क्षेत्र में काफी एंटी-इंकंबेंसी महसूस की जा सकती है। दूसरी तरफ पप्पू यादव की आसान उपलब्धता ने उन्हें स्थानीय तौर पर सभी वर्गों में पहुंच बनाने का मौका दिया है।

जैसे पूर्णिया में स्पेयर पार्ट की दुकान चलाने वाले 34 साल के अभिनीत सिंह ने ईटी से कहा कि 2019 में उन्होंने कुशवाहा को वोट दिया था। लेकिन अब उनका कहना है,'चुनाव जीतने के बाद हमने कुशवाहाजी को नहीं देखा है। पप्पू यादव की अच्छी बात ये है कि उनसे जो भी मिलता है, वह हर किसी की मदद करते हैं। उन्हें एक मौका मिलना चाहिए।'

इसी तरह कारपेंटर का काम करने वाले 32 वर्षीय सुबोध शर्मा का कहना है, '2019 में पप्पू यादव ने पूर्णिया से चुनाव नहीं लड़ा था और हमने संतोष कुशवाहा को वोट दिया। क्योंकि, इस बार वे यहां से लड़ रहे हैं, तो मैं उन्हें ही वोट दूंगा।'

2019 में पूर्णिया का चुनाव परिणाम
2019 में पूर्णिया में एनडीए उम्मीदवार के तौर पर जेडीयू के संतोष कुशवाहा को 6,32,924 वोट मिले थे। जबकि, तब महागठबंधन (अभी इंडिया ब्लॉक) से उतरे कांग्रेस प्रत्याशी उदय सिंह उर्फ पप्पू सिंह को महज 3,69,463 ही वोट मिल पाए थे।

पूर्णिया में पप्पू फैक्टर से तय होगी हार या जीत!
इस बार मुकाबला त्रिकोणीय है। एक तरफ एनडीए का मजबूत जातिगत समीकरण है और दूसरी ओर अपने ही वोट बैंक को लेकर आशंकाओं से घिरी हुई आरजेडी। ऐसे में पप्पू के पक्ष में चमत्कार होता है या फिर एनडीए की राह और आसान होती है यह बड़ा सवाल बन गया है। पूर्णिया में दूसरे चरण में 26 अप्रैल को वोटिंग होगी और 4 जून को मतगणना की जाएगी।

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