Lok Sabha Chunav 2024: राजद ने अबकी बार कई नए चेहरों पर क्यों लगाया दांव?
Lok Sabha Chunav 2024 Bihar: बिहार में राष्ट्रीय जनता दल इस बार 23 सीटों पर चुनाव लड़ रहा है। लालू यादव की पार्टी ने अपने कोटे की 26 में से तीन सीटें मुकेश सहनी की वीआईपी को दी है। लेकिन, राजद ने इस बार तकरीबन आधी सीटों पर नए चेहरों पर दांव लगाया है। सवाल है कि इसके पीछे क्या रणनीति है?
लालू की पार्टी ने जिस तरह इस बार के चुनाव के लिए उम्मीदवारों के नामों पर मुहर लगाई है, उससे कई बातों के संकेत मिल रहे हैं। इसमें जातीय समीकरणों को साधने की कोशिश है तो इसे राजद की छवि बदलने का प्रयास भी माना जा सकता है।

आरजेडी की सूची में यादव प्रत्याशियों का दबदबा
आरजेडी की लिस्ट से एक बात पक्की है कि लालू और उनके बेटे तेजस्वी यह मानकर चल रहे हैं कि यादव और मुस्लिम वोट बैंक आज भी उनके साथ पूरी तरह से जुड़ा हुआ है।
हालांकि, आरजेडी उम्मीदवारों में जिस तरह से यादव प्रत्याशियों का दबदबा है, उसमें मुसलमान काफी पिछड़ते नजर आए हैं। लालू का यही आत्मविश्वास है कि भाजपा की ओर से परिवारवाद पर तगड़े प्रहार के बावजूद उन्होंने दो-दो बेटियों को टिकट देने में भी जरा सी झिझक नहीं दिखाई है।
राजद की लिस्ट में नए चेहरों पर दांव
आरजेडी की लिस्ट में जिन नए चेहरों पर दांव चला गया है, उनमें सारण से रोहिणी आचार्य के अलावा नवादा से श्रवण कुशवाहा, मधेपुरा से डॉ. कुमार चंद्रदीप, गया (सुरक्षित) से सर्वजीत पासवान, सुपौल से चंद्रहास चौपाल, औरंगाबाद से अभय कुशवाहा के नाम शामिल हैं।
वहीं मुंगेर से अनिता देवी महतो, पूर्णिया से बीमा भारती, बक्सर से सुधाकर सिंह, जमुई से अर्चना रविदास और शिवहर से रितु जायसवाल के नाम शामिल हैं। हालांकि, सीवान सीट से उम्मीदवार के नाम का ऐलान आरजेडी की ओर से अभी भी अटका हुआ है।
आरजेडी की छवि बदलने की कोशिश में लालू?
आरजेडी ने इस बार 7 विधायकों को भी लोकसभा के चुनाव मैदान में उतारा है तो उसके प्रत्याशियों में 6 महिलाएं भी शामिल हैं, जितने कि किसी दल ने राज्य में नहीं घोषित किए हैं। कुल मिलाकर इस बार राजद की लिस्ट देखने के बाद एक यह चर्चा चल रही है कि नए प्रत्याशियों पर दांव खेलने का मतलब कहीं, लालू की अपनी पार्टी की छवि बदलने की कोशिश तो नहीं है।
क्योंकि, उन्होंने महिलाओं और तुलनात्मक रूप से कम उम्र के लोगों पर भरोसा दिखाने की कोशिश की है। लेकिन, राजद के कुल 22 उम्मीदवारों की लिस्ट को देखें तो इसके पीछे की वजह कुछ और ही नजर आ रही है।
आरजेडी के उम्मीदवारों की सूची इस तरह से है-
गया- कुमार सर्वजीत (सुरक्षित)
नवादा- श्रवण कुशवाहा
सारण- रोहिणी आचार्य
जमुई- अर्चना रविदास (सुरक्षित)
बांका- जय प्रकाश यादव
पूर्णिया- बीमा भारती
दरभंगा- ललित यादव
बक्सर- सुधाकर सिंह
सुपौल- चंद्रहास चौपाल
पाटलिपुत्र- मीसा भारती
वैशाली- मुन्ना शुक्ला
औरंगाबाद- अभय कुशवाहा
हाजीपुर- शिवचंद्र राम (सुरक्षित)
अररिया- शाहनवाज आलम
जहानाबाद- सुरेंद्र प्रसाद
मुंगेर- अनिता देवी महतो
उजियारपुर- आलोक कुमार मेहता
सीतामढ़ी- अर्जुन राय
मधुबनी- अली अशरफ फातमी
वाल्मीकि नगर- दीपक यादव
शिवहर- रितु जायसवाल
मधेपुरा- कुमार चंद्र दीप
जातिगत समीकरण मुख्य वजह
इनके अलावा लालू ने तीन सीटें- काराकाट, गोपालगंज और झंझारपुर विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) को दी हैं। इस पार्टी के मुखिया मुकेश सहनी मल्लाह और निषाद की अन्य उपजातियों के वोट बैंक अपने साथ होने की उम्मीदों पर राजनीतिक करते हैं। इनकी सभी उपजातियों को मिलाकर जनसंख्या 8-9% हो जाती है।
इसी तरह से राजद ने यादवों के बाद कुशवाहा जाति के उम्मीदवारों पर ज्यादा यकीन किया है। इसके अलावा लालू ने अति-पिछड़ी जातियों का भी कार्ड खेला है, जिसे जेडीयू सुप्रीमो नीतीश कुमार अपना वोट बैंक समझते रहे हैं। सवर्णों में राजपूत, भूमिहार को टिकट देकर पार्टी ने इन जातियों के एक खास वर्ग में भी अपनी पैठ बनाए रखने की कोशिश की है।
जहां तक छवि बदलने की बात है तो राजद की लिस्ट देखने के बाद इसकी कोई खास पहल नजर नहीं आती। मसलन, पार्टी ने 6 महिलाओं को टिकट तो जरूर दिया है, लेकिन उनमें से रितु जायसवाल का नाम ही छवि बदलने की कोशिश के लिए दमदार मानी जा सकती थी।
लेकिन,यह भी सच है कि वह आईएएस की पत्नी हैं या आईआरएस की? चुनाव की शुरुआत में उनके बयानों की वजह से ही यह विवादों का मुद्दा बन गया है।












Click it and Unblock the Notifications