भारत के खिलाफ जहर क्यों उगल रहे पाकिस्तानी नेता? पीएम मोदी का नाम जपने से होगा बड़ा फायदा
ऐसा माना जा रहा है कि इमरान खान की बढ़ती लोकप्रियता को टक्कर देने के लिए ये नेता भारत विरुद्ध राग अलाप रहे हैं ताकि जनता की नजर में हीरो बन सकें। विश्लेषकों का मानना है कि ये पूरा शो पहले से ही कट्टरपंथी घरेलू जनता से वो

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पाकिस्तान के कुछ नेताओं ने भारत और भारतीयों के खलाफ बयानबाजियां की जो कि पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बनीं। इसमें पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो का पीएम मोदी के खिलाफ अपशब्द कहना हो या फिर शाजिया मर्री का भारत को एटम बम की धमकी देना हो, दोनों देशों में ही अखबारों की सुर्खियां बनीं। पाकिस्तान के नेतृत्व द्वारा अचानक भारत के विरुद्ध यूं घृणा दर्शाने को विश्लेषक आम चुनावों से जोड़कर देख रहे हैं।

चुनाव जीतने के लिए भारत विरोधी बयान
ऐसा माना जा रहा है कि इमरान खान की बढ़ती लोकप्रियता को टक्कर देने के लिए ये नेता भारत विरुद्ध राग अलाप रहे हैं ताकि जनता की नजर में हीरो बन सकें। विश्लेषकों का मानना है कि ये पूरा शो पहले से ही कट्टरपंथी घरेलू जनता से वोट हासिल करने की तरकीब है। बीते कुछ सालों में पाकिस्तान कम ही अवसरों पर भारत के खिलाफ अपनी दुश्मनी को जाहिर करता था। अब ऐसा माना जा राह है कि पाकिस्तान फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की ग्रे सूची से बाहर निकलने और अमेरिका से अपने F-16 लड़ाकू विमानों के लिए स्पेयर पार्ट्स और रखरखाव के पैसे हासिल करने का इंतजार कर रहा था।

मकसद पूरा होने के बाद असल रंग में आया पाक
जैसे ही पाकिस्तान का यह मकसद पूरा हुआ, भारत के पड़ोसी देश ने फिर से अपना असल रंग दिखाना शुरू कर दिया। अब जब पाकिस्तान को वह सब हासिल हो गया जिसके लिए वह कई सालों से जतन कर रहा था, उसने एक बार फिर से भारत को बुरा भला कहना शुरू कर दिया है। विश्लेषकों ने यह भी गौर किया है कि पिछले कुछ सालों में एक पैटर्न देखा गया है। नवनियुक्त पाकिस्तानी सेना प्रमुख जैसे कि वर्तमान जनरल असीम मुनीर अपने कार्यकाल के तीन सालों में से शुरू के दो साल भारत के खिलाफ अपनी सैन्य ताकत दिखाने की कोशिश करते हैं और फिर आखिरी वक्त में भारत के साथ समझौता करने की कोशिश करते हैं।

मुनीर अकरम ने की शुरुआत
पाकिस्तान के मंत्रियों की भारत के खिलाफ निंदा को पाक के संयुक्त राष्ट्र प्रतिनिधि मुनीर अकरम जैसे राजनयिकों द्वारा भी उकसाया गया था, जो भारत विरोधी और महिलाओं को पीटने वाले शख्स के रूप में भी जाने जाते हैं। उनके राजनयिक भाई जमीर अकरम भी पाकिस्तान में भारत विरोधी उद्योग का हिस्सा हैं। उन्होंने 1990 के दशक की शुरुआत में भारत में पाकिस्तान उच्चायोग में काम किया। यह वही वक्त था जब बेनजीर भुट्टो ने कश्मीर में जिहाद को काफी आगे बढ़ाया था। वह बेनजीर के पिता जुल्फिकार ही थे जो किसी भी कीमत पर इस्लामिक बम चाहते थे, भले ही 1970 के दशक में पाकिस्तानियों को घास खानी पड़ती।

भारत ने पाकिस्तान को बनाया अप्रासंगिक
अब जब पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत ने पाकिस्तान को विश्वस्तर पर लगभग अप्रासंगिक कर दिया है, पाकिस्तानी नेताओं की हताशा बढ़ने लगी है। भारत सितंबर 2023 में G-20, SCO शिखर सम्मेलन और जनवरी 2024 में QUAD शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने की तैयारी कर रहा है। ऐसे में माना जा रहा है कि भारत के खिलाफ पाकिस्तान का यह गुस्सा केवल बढ़ेगा और अधिक व्यक्तिगत हो जाएगा। बिलावल, हिना और शाजिया जैसे नेता चाहते हैं कि भारतीय नेता उनकी तरह ही अपशब्दों का इस्तेमाल करें जिससे वे चीन जैसे भारत विरोधी देशों की प्रशंसा पा सकें, उनसे कुछ पैसा वसूल सकें। हालांकि भारतीय नेतृत्व ने उनके बयान पर कोई प्रतिक्रिया देना तक जरूरी नहीं समझा और उन्हें उनके हाल पर छोड़ देना उचित समझा है।
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