अनुशासनहीनता के चलते सेना ने ट्रेनी जवानों के तोड़े मोबाइल, चीन कर रहा है बदनाम
नई दिल्ली। इन दिनों चीन की मीडिया भारतीय सेना के खिलाफ एक वीडियो को वारयल कर रही है। इस वीडियो में दो जवान पत्थर से मोबाइल तोड़ते दिख रहे हैं। आपको बता दें कि हाल ही सेना की एक रेजीमेंट ने सार्वजनिक तौर पर कुछ ट्रेनी जवानों के मोबाइल तोड़ दिए थे। ऐसा उनके बीच यह संदेश पहुंचाने के लिए किया गया है कि आर्मी के ट्रेनिंग प्रोग्राम के दौरान किसी तरह की अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

50 सैनिकों के फोन उनके सामने पत्थर पर रख कर तोड़ दिए गए
भारतीय सेना को बदनाम करने के लिए यह वीडियो शुक्रवार को चीन के ग्लोबल टेलीविजन नेटवर्क की वेबसाइट पर भी अपलोड हुआ था। जिसमें दो जवान सैनिकों के मोबाइल फोन तोड़ते हुए दिख रहे हैं। वीडियो में बताया गया है कि मध्य प्रदेश के सागर में करीब 50 सैनिकों के फोन उनके सामने पत्थर पर रख कर तोड़ दिए गए, ताकि वे सोशल मीडिया का इस्तेमाल न कर सकें। यह बताया गया है कि मोबाइल तोड़ने का आदेश यूनिट के अफसरों ने दिया था। वीडियो के मुताबिक, भारत में कई सैनिक अपने साथ होने वाले बर्ताव और जीवनयापन की स्थिति से नाखुश हैं।

2015 में बनाया गया था वीडियो
टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक, रेजीमेंट ने ट्रेनी जवानों में अनुशासन बनाए रखने के लिए इस कदम को उठाया था। यह वीडियो जबलपुर के महार रेजिमेंटल सेंटर का है। इसे 2015 के सितंबर में फिल्माया गया था। आपको बता दें कि फिजिकल ट्रेनिंग, ड्रिल और हथियार ट्रेनिंग के दौरान मोबाइल फोन रखने की इजाजत नहीं है। पहली बार चेतावनी दी जाती है, दूसरी बार फोन जब्त कर लिया जाता है। बार-बार हरकत दोहराने पर मोबाइल फोन सबके सामने तोड़ा जा सकता है।

ट्रेनिंग के समय जमा करना होता है मोबाइल
एक वरिष्ठ अफसर ने कहा कि सेना अपने सैनिकों को जंग के लिए तैयार करती है। अगर उन्हें शांति के दौरान अनुशासन तोड़ने की इजाजत दी जाएगी तो वह एेसा जंग के समय भी कर सकते हैं। एक अन्य अफसर ने बताया कि महर रेजीमेंटल सेंटर में रंगरूटों को अपना फोन ‘पलटन हवलदार' के पास जमा कराना होता है। जब उन्हें जरूरत होती है, वह इसे ले लेते हैं। सेंटर ने कुछ एसटीडी फोन भी लगाए हुए हैं, ताकि रंगरूट परिवार से बात कर सकें।
यहां देखें 2015 का वीडियो-












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