Success Story: छोटे से गांव का सिद्धांत राठौड़ बना आर्मी अफसर, 9 बार फेल होकर भी नहीं मानी हार
Siddhant Rathod Success Story: भारतीय सेना में अफसरा बनने के लिए न केवल कड़ी मेहनत बल्कि बुलंद हौसलें भी जरूरी हैं। इस बात का ताजा उदाहरण राजस्थान का सिद्धांत राठौड़ है।
भारतीय सेना लेफ्टिनेंट अफसर बना सिद्धांत राठौड़ मूलरूप से राजस्थान के नागौर जिले के परबतसर तहसील के गांव रुणीजा का रहने वाला है। सिद्धांत राठौड़ के बारे में दावा किया जा रहा है कि ये अपने गांव से पहले आर्मी अफसर है।

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मीडिया से बातचीत में कॉलेज की पढ़ाई के दौरान ही इंडियन आर्मी ज्वाइन करने का मन बना लिया था। इसके लिए साल 2020 से 2022 तक तैयारी की। इस दो साल की अवधि में 10 प्रयासों में अफसल रहा।
सिद्धांत राठौड़ का कहता है कि लगातार अफसलताओं के बावजूद हिम्मत नहीं हारी। अपनी कमियों में सुधार करता गया और 11वें प्रयास में भारतीय सेना लेफ्टिनेंट बन गया। इस सफर में एक बात समझ आई कि कभी हार मत मानो।
सिद्धांत राठौड़ जैसे दर्जनों अफसरों को चेन्नई स्थित ऑफिसर ट्रेनिंग एकेडमी में 11 माह का प्रशिक्षण दिया गया है। 9 मार्च 2024 को पासिंग आउट परेड हुई। बेटे को अफसर बना देख पिता नरेंद्र सिंह राठौड़ की आंखों से खुशी के आंसू छलक आए।

नरेंद्र सिंह राठौड़ ने बताया कि बेटे सिद्धांत राठौड़ ने जोधपुर के एमबीएम कॉलेज से बीटेक की डिग्री ली है। इसी दौरान वह आर्मी अफसर बनने की तैयारी भी करने लगा था। बीटेक करने के बाद सिद्धांत के पास कई नौकरियों से जॉब ऑफर आए, मगर उसने इंडियन आर्मी के लिए सारे ठुकरा दिए।
सिद्धांत राठौड़ के साथ राजस्थान के आठ कैडेट्स भी पास आउट हुए हैं, इनमें कोटा का मोहम्मद शोएब खान भी शामिल है। शोएब खान की स्कूलिंग कोटा व एनसीआर दिल्ली स्थित निजी यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस में बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी की पढ़ाई हुई।
बता दें कि शोएब खान के पिता शाकिर हुसैन खान एडवोकेट हैं। वे कोटा में ही प्रैक्टिस करते हैं। बेटे के अफसर बनने के बाद उनके घर पर बधाई देने पहुंचने वालों का तांता लगा हुआ है। कोटा बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष दीपक मित्तल ने शोएब के चयन पर खुशी जताई।












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