'2 लाख युवाओं के साथ हो न्याय, सेना भर्ती स्कीम वापस लें', चुनाव से पहले कांग्रेस ने उठाया अग्निपथ का मुद्दा
कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव से पहले अग्निपथ स्कीम से पूर्व सेना भर्ती योजनाओं के तहत चयनित अभ्यर्थियों के नियुक्ति रोके जाने का मुद्दा उठाया है। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखा है। अपने पत्र में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने मुर्मू से उन युवाओं को न्याय दिलाने की मांग की है, जिनका अग्निपथ स्कीम के लागू होने सेना में चयन हुआ था, लेकिन सरकार ने पुरानी योजना के निरस्त कर दिया, जिसके चलते उनकी नियुक्ति नहीं हो पाई। वहीं कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने एक प्रेस कांफ्रेंस के जरिए केंद्र को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि सेना भर्ती प्रक्रिया में खिलवाड़ कर रही है पैसा बचाना भारत की सुरक्षा और अखंडता के लिए एक चुनौती बन सकता है।
कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव से पहले अग्निपथ स्कीम से पूर्व सेना भर्ती योजनाओं के तहत चयनित अभ्यर्थियों के नियुक्ति रोके जाने का मुद्दा उठाया है। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखा है। अपने पत्र में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने मुर्मू से उन युवाओं को न्याय दिलाने की मांग की है, जिनका अग्निपथ स्कीम के लागू होने सेना में चयन हुआ था, लेकिन सरकार ने पुरानी योजना के निरस्त कर दिया, जिसके चलते उनकी नियुक्ति नहीं हो पाई। वहीं कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने एक प्रेस कांफ्रेंस के जरिए केंद्र को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि सेना भर्ती प्रक्रिया में खिलवाड़ कर रही है पैसा बचाना भारत की सुरक्षा और अखंडता के लिए एक चुनौती बन सकता है।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोमवार (26 फरवरी) को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने आग्रह किया कि करीब दो लाख नौजवानों के साथ न्याय किया जाए जिनका 'चयन सेना की नियमित सेवा में होने की बावजूद उनकी भर्ती नहीं की गई। कांग्रेस चीफ ने पत्र में लिखा है कि जल, थल और वायुसेना में तत्कालीन भर्ती योजना के तहत इन युवाओं को चयन किया था, लेकिन केंद्र ने इनकी भर्ती रोक दी और अग्निपथ योजना लेकर आई। जिसके चलते सेना में चयनित होने के बावजूद युवाओं को नौकरी नहीं मिली, ऐसे में ये युवा भारी मानसिक पीड़ा झेल रहे हैं।
पत्र में खड़गे राष्ट्रपति को लिखे पत्र में करीब 2 लाख युवाओं और अग्निपथ स्कीम के तहत चयनित युवाओं को के भविष्य को लेकर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि नई सेना भर्ती प्रक्रिया शुरू होने से बड़ी संख्या में उन युवाओं को भविष्य प्रभावित हुआ जो सेना भर्ती के लिए तैयारी कर रहे थे। खड़गे ने पत्र में दावा किया कि वे 2019 और 2022 के बीच ऐसे कई युवाओं से मिले हैं जिनका चयन भारतीय सेना, भारतीय नौसेना या फिर भारतीय वायु में हुआ है, लेकिन नियुक्ति नहीं मिल पाई।
खड़गे ने कहा, "31 मई 2022 तक, उन्हें विश्वास था कि उन्होंने अपने सपने पूरे कर लिए हैं और केवल अपने ज्वाइनिंग लेटर का इंतजार कर रहे थे। उस दिन, भारत सरकार द्वारा इस भर्ती प्रक्रिया को समाप्त करने और इसके स्थान पर अग्निपथ योजना लागू करने के निर्णय से उनके सपने चकनाचूर हो गये।" ऐसे में खड़गे ने पत्र में राष्ट्रपति मुर्मू से कहा, "युवाओं को इस तरह से पीड़ित नहीं होने दिया जा सकता। मैं आपसे यह सुनिश्चित करने की अपील करता हूं कि उनके साथ न्याय किया जाए।"
अग्निपथ भेदभावपूर्ण स्कीम
खड़गे ने कहा कि यह योजना भेदभावपूर्ण है क्योंकि यह सैनिकों के समानांतर कैडर बनाती है जिनसे समान कार्य करने की उम्मीद की जाती है लेकिन बहुत अलग वेतन, लाभ और संभावनाएं होती हैं। उन्होंने लिखा, "अधिकांश अग्निवीरों को चार साल की सेवा के बाद अनिश्चित नौकरी बाजार में छोड़ दिया जाएगा, जिसके बारे में कुछ लोगों का तर्क है कि इससे सामाजिक स्थिरता प्रभावित हो सकती है।
'इस तरह पैसा बचाना देश की सुरक्षा के खतरा'
खड़गे की ओर से राष्ट्रपति के पत्र लिखे जाने के बाद कांग्रेस ने एक प्रेस कांफ्रेंस आयोजित की। जिसमें सचिन पायलट ने केंद्र की मोदी सरकार से कई सवाल किए। उन्होंने पूछा कि जब सरकार जी-20 शिखर सम्मेलन पर 4100 करोड़ रुपए, प्रधानमंत्री के विमान पर 4800 करोड़ रुपए, सेंट्रल विस्टा परियोजना पर 20,000 करोड़ और विज्ञापनों पर 6500 करोड़ खर्च कर सकती है, तो फिर सेना भर्ती प्रक्रिया में खिलवाड़ क्यों कर रही है। पायलट ने कहा कि केंद्र का इस तरह पैसा बचाना भारत की सुरक्षा और अखंडता के लिए एक चुनौती बन सकता है। उन्होंने कहा कि केंद्र पर आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र की इन्हीं नीतियों के चलते कमजोर कर दिया है।












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