गायत्री प्रजापति को भी मिला टिकट, मुलायम-अखिलेश के बीच बर्फ पिघली

अखिलेश यादव ने गायत्री प्रजापति को भी दिया पार्टी का टिकट, मुलायम से मुलाकात के बाद दिए गए उनकी लिस्ट के उम्मीदवारों की टिकट

लखनऊ। समाजवादी पार्टी में जिस तरह से अखिलेश यादव ने तमाम मुद्दों को लेकर पार्टी के भीतर विद्रोह के स्वर छेड़े थे उसमें मुख्तार अंसारी, अतीक अहमद, शिवपाल यादव और गायत्री प्रजापति जैसे नाम शामिल थे। एक तरफ जहां अखिलेश यादव ने चाचा शिवपाल यादव के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोला और उनके द्वारा जारी की गई उम्मीदवारों की लिस्ट को सिरे से खारिज कर दिया तो दूसरी तरफ उन्होंने गायत्री प्रजापति को कैबिनेट से बाहर का रास्ता भी दिखा दिया था, हालांकि मुलायम सिंह के करीबी होने और उनकी चरण वंदना के बाद एक बार फिर से उन्हें मंत्रीपद दे दिया गया था। लेकिन जिस तरह से अखिलेश यादव ने एक बार फिर से उन्हें पार्टी से टिकट दिया है उसने एक बार फिर से कई सवाल खड़े किए हैं।

akhilesh yadav

मुलायम समर्थकों को मिला टिकट

कांग्रेस से गठबंधन के बाद अखिलेश यादव ने जो लिस्ट जारी की है उसमें गायत्री प्रजापित को अमेठी से टिकट दे दिया गया है, उनके साथ ही राकेश कुमार को भी गौरीगंज से टिकट दिया गया है। जिन नामों को अखिलेश यादव ने अपनी लिस्ट से बाहर किया था और वो मुलायम-शिवपाल खेमे के थे उन्हें भी अखिलेश ने एक बार फिर से टिकट दे दिया है। इसमें मुख्य रुप से राजकिशोर,हरीश लोधी, सोवरन सिंह यादव, वीरपाल सिंह यादव, ओमप्रकाश सिंह, मनोज पांडेय अहम हैं। ये तमाम नाम मुलायम सिंह की 39 उम्मीदवारों की सूचि में थे जिन्हें अखिलेश यादव ने टिकट दे दिया है।

मुलायम से मुलाकात के बाद हुआ फैसला

रविवार को जब अखिलेश यादव ने पार्टी का घोषणा पत्र जारी किया था तो मुलायम सिंह यादव इस कार्यक्रम से नदारद रहे थे और माना जा रहा था कि पिता-पुत्र के बीच तनातनी खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। लेकिन आजम खान ने एक बार फिर इस तकरार को खत्म करने के लिए कदम आगे बढ़ाया और उन्होंने अखिलेश और डिंपल की मुलायम सिंह से मुलाकात कराई जिसके बाद उनके घर पर ही मुलायम सिंह ने पार्टी के घोषणा पत्र को जारी किया। माना जा रहा है कि इस मुलाकात के बाद ही अखिलेश यादव उन उम्मीदवारों को टिकट देने के लिए राजी हुई जिनके नाम उन्होंने पहले काट दिए थे। बहरहाल देखने वाली बात यह है कि जो विरोध अखिलेश यादव ने पार्टी के भीतर किया था वह सिर्फ अतीक अहमद और अंसारी बंधुओं को ही लेकर था या फिर अन्य मुद्दों पर भी।

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