मिशन शक्ति: जानें क्‍या होता है A-SAT वेपन, जिसके बारे में पीएम मोदी ने किया जिक्र

नई दिल्‍ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को जानकारी दी है कि भारत ने अतंरिक्ष में एक लो अर्थ आर्बिट पर उड़ रहे एक सैटेलाइट को एंटी-सैटेलाइट वेपन एसैट मिसाइल से मार गिराया है। दुश्मन के सैटेलाइट को गिराने के लिए वैज्ञानिकों को 'मिशन शक्ति' लॉन्‍च किया था। आखिर क्‍या होता है एंटी-सैटेलाइट वेपन एसैट और क्‍या है अंतरिक्ष में इसकी अहमियत जानने के लिए पढ़ें यह रिपोर्ट।

भारत इस तरह के हथियार रखने वाला चौथा देश

भारत इस तरह के हथियार रखने वाला चौथा देश

एंटी-सैटेलाइट वेपन (एसैट) मिसाइल दरअसल वह स्‍पेस वेपन होते हैं जिन्‍हें इस तरह से डिजाइन किया जाता है जो दुश्‍मन की ओर से मिलिट्री जासूसी के मकसद से तैयार किए गए सैटेलाइट को नष्‍ट कर सकते हैं। अभी तक अमेरिक, रूस और चीन के पास ही यह हथियार थे लेकिन अब भारत दुनिया का चौथा ऐसा देश बन गया है जिसके पास इस तरह की क्षमता मौजूद है। ऐसा करके भारत अब दुनिया का चौथा ऐसा देश बन गया है जिसके पास इस तरह का हथियार है जो अंतरिक्ष में भी दुश्‍मन को निशाना बना सकता है। भारत ने अंतरिक्ष में लियो सैटेलाइट को 300 किलोमीटर की दूरी पर ढेर किया है।

50 के दशक में अमेरिका ने शुरू किया काम

50 के दशक में अमेरिका ने शुरू किया काम

इन एंटी सैटेलाइट वेपन को 50 के दशक में सबसे पहले अमेरिका और सोवियत संघ ने डेवलप और डिजाइन करना शुरू किया था। इसके बाद कुछ और देशों ने भी इस दिशा में कोशिशें कीं। अमेरिकी एयरफोर्स ने 50 के दशक के अंत में एक के बाद एक कई सीरीज में हथियार डेवलप किए और प्रोजेक्‍ट को अंजाम दिया। इसे अमेरिका ने 199A नाम दिया था। साल 1983 में इस तरह के हथियारों को डेवलप करने का मकसद परमाणु हथियारों से रक्षा करना भी था लेकिन कुछ वैज्ञानिकों ने कहा कि ये हथियार एंटी-सैटेलाइट मकसद से भी प्रयोग किए जा सकते हैं।

साल 2007 में चीन ने डेवलप किया एसैट

साल 2007 में चीन ने डेवलप किया एसैट

चीन ने साल 2007 में एंटी-सैटेलाइट मिसाइल का सफल टेस्‍ट किया था। 11 जनवरी 2007 चीन ने एससी-19 एसैट मिसाइल से सैटेलाइट को नष्‍ट किया था। चीन की मिसाइल ने अपने ही मौसम सैटेलाइट एफवी-1सी को अमेरिकी स्‍टाइल में अंतरिक्ष में ढेर किया था। इस मिसाइल को 865 किलोमीटर की दूरी से गिराया गया था।

साल 2010 से भारत कर रहा था काम

साल 2010 से भारत कर रहा था काम

10 फरवरी 2010 को डीआरडीओ के तत्‍कालीन डायरेक्‍टर जनरल और उस समय रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार डॉक्‍टर वीके सारस्‍वत ने इंडियन साइंस कांग्रेस में बताया था कि भारत हर उस तकनीकी को डेवलप करने में लगा है जो अंतरिक्ष की कक्षा में भी दुश्मन के सैटेलाइट को ढेर कर दे। सारस्‍वत ने उस समय यह भी कहा था लो ऑर्बिट और पोलर ऑर्बिट में मौजूद किसी भी दुश्‍मन के सैटेलाइट को गिराने के लिए भारत हर तरह के कदम उठा रहा है।

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