पीएम मोदी के खिलाफ महागठबंधन की कोशिशों के बीच हुईं ये महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाएं

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव में लेकर भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पटखनी देने के लिए विपक्षी पार्टियों ने अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है। विपक्षी पार्टियां अपने मतभेदों को भूलाकर महागठबंधन बनाने की कवायद में जुट गए हैं। विपक्ष की प्रमुख पार्टियों में न्यूतम साझा कार्यक्रम पर सहमति है। पिछले दस दिनों में इसमें काफी तेजी देखी गई है। लेकिन जहां एक तरफ महागठबंधन को लेकर तेजी आई हैं। वहीं दूसरी और हाल के दिनों में महत्वपूर्ण घटनाएं घटित हुई हैं जो इस कवायद में असर डाल सकती है।

राहुल गांधी के आक्रामक तेवर

राहुल गांधी के आक्रामक तेवर

समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी द्वारा आगामी लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में भाजपा के खिलाफ गठबंधन पर मुहर लगाने के बाद कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने आक्रामक तेवर दिखाए हैं। उन्होंने इस गठबंधन के बाद यूपी में अपनी बहन प्रियंका गांधी को महासचिव बनाने के बाद पूर्वी यूपी की जिम्मेदारी दी है। इसके बाद सपा-बसपा एक बार फिर गठबंधन पर पूर्नविचार कर सकते हैं ऐसी खबरें आ रही हैं। इसके बाद राहुल गांधी ने कहा कि पार्टी हर राज्य में फ्रंट फुट पर खेलेगी,और लड़ाई को भाजपा के दरवाजे तक ले जाएगी।

तेजस्वी की कांग्रेस से मांग

तेजस्वी की कांग्रेस से मांग

कांग्रेस ने बिहार की राजधानी पटना में एक बड़ी रैली का आयोजन किया था। इसमें कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के ने भी शिरकत की थी। तब लालू के बेटे तेजस्वी यादव ने कांग्रेस को विपक्षी साझेदारों के लिए चुनाव में बड़ा दिल रखने की याद दिलाई। बिहार में अभी तक कोई कांग्रेस और सहयोगियों के बीच सीटों का समझौता नहीं हुआ है क्योंकि कांग्रेस गठबंधन में अधिक सीटों की मांग कर कर रही है जबकि अन्य साथी इस पर तैयार नहीं है।

ममता का मोदी सरकार के खिलाफ धरना

ममता का मोदी सरकार के खिलाफ धरना

तीन फरवरी को जब सीबीआई कोलकाता पुलिस के कमिश्नर के घर शारदा चिट फंड मामले में पूछताछ के लिए पहुंची तो इसके विरोध में ममता मोदी सरकार के खिलाफ सड़क पर उतर गईं। इसके बाद कई विपक्षी पार्टियों ने उन्हें फोन कर समर्थन जताया। इसमें राहुल गांधी, चंद्रबाबू नायडू, शरद पवार प्रमुख थे।जबकि तेजस्वी यादव के साथ कई नेता कोलकाता गए थे।

केसीआर ने ममता ने बनाई दूरी

केसीआर ने ममता ने बनाई दूरी

केसीआर ने ममता बनर्जी के साथ दूरी बनाना शुरू कर दिया है। ऐसा चंद्रबाबू नायडू और ममता के बीच नजदीकियां बढ़ने के वजह से हुआ है। अब महागठबंधन में तेलंगाना के सीएम और टीआरएस प्रमुख केसीआर को ज्यादा अवसर नहीं दिख रहे हैं। उन्होंने गैर कांग्रेसी और गैर भाजपा के खिलाफ गठबंधन में जाने का फैसला किया है। केसीआर ने इसके तहत वाईएसआर कांग्रेस के प्रमुख जगन मोहन रेड्डी से बातचीत की है और आंध्र प्रदेश में उन्हें समर्थन देने की बात कही है।

मायावती महागठबंधन में रोड़ा

मायावती महागठबंधन में रोड़ा

जहां एक तरफ महागठबंधन के लिए सभी पार्टियां कोशिश कर रही हैं वहीं मायावती इसमें सबसे बड़ा रोड़ा है। मायावती कांग्रेस से यूपी और देश के अन्य राज्यों में दूरी बना रही है। इसके अलावा 10 दिसंबर को कोलकाता में विपक्षी पार्टियों की रैली में भी वो शामिल नहीं हुआ था। इसके अलावा चंद्र बाबू नायडू के एक दिन के धरने में भी वो शामिल नहीं हुई थी।

प्रियंका गांधी की कांग्रेस में एंट्री

प्रियंका गांधी की कांग्रेस में एंट्री

जहां सपा-बसपा और आरलेडी यूपी में गठबंधन के तौर पर लड़ने को एकजुट हैं, वहीं राहुल गांधी ने प्रियंका गांधी को मैदान में उतार कर सबको चौंका दिया है। फरवरी 11 को लखनऊ में रोड शो का भी आयोजन किया गया। इसके बाद उन्होंने प्रभार संभाला और कई मीटिंगों में हिस्सा लिया।

चंद्रबाबू नायडू विपक्षी एकता में जुटे

चंद्रबाबू नायडू विपक्षी एकता में जुटे

राहुल गांधी को चंद्रबाबू नायडू के तौर पर एक सहयोगी मिला है। जो कांग्रेस को महागठबंधन में शामिल करने के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। 12 फरवरी को नई दिल्ली में केंद्र सरकार के खिलाफ उनके एक दिन के धरने में विपक्षी एकता दिखाई दी। वो इसके बाद ममता के साथ जंतर मंतर पर भी दिखे।

आप को कांग्रेस ने दिया झटका

आप को कांग्रेस ने दिया झटका

विपक्षी पार्टियों में एकजुटता के बीच सबसे बड़ी घटना आम आदमी पार्टी का कांग्रेस से गठबंधन के लिए लालायित रहना रही । लेकिन कांग्रेस की इसमें दिलचस्पी नहीं है। वहीं 13 फरवरी को ममता बनर्जी ने केजरीवाल को सातों सीटों पर लड़ने की सलाह दी। अरविंद केजरीवाल का भी कहना था कि कांग्रेस को हराकर उन्होंने दिल्ली में सत्ता पाई थी।

शरद पवार सबको मनाने में जुटे

शरद पवार सबको मनाने में जुटे

एनसीपी प्रमुख शरद पवार इस समय वही कर रहे हैं जो एक समय सीपीएम लीडर हरकिशन सिंह सुरजीत ने किया था। ममता और केजरीवाल के कांग्रेस की आलोचना करने के बाद ये सभी नेता पवार के घर पर जाकर जुटे और न्यूनतम साझा कार्यक्रम पर आगे बढ़ने की बात कही। उन्होंने खुद भी चुनाव लड़ने पर अंतिम मुहर लगा दी है। वो 10 साल बाद मढ़ा से लोकसभा चुनाव लड़ेंगे।

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