नीतीश कुमार ने कहा 'विलय करें या निकल जाएं': जीतन राम मांझी ने बताई विवाद की पूरी कहानी

हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के संस्थापक जीतन राम मांझी ने अपने बेटे के बिहार कैबिनेट से इस्तीफे के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने बुधवार को सारे घटनाक्रम के लिए सीएम नीतीश पर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि वह महागठबंधन का हिस्सा कभी थे ही नहीं।

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री मांझी ने अपने बेटे संतोष कुमार सुमन के नीतीश कुमार कैबिनेट से इस्तीफे के एक दिन बाद अपनी चुप्पी तोड़ी है और आठ साल पहले 'अपमानित' होकर इस्तीफा देने की मजबूरी का भी जिक्र किया है। इससके बाद ही नीतीश को वापस कुर्सी मिल पाई थी।

Jitan Ram Manjhi on Nitish Kumar

जेडीयू में विलय को लेकर भाषण देते रहे नीतीश- मांझी
मांझी ने कहा, 'इस महीने मैं नीतीश कुमार से मिला था। मेरे साथ मेरी पार्टी के एमएलए थे, जो अपने चुनाव क्षेत्रों को लेकर कुछ चिंताएं साझा करना चाहते थे। यह बैठक 45 मिनट तक चली, जिसमें ज्यादातर समय मुख्यमंत्री हमारी पार्टी के जेडीयू में विलय को लेकर भाषण देते रहे।'

'नीतीश ने कहा, तब अच्छा है कि आप निकल जाएं'
नीतीश से उम्र में थोड़े बड़े मांझी के मुताबिक, 'मैंने उनका ध्यान खींचने की कोशिश की, यहां तक कि मजाक में कहा कि लगता है कि उनकी उम्र बढ़ रही है।' लेकिन, उन्होंने दावा किया कि जब नीतीश विलय की बात पर जोर देते रहे और उन्होंने कहा कि यह संभव नहीं है, तो उन्होंने साफ कह दिया कि 'तब अच्छा है कि आप निकल जाएं।'

'मैंने अगले दिन ही बेटे से कहा कि इस्तीफा दे दो'
पूर्व सीएम ने दावा किया कि 'मुझे उसी दिन अपने चुनाव क्षेत्र गया के लिए निकलना था और 12 जून को लौटने वाले थे। सीएम ने मुझसे कहा कि उनके प्रस्ताव पर फिर से सोचें और जब लौट के आएं तो उन्हें बता दें।' मांझी बोले कि '12 जून को मैं फिर उनसे मिला और बताया कि मेरे लिए विलय पर तैयार होना मुमकिन नहीं है। उन्होंने फिर कहा कि अगर ऐसा है तो अच्छा है कि मैं निकल जाऊं। इसलिए मैंने अगले दिन ही बेटे से कहा कि इस्तीफा दे दो।'

'....जिनके लिए सब कुछ बिकाऊ है'
गौरतलब है कि संतोष सुमन ने राज्य के संसदीय कार्यमंत्री विजय कुमार चौधरी को अपना इस्तीफा सौंपा था, जिन्होंने बाद में दावा किया था कि इस्तीफे की वजह 'निजी कारणों से साथ में रहना मुश्किल' बताया गया है। मांझी ने जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह 'ललन' की ओर से मांझी की पार्टी की तुलना 'छोटी दुकान' से करने पर भी नाराजगी जताते हुए कहा है,'ऐसी भाषा उनके लिए उपयुक्त है, जिनके लिए सब कुछ बिकाऊ है।'

'हम कभी महागठबंधन का हिस्सा नहीं थे'
यही नहीं उन्होंने यह भी कहा कि जदयू को यह याद रखना चाहिए कि हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के महागठबंधन से बाहर होने की बात करना बेमानी है, क्योंकि उनकी पार्टी कभी गठबंधन में शामिल ही नहीं हुई और 'हमारी निष्ठा केवल नीतीश कुमार के साथ थी।'

'दब्बू को सीएम बनाना चाहते थे नीतीश'
बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव के उस बयान पर कि नीतीश कुमार ने उन्हें सीएम बनने में मदद करके उनका 'सम्मान' किया था, बिहार के पूर्व सीएम बोले 'आरजेडी के युवा नेता को ऐसा लगता होगा, लेकिन उन्हें पूरी कहानी नहीं पता है।' उन्होंने कहा, 'नीतीश ने मेरे गुणों को देखकर मेरा साथ नहीं दिया था। 2014 के लोकसभा चुनावों में बुरी तरह हार की वजह से उन्हें शर्म आ रही थी। वह खुद को लाइमलाइट से दूर रखना चाहते थे और अपनी जगह किसी ऐसे व्यक्ति को रखना चाहते थे जिसे वह दब्बू मानते थे।'

'अधिकार जताने पर हटाने का फैसला किया'
हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा ने दावा किया कि 'करीब दो महीनों तक मैंने उनकी सलाह के हिसाब से काम किया। लेकिन सब लोग, मीडिया ने भी चिल्लाना शुरू कर दिया था कि मैं रबर स्टांप बन गया था। इसलिए मैंने अपना अधिकार जताना शुरू कर दिया। इससे नीतीश को शक हो गया और उन्होंने मुझे हटाने का फैसला कर लिया।'

'मैं विधानसभा भंग करने की भी सिफारिश कर सकता था'
वो बोले, 'तेजस्वी को पता होना चाहिए कि नीतीश ने मुझे सम्मान दिया, लेकिन मुझे जिस अपमान का सामना करना पड़ा, उसके लिए भी वही जिम्मेदार हैं। उन्होंने मुझपर कभी विश्वास नहीं किया, जबकि मैंने कभी उन्हें धोखा नहीं दिया। मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा देने के बजाए मैं विधानसभा भंग करने की भी सिफारिश कर सकता था। इससे मुझे कुछ महीने के लिए कार्यपालक मुख्यमंत्री के तौर पर काम करने का मौका मिल जाता और नीतीश की सारी योजना चौपट हो जाती।'

18 जून को लेंगे भविष्य के बारे में फैसला
मांझी ने अभी अपने अगले कदम को लेकर सियासी पत्ते नहीं खोले हैं। अलबत्ता एक महीने पहले केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से उनकी मुलाकात के बाद ऐसी अटकलें हैं कि वह एनडीए में जा सकते हैं। हालांकि, उनका कहना है कि 'हम अपने भविष्य की योजना के बारे में 18 जून को पार्टी पदाधिकारियों की बैठक में फैसला करेंगे।'(इनपुट- पीटीआई)

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