क्या लालू यादव ने इशारे में राहुल को बताया I.N.D.I.A का पीएम चेहरा ? भरोसा देने का तरीका तो ऐसा ही था
मुंबई में इंडिया गठबंधन की बैठक का समापन हो गया। सभी नेताओं ने इंडिया गठबंधन की एकता के दावे किए। लेकिन जिसका सबको इंतजार था कि इस गठबंधन को मुखिया कौन होगा? कौन होगा पीएम चेहरा? इसकी कोई घोषणा नहीं हुई। हालांकि जानकारों की माने तो यह इंतजार इंतजार ही रहना था, इसकी घोषणा की कोई उम्मीद मुंबई बैठक के दौरान नहीं की जानी चाहिए थी। लेकिन लालू यादव जैसे मझे हुए नेता के मुख से निकले शब्द और और व्यवहार को नजरअन्दाज नहीं किया जा सकता है।
सभी जानते हैं कि पीएम मोदी और बीजेपी के विरुद्ध विपक्ष के एकजुटता के प्रयास 2022 में बहुत तेजी से शुरू हुए। बिहार की सत्ता में नितीश बाबू के पार्टनर बदलने के बाद वह बीजेपी के विरुद्ध न सिर्फ बेहद मुखर हो गए बल्कि पूरे देश के नेताओं को एकजुट होने का सन्देश भी देने लगे। इससे विपक्षी नेताओं को अचानक मोदी और बीजेपी के विरुद्ध ताकत के साथ एकजुट होने की आशा जाग गई। विपक्षी एकता करने के मामले में नितीश बाबू की बिहार से निकलकर सक्रियता के चलते एक वक्त ऐसा भी आया कि विपक्ष का पीएम चेहरा नितीश कुमार को बताया जाने लगा।

यहाँ से विपक्षी एकता का रथ तो आगे बढ़ने लगा लेकिन इसके साथ पीएम चेहरे की दौड़ में दूसरे मजबूत नेताओं के नाम की भी चर्चा होने लगी। इनमें पश्चिम बंगाल में मजबूती से पांव जमाए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और आम आदमी पार्टी के मुखिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल का नाम प्रमुखता से लिया जाने लगा। लिहाजा नितीश कुमार जो पहले पहले विपक्षी एकता के हीरो की तरह उभरे, वह पीएम चेहरे के तौर धुंधले पड़ते गए। यहाँ सबसे बड़ी बात यह थी कि राहुल गांधी का नाम इस चर्चा से लगभग बाहर ही हो गया था।
लेकिन राजनीति के तेजी से बदलते घटनाक्रम ने विपक्षी एकता में साइड हीरो की तरह काम कर रहे राहुल गांधी को तेजी से चर्चा में ला दिया। इस समय ऐसा वक्त आ गया जब मीडिया में भी राहुल की हर बात की कवरेज विस्तार से दिखाई देने लगी। ख़ास तौर पर सप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सांसदी बहाली होने के बाद तो विपक्ष के ज्यादातर नेता राहुल गाँधी के पीछे खड़े दिखाई दिए। हालाँकि वजह कोर्ट के इस निर्णय के सहारे मोदी सरकार को मनमाना निर्णय लेकर विरोधियों पर सत्ता के सहारे हमला करने वाली सरकार घोषित करने की मंशा थी। लेकिन इस सबसे राहुल का कद विपक्ष में इतना बड़ा दिखाई देने लगा कि बिना कहे ही पीएम के दावेदारों में सबसे आगे खड़े दिखाई देने लगे।
मुंबई में राजनीति के माहिर खिलाड़ी लालू यादव ने अपने भाषण के दौरान जिस तरह राहुल को भरोसा दिलाया और कहा ''हम सब एक हैं और एक होकर हम लोग इस लड़ाई को लड़ रहे हैं और राहुल गाँधी जी को भी हम काफी मजबूती के साथ विश्वास हम लोग दिलाते हैं..... ''और जिस तरह उनकी राहुल के साथ लालू की मंच पर केमिस्ट्री दिखी वह काफी मजबूत थी।
हालाँकि लालू जैसे नेता जब मंच से कोई बात करते हैं तो बस यूं ही नहीं करते, उनके एक एक शब्द और व्यवहार का मतलब होता है। लालू का यह व्हवहार इंडिया गठबंधन में पीएम चेहरे पर विशेष इशारा हो सकता है या किसी पर अप्रत्यक्ष दबाव भी हो सकता है। फिलहाल मुंबई बैठक से भी इंडिया गठबंधन के बहुत से सवाल अनसुलझे ही रह गए।












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