महाबलेश्वर की गुफा में रहने वाले चमगादड़ में मिला निपाह वायरस, नहीं है इसका कोई इलाज

नई दिल्ली, 23 जून। एक साल से अधिक समय से देश और पूरी दुनिया कोरोना वायरस के संक्रमण से लड़ रही है। हालांकि कोरोना वायरस का टीका अब आ चुका है और लोगों को लगाया जा रहा है। लेकिन जिस तरह से एक के बाद एक नए वायरस आ रहे हैं उसने लोगों की चिंता को बढ़ा दिया है। भारत में महाराष्ट्र कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य है। बड़ी संख्या में लोगों ने कोरोना से अपनी जान गंवा दी है। इस बीच सतारा जिले के महाबलेश्वर की गुफाओं में निपाह वायरस की जानकारी सामने आई है, जिसने एक नई मुसीबत खड़ी कर दी है।

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    एक साल पहले लिए गए थे सैंपल
    महाराष्ट्र के महाबलेश्वर के जंगलों में एक गुफा के अंदर बड़ी संख्या में चमगादड़ रहते हैं और इन चमगादड़ों के भीतर यह निपाह वायरस पाया गया है। महाबलेश्वर के चमगादड़ों में निपाह वायरस मिलने से यहां के लोग काफी चिंतित हैं, लेकिन इसको लेकर प्रशासन जरा भी सक्रिय नहीं है। इस बात का अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है कि जिले के डीएम और वन विभाग को इसके बारे में कोई जानकारी ही नहीं है। दरअसल मार्च 2020 में आईसीएमआर के पुणे के नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के वैज्ञानिकों ने इन चमगादड़ों के सैंपल लिए थे।

    इस वायरस का नहीं है कोई इलाज
    वैज्ञानिकों ने महाबलेश्वर की गुफा के चमगादड़ों के सैंपल लिए थे जिसके स्वैबकी जांच में यह बात सामने आई है कि इन चमगादड़ों में निपाह वायरस है। एनआईवी के वैज्ञानिकों की टीम की सदस्य डॉक्टर प्रज्ञा यादव ने कहा कि इससे पहले किसी भी महाराष्ट्र के चमगादड़ में यह वायरस नहीं मिला था। यह वायरस बहुत ही खतरनाक होता है और इंसानों में काफी तेजी से फैलता है, इससे व्यक्ति की जान भी जा सकती है। अभी तक इस वायरस का कोई इलाज नहीं है, लिहाजा इस वायरस से संक्रमित लोगों की जान को खतरा 65 से 100 फीसदी तक है।

    क्या कहना है वन संरक्षक का
    इस वायरस के सामने आने के बाद महाराष्ट्र के पचगनी क्षेत्र में स्थित महाबलेश्वर लोग काफी चिंता में हैं। इन लोगों की आजीविका मुख्य रूप से पर्यटन पर निर्भर है, ऐसे में इन चमगादड़ों में निपाह वायरस के मिलने से इन लोगों की रोजी-रोटी पर संकट आ सकता है। लेकिन बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि आखिर यह रिपोर्ट एक साल से सामने क्यों नहीं आई। इस बारे में जब सतारा के वन विभाग के उप वन संरक्षक महादेव मोहिते से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि महे इसकी कोई जानकारी नहीं है, हमारे पास ऐसी कोई रिपोर्ट अभी तक नहीं भेजी गई है।

    क्या कहना है डॉक्टर का
    चमगादड़ों पर शोध कर रहे डॉक्टर महेश गायकवाड़ ने कहा कि लोगों से इससे डरने की जरूरत नहीं है। निपाह वायरस मुख्य रूप से मलेशिया, इंडोनेशिया में पाया जाता है और अभी तक यह महाराष्ट्र के चमगादड़ों में नहीं पाया गया है। जबतक हम एनआईवी की रिपोर्ट को विस्तार से पढ़ नहीं लेते हैं इसपर कोई चर्चा नहीं की जा सकती है। डॉक्टर गायकवाड़ ने कहा कि जब चमगादड़ फल खाकर नीचे फेंकता है और उसे कोई व्यक्ति खा लेता है तो इससे संक्रमण का खतरा होता है। लिहाजा लोगों को ऐसी जगह जाने से बचना चाहिए जहां पर अधिक चमगादड़ रहते हो।

    डीएम ने दिया ये जवाब
    महाबलेश्वर की गुफाओं में चमगादड़ में निपाह वायरस को लेकर सतारा के डीएम से जब पूछा गया तो उन्होंने कहा कि फिलहाल महाबलेश्वर-पचगनी में पर्यटकों के आने पर रोक लगा दी गई है। लेकिन यहां निपाह वायरस का कोई खतरा नहीं है। जल्द ही हम पर्यटन स्थल को खोल देंगे। कोरोना के मामलों में कमी आने के बाद धीरे-धीरे सीमित व्यक्तियों के लिए पर्यटन की शुरुआत की जाएगी। गौर करने वाली बात है कि निपाह वायरस विश्व स्वास्थ्य संगठन के शीर्ष 10 खतरनाक वायरस में शामिल है।

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