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Rangoli : 'ये पेंटिंग नहीं है..', दुनियाभर में मशहूर जबलपुर के मटर की रंगोली है, 3 दिन लगे बनाने में

मटर का सीजन आ गया है और लजीज सब्जियों में डलते ही स्वाद चार गुना बढ़ जाता है। एमपी के जबलपुर का मटर देश ही नहीं दुनिया में अपनी अलग पहचान रखता है। भले ही इस बार मानसून की विदाई के बाद बेमौसम बारिश ने इसकी बोनी को किरकिरा कर दिया, लेकिन उसकी डिमांड कम नहीं है। इसकी मार्केटिंग के लिए शहर के एक मॉल में दो सौ वर्ग फीट की रंगोली बनाई गई। इसे बनाने वाले कलाकार के हुनर को देखकर किसानों के मुरझाए चहरे खिल रहे है।

न प्रिंटिंग का फ्लेक्स है और न ही कोई पेंटिंग

न प्रिंटिंग का फ्लेक्स है और न ही कोई पेंटिंग

तस्वीर में मटर और उसके ऊपर पगड़ी पहने किसान को देखकर पहली नजर में यही लगता है कि यह पेंटिंग है या फिर इस डिजाइन का फ्लेक्स प्रिंट करके फ्लोर पर चिपकाया गया है। ऊंचाई से देखने पर भी यही अहसास होता है। लेकिन यह न तो प्रिंटेड फ्लेक्स है और न ही कोई पेंटिंग। यह जबलपुर के एक मॉल में बनी दो सौ वर्ग फीट की रंगोली है।

हर किसी की आंखो को चकमा दे रही ये रंगोली

हर किसी की आंखो को चकमा दे रही ये रंगोली

ये रंगोली मॉल में क्यों बनाई गई, यह हम आपको आगे बताएंगे। पहले यह जान लीजिए कि इसे देखने वालों की आंखे चकमा क्यों खा रही है? दरअसल जिन कलाकारों के इस रंगोली को बनाया है, उन्होंने बहुत बारीकी से अपनी कला का इस्तेमाल किया है। बिल्कुल ऑरिजनल मटर की तरह रंगों का समावेश है। ऊपर से पगड़ी पहने किसान को भी जिस अंदाज में उकेरा गया है, वह बेहद लाजबाब है। इसलिए दूर से देखने में इसकी असलियत पता नहीं लग पाती।

तीन दिन बनाने में, 50 किलो रंगोली

तीन दिन बनाने में, 50 किलो रंगोली

इस रंगोली का निर्माण उमरिया की बी.आर. आर्ट एण्ड डिजाइन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी द्वारा किया गया है। इस हुनर को अंजाम देने वाले कलाकार अलख खरे ने तो कमाल दिखाया ही, उनके साथ छत्तीसगढ़ के बस्तर से आए कलाकार गजेन्द्र मरावी और संतोष पटेल ने अपने हाथों से खुशियों के रंग भर दिए। कलाकारों को यह रंगोली बनाने में तीन दिन लगे और करीब पचास किलो रंगोली का इस्तेमाल किया गया है।

मॉल में मटर की मार्केटिंग

मॉल में मटर की मार्केटिंग

दरअसल एमपी का जबलपुर में होने वाली मटर की खेती अन्य इलाकों से अलग है। यहां का मटर स्वाद के साथ कई अन्य खूबियों से भरपूर है। न सिर्फ देश बल्कि दुनिया के कई हिस्सों में यहां का मटर निर्यात होता है। लिहाजा शहर के बीच मॉल वाली सुरक्षित जगह चुनी गई, जहां आम लोगों के साथ मटर उत्पादक किसान इस कला का दीदार कर सकें।

मप्र स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में बनी रंगोली

मप्र स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में बनी रंगोली

इस बार मप्र का स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में एक सप्ताह विभिन्न गतिविधियां जारी रखने का सरकार ने फैसला लिया है। हर जिले में वहां की खासियत चाहे वह किसानों से जुड़ी हो या फिर आम जन सामान्य से उसे अलग-लग ढंग से प्रदर्शित किया जा रहा है। ताकि हर किसी को अपने जिले की विशेषता के बारे में जानकारी हो सकें। कलेक्टर डॉ. इलैयाराजा टी. ने भी इस रंगोली को बनाने वाले कलाकारों की खूब तारीफ की।


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