'2019 में मोदी की जीत होगी', यही मानकर ग्‍लोबल इन्‍वेस्‍टर्स ने किया भारत में निवेश, पर अब सता रही चिंता

नई दिल्‍ली। ग्‍लोबल रिसर्च फर्म यूबीएस ने अपने ताजा सर्वे में दावा किया है कि भारत में निवेश करने वाले ग्‍लोबल इन्‍वेस्‍टर्स को 2019 में नरेंद्र मोदी की सत्‍ता की वापसी की उम्‍मीद है। सर्वे में दावा किया गया है कि भारत में निवेश करने वाले ज्‍यादातर इन्‍वेस्‍टर्स ने निवेश का फैसला लेने से पहले इस उम्‍मीद को दिमाग में रखा था कि मोदी सरकार की सत्‍ता में वापसी होगी। अब अगले आम चुनाव में ज्‍यादा वक्‍त नहीं रह गया है। ऐसे में कर्नाटक विधानसभा चुनाव पर ग्‍लोबल इन्‍वेस्‍टर्स की पैनी नजर बनी हुई है। वे जानना चाहते हैं कि भारत में पॉलिटिकली लोगों का मूड आखिर क्‍या है?

 Narendra Modi win in 2019 is priced in

ताजा सर्वे में एक बात यह भी उभरकर आई है कि वे मोदी सरकार की सत्‍ता में वापसी की आस तो लगाए बैठे हैं, लेकिन चिंताग्रस्‍त भी हैं। उनकी परेशानी का सबब है- वैश्विक स्तर पर बढ़ते कच्चे तेल दाम, रुपये का लगातार गिरना और राजकोषीय घाटा। ग्‍लोबल इन्‍वेस्‍टर्स को डर है कि 2019 में इन कारणों से मोदी सरकार को नुकसान न हो जाए।

रिपोर्ट में महंगाई को लेकर भी एक आकलन किया गया है। इसके मुताबिक, कच्‍चे तेल की कीमतों में अगर 10 प्रतिशत का इजाफा होता है तो इससे कन्‍ज्‍यूमर प्राइस इन्‍फ्लेशन में 25 बेस पॉइंट तक की वृद्धि हो सकती है। अगर कन्‍ज्‍यूमर पर तेल की बढ़ी कीमतों का बोझ पड़ता है तो इससे जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि में 30 आधार अंक का असर पड़ेगा। रिपोर्ट के मुताबिक, तेल की कीमतें 75-85 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर बरकरार रहने से अर्थव्यवस्था पर विपरीत असर पड़ सकता है। ऐसे में डॉलर के मुकाबले रुपये में 3-6 फीसदी का अवमूल्यन होने का खतरा है, यानी रुपया और लुढ़क सकता है। कुल मिलाकर देखा जाए तो चिंता इस बात की जताई जा रही है कि कहीं 2019 में महंगाई मुद्दा न बन जाए।

सर्वे रिपोर्ट में देश के विदेशी मुद्रा भंडार (420 अरब डॉलर) की स्थिति पर संतोष जताया गया है। इससे वैश्विक स्तर पर होने वाले उतार-चढ़ाव से निपटने में मदद मिलेगी। सर्वे में कई और चिंताएं भी जाहिर की गई हैं। यूबीएस के मुताबिक ग्‍लोबल इन्‍वेस्‍टर्स इस बात को लेकर चिंतित हैं कि सरकार वित्त वर्ष 2019 में राजकोषीय घाटे का लक्ष्य जीडीपी के 3.3 फीसदी के स्तर पर रखने में नाकाम हो सकती है। 2019 के चुनावों के मद्देनजर लोकलुभावन योजनाओं पर किए जाने वाले खर्च की वजह से राजकोष पर भी नकारात्‍मक असर पड़ सकता है।

यूबीएस के लिए यह सर्वे रिपोर्ट तन्‍वी गुप्‍ता जैन ने की है। उन्‍होंने अमेरिका और यूरोप में करीब 50 इन्‍वेस्‍टर्स के साथ बातचीत की। इन सभी की बातों से यह निष्‍कर्ष निकला कि मोदी सरकार की सत्‍ता में वापसी को आधार मानकर ग्‍लोबल इन्‍वेस्‍टर्स ने भारत में निवेश किया गया है।

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