LAC पर पीछे नहीं हट रहा है चीन, जवाब देने के लिए फिर 40,000 जवान तैनात!
नई दिल्ली। पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ टकराव को 11 हफ्ते हो गए हैं। कमांडर स्तर की चार वार्ता के बाद भी चीन पीछे नहीं हट रहा है। चीन की तरफ से अब लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर डिसइंगेजमेंट को लेकर रजामंदी जताई गई थी। लेकिन शुरुआती दौर के बाद अब पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) की तरफ से डिसइंगेजमेंट को रोक दिया गया है। सूत्रों की मानें तो चीन की सेना टकराव वाले बिंदुओं से पीछे नहीं हट रही है। ऐसे में अब भारत फिर से लंबे टकराव के लिए तैयार हो रहा है।
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बढ़ाई गई जवानों की संख्या
भारतीय सेना अब तीन अतिरिक्त डिविजन को वापस तैनात करने के लिए तैयार है। एक डिविजन में 10 हजार से 25,000 तक जवान होते हैं। ऐसे में करीब 40,000 जवान इस समय एलएसी पर तैनात हैं। एलएसी के कुछ इलाकों पर अभी तक चीनी जवान मौजूद हैं। 14 जुलाई को भारत और चीन के बीच चौथी कमांडर स्तर की वार्ता हुई थी और चार में से सिर्फ दो ही प्वाइंट्स पर डिसइंगेजमेंट पूरा हो सका है। अभी यह तय नहीं है कि चीन के साथ अब कोई वार्ता होगी या नहीं। दोनों तरफ से सेनाएं गलवान घाटी के पेट्रोलिंग प्वाइंट (पीपी) 14 और पीपी 15 से पीछे हटी हैं। चीनी जवान एलएसी में अपनी तरफ वाले क्षेत्र में वापस लौट गए हैं।

जवानों के अलावा भारी हथियार भी तैनात
अभी तक दोनों तरफ से 50-50 जवान पीपी 17 पर एक-दूसरे से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर बरकरार हैं। चीन की सेना डिसइंगेजमेंट के अपने वादे को पूरा नहीं कर रही है। सूत्रों के मुताबिक अभी इस प्रक्रिया में काफी हफ्तों का समय लग जाएगा। रक्षा सूत्रों के मुताबिक 40,000 जवानों के अलावा भारी हथियार जैसे एयर डिफेंस सिस्टम, हथियारबंद कैरियर्स और लंबी दूरी के आर्टिलरी सिस्टम को भी तैनात कर दिया गया है। डिसइंगेजमेंट की प्रक्रिया में 14 जुलाई को हुई कोर कमांडर वार्ता के बाद से कोई खास प्रगति नहीं हुई है। इसके अलावा हॉट स्प्रिंग्स, गोगरा इलाके और कुछ और जगहों पर चीन जवान मौजूद हैं। चीनी सेना का कहना है कि भारत की सेना ऊंचाई वाले इलाकों पर पहुंच सकती है। इसलिए उन्हें भी अलर्ट रहना होगा।

देपसांग में टकराव की स्थिति
पैंगोंग त्सो जो टकराव का केंद्र बिंदु है, वहां पर चीन की सेना फिंगर 5 तक लौट गई है लेकिन फिंगर 4 पर उनकी मौजूदगी बनी हुई है। चीन ने फिंगर 4 और फिंगर 8 के बीच आठ किलोमीटर की दूरी तक अच्छा-खासा निर्माण कार्य कर डाला है। भारत फिंगर 8 तक के क्षेत्र को एलएसी मानता है। दोनों तरफ के कमांडर्स की मीटिंग पर इस आपसी निष्कर्ष पर पहुंचा गया था कि कोई भी पक्ष टकराव वाले चारों क्षेत्र में पेट्रोलिंग नहीं करेगा। भारत हर बार चीन को स्पष्ट करता आ रहा है कि उसे अप्रैल 2020 की यथास्थिति एलएसी पर बहाल करनी होगी। देपसांग प्लेन में भी जवान टकराव की स्थिति में है। यहां पर चीन ने भारत को उस पेट्रोलिंग प्वाइंट तक जाने से रोक दिया है जहां पहले गश्त होती थी।

सर्दियों के मौसम में होगी बड़ी मुश्किल
जो एक सबसे बड़ी चुनौती है वह है सर्दी का मौसम जो कि जल्द आने को है। सर्दियों के मौसम में भी यहां पर जवानों की तैनाती को बहाल किया जाएगा। सेना के टॉप सूत्रों की तरफ से बताया गया है कि जवानों की संख्या को सर्दी का मौसम देखते हुए डबल किया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो सेना फिलहाल समाधान की तरफ देख रही है लेकिन यह सबसे बड़ी चुनौती है। सेना के पास अभी नवंबर तक का समय है और तब अतिरिक्त संसाधनों को तैनात किया जा सकता है। पूर्वी लद्दाख के कई हिस्सों में तापमान -20 डिग्री से भी नीचे चला जाता है।












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