सेना में लेफ्टिनेंट बनकर दुश्मनों के छक्के छुड़ाने को तैयार हैं रेखा सिंह, गलवान घाटी में शहीद हुए थे पति
Galwan Martyr wife Rekha Singh: रेखा सिंह की शादी बिहार रेजीमेंट की 16वीं बटालियन के नायक दीपक सिंह से हुई थी। दीपक सिंह 15 जून 2020 को गलवान घाटी में चीनी सेना के साथ हुई झड़प में शहीद हुए थे।

भारत-चीन के बीच गलवान घाटी में हुई झड़प में शहीद हुए दीपक सिंह की पत्नी रेखा सिंह अब सेना में लेफ्टिनेंट बनकर एंट्री करने को पूरी तरह से तैयार हैं। जून 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के साथ झड़प में शहीद हुए 20 बहादुरों में से एक की पत्नी हैं रेखा सिंह। रेखा सिंह को अब सेना में लेफ्टिनेंट के रूप में नियुक्त किया जाएगा।
29 अप्रैल को ग्रेजुएट होंगी रेखा सिंह
हिन्दुस्तान टाइम्स में छपी रिपोर्ट के मुताबिक अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि रेखा सिंह उन 200 कैडेटों में शामिल होंगी, जिनमें 40 महिलाएं शामिल हैं, जो 29 अप्रैल को चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी से ग्रेजुएट होंगी। पहली बार अधिकारियों के इस नवीनतम बैच की पांच महिला कैडेटों को आर्टिलरी रेजिमेंट में कमीशन दिए जाने की उम्मीद है।
कौन हैं रेखा सिंह
रेखा की शादी बिहार रेजिमेंट की 16वीं बटालियन के नायक दीपक सिंह से हुई थी, जो 15 जून 2020 को चीनी सैनिकों से लड़ते हुए गलवान घाटी में शहीद हो गए थे। नवंबर 2021 में उनकी वीरता के लिए उन्हें मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित किया गया था। परमवीर चक्र (पीवीसी) और महावीर चक्र (एमवीसी) के बाद वीआरसी भारत का तीसरा सबसे बड़ा युद्धकालीन सैन्य सम्मान है।

सेना में बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रही हैं शहीद जवानों की पत्नियां
बता दें कि शहीद हुए जवानों की पत्नियों की सेना में अब संख्या बढ़ रही है। वह सशस्त्र बलों में करियर बनाने का विकल्प चुन रही हैं। ताकि वह सैनिक बनकर अपने बहादुर पति की विरासत को आगे बढ़ा सके। सेना उन महिलाओं को प्रोत्साहित कर रही है जो अपने दिवंगत पतियों के नक्शेकदम पर चलने के लिए अधिकारी बनने की पात्र हैं और उन्हें एक नई शुरुआत करने के लिए मार्गदर्शन भी प्रदान कर रही हैं।
मारे गए सैनिकों की पत्नियों को सेवा चयन बोर्ड इंटरव्यू के लिए के लिए अर्हता प्राप्त करने के लिए संघ लोक सेवा आयोग (यूएसपीसी) द्वारा आयोजित संयुक्त रक्षा सेवा परीक्षा में शामिल होने से छूट दी गई है। वे आयु में छूट के भी हकदार हैं।

सेना में अब महिलाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा रहा है। उन्हें तीनों सेवाओं में उनके पुरुष समकक्षों के बराबर केंद्रीय भूमिकाएं सौंपी जा रही हैं। महिलाएं अब फाइटर प्लेन उड़ा रही हैं, युद्धपोतों को चला रही हैं, कमांडेंट ऑफिसर बनाई जा रही हैं।












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