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ग्वालियर में झांसी की रानी के लिए दी थी 745 साधु-संतों ने शहादत, अब उठ रही यह मांग

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ग्वालियर, 16 अगस्त। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की देह को अंग्रेजों से बचाने के लिए गंगादास की बड़ी शाला के 745 साधु-संतों ने अपनी शहादत दी थी। इन साधु संतों का स्मारक लक्ष्मीबाई समाधि के पास बनवाने की मांग कई सालों से की जा रही है लेकिन सरकार द्वारा इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इस बात को लेकर सरकार से संत समाज नाराज है।

1857 में दी थी साधु संतों ने शहादत

1857 में दी थी साधु संतों ने शहादत

सन 1857 में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई अंग्रेजों से लड़ते हुए ग्वालियर पहुंची थी। यहां जब वे बुरी तरह घायल हो गईं तो वे गंगादास की बड़ीशाला में घायल अवस्था में पहुंची थी और यहीं उन्होंने आखिरी सांस ली थी। लक्ष्मी बाई की अंतिम इच्छा के अनुरूप उनकी देह को अंग्रेजों से बचाने के लिए यहां रहने वाले साधु संतों ने अंग्रेजों की गोलियों का सामना किया था।

745 साधु-संत हुए थे शहीद

745 साधु-संत हुए थे शहीद

रानी लक्ष्मीबाई के देह को अंग्रेजों से बचाने के लिए यहां के 745 साधु-संतों ने अपनी शहादत दी थी। अंग्रेजों से लड़ते-लड़ते इन साधु-संतों ने अपनी जान दे दी, लेकिन झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के शरीर तक अंग्रेजों को नहीं पहुंचने दिया था। उन्होंने अपनी शहादत देकर झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की अंतिम इच्छा पूरी की थी।

गंगादास की बड़ीशाला में आज भी बने हैं साधु-संतों के स्मारक

गंगादास की बड़ीशाला में आज भी बने हैं साधु-संतों के स्मारक

लक्ष्मीबाई कॉलोनी में स्थित गंगादास की बड़ीशाला में आज भी शहादत देने वाले साधु-संतों के स्मारक बने हैं। इन साधु-संतों को हर साल उनकी शहादत दिवस पर याद किया जाता है और उन्हें नमन भी किया जाता है लेकिन साधु-संतों की शहादत को याद करने कोई जनप्रतिनिधि, नेता इन स्मारकों पर नहीं पहुंचता है।

लक्ष्मीबाई की समाधि स्थल के पास स्मारक बनाने की उठाई मांग

लक्ष्मीबाई की समाधि स्थल के पास स्मारक बनाने की उठाई मांग

निर्मोही अखाड़े के संत रामसेवक महाराज का कहना है की रानी लक्ष्मीबाई की देह को अंग्रेजों से बचाने के लिए शहादत देने वाले 745 साधु संतों का स्मारक रानी लक्ष्मीबाई की समाधि के पास बनाए जाने की मांग लंबे समय से की जा रही है लेकिन इस ओर कोई भी ध्यान नहीं दे रहा है इस वजह से साधु संत काफी नाराज हैं, इसे लेकर साधु संत पहले कई बार आंदोलन कर चुके हैं लेकिन हर बार आश्वासन मिलने के बाद आंदोलन को रोक दिया जाता है।

पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती कर चुकी है भूमि पूजन

पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती कर चुकी है भूमि पूजन

साधु-संतों का स्मारक लक्ष्मीबाई समाधि स्थल के पास बनाए जाने को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती भूमि पूजन कर चुकी है लेकिन इतना समय बीत जाने के बावजूद भी यहां स्मारक नहीं बना हैं, इस बात को लेकर साधु-संतों में खासी नाराजगी देखने को मिल रही है।

सांसद ने दिया प्रयास करने का आश्वासन

सांसद ने दिया प्रयास करने का आश्वासन

इस बारे में ग्वालियर सांसद विवेक नारायण शेजवलकर का कहना है कि रानी लक्ष्मीबाई समाधि स्थल पर पहले से ही स्मारक बना हुआ है और वहां अखंड ज्योति भी जल रही है लेकिन जो साधु-संतों की मांग है वह भी जायज है इस दिशा में प्रयास किए जाएंगे, एक ठोस योजना बनाकर इस पर कार्य किया जाएगा।

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English summary
demand for building a memorial of saints who sacrificed martyrdom for rani laxmibai in gwalior
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