Video: चायवाले ने ठोकी सांसद के लिए दावेदारी, अब तक पार्षद से लेकर राष्ट्रपति तक लड़ चुका हैं 27 चुनाव
Lok Sabha Election 2024: ग्वालियर के मशहूर चाय वाले आनंद कुशवाहा इस बार भी लोकसभा चुनाव लड़ेंगे। पहले दिन ही वे चुनाव लड़ने के लिए अपनी लाडली साइकिल से नामांकन फार्म लेने पहुंचे हैं।
आनंद कुशवाहा 28वीं बार चुनाव लड़ने जा रहे हैं। इसके लिए लोकसभा चुनाव का नामांकन पत्र लिया है। उन्होंने बताया कि अब तक पार्षद महापौर विधानसभा लोकसभा यहां तक की राष्ट्रपति चुनाव के लिए भी नामांकन पत्र दाखिल कर चुके हैं।

ग्वालियर कलेक्ट्रेट स्थित जिला निर्वाचन कार्यालय पहुंचे आनंद कुशवाहा ने बताया कि 'वे आने वाले 18 अप्रैल के दिन अपना नामांकन फॉर्म जमा करेंगे। उन्हें उम्मीद है कि इस बार का चुनाव शायद उनके हक में होगा।
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आनंद कुशवाहा से जब पूछा गया कि उनके सामने भारतीय जनता पार्टी के भारत सिंह और कांग्रेस के प्रवीण पाठक हैं। इस बात पर आनंद कुशवाहा का कहना है कि 'किसी भी प्रत्याशी को कभी छोटा नहीं समझना चाहिए। यह लोकसभा चुनाव जनता का चुनाव है और जनता किसी को भी चुन सकती है।
दिल में चुभ गई थी पूर्व मंत्री की बात
चायवाले आनंद कुशवाहा के चुनाव लड़ने के इस जुनून के पीछे की कहानी भी सुनिए आनंद कुशवाहा बताते हैं कि, 'अपने समाज में उनका उठाना बैठना था। 1994 में उन्होंने पहली बार पार्षद का चुनाव लड़ने का मन बनाया और फार्म भी भरा।
आनंद कुशवाहा ने आगे बताया उसी चुनाव में पूर्व मंत्री जो उस समय मंत्री नहीं थे नारायण सिंह कुशवाहा भी पार्षद का चुनाव लड़ रहे थे, ऐसे में सामाजिक समन्वय के लिए आनंद कुशवाहा ने अपना नाम वापस ले लिया, लेकिन कुछ वक्त में नारायण सिंह के तेवर बदल गये और उन्होंने आनंद कुशवाह चाय वाले से ऐसे कुछ शब्द कह दिए, जो उनके दिल में घाव कर गई और उन्होंने उसी वक्त फैसला कर लिया कि अब वे हर हाल में चुनाव लड़ेंगे।
चार बार भरा राष्ट्रपति चुनाव के लिए फार्म
आनंद कुशवाहा ने बताया, कि 'वे पिछले तीस वर्षों से चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने पार्षद से लेकर महापौर, विधायक और सांसद तक का चुनाव हर बार लड़ा है। वे अब तक कुल 27 चुनाव लड़ चुके हैं और अब एक बार फिर 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए भी नामांकन फार्म लिया है। हालांकि आनंद कुशवाहा ने राष्ट्रपति पद के लिए भी 2007, 2012, 2017 और 2022 में भी फार्म भरा था, लेकिन कागजी कार्रवाई पूरी नहीं होने से ये मौका अभी नहीं मिल पाया है।
चायवाले का चिन्ह 'केतली', मिला तो लड़े नहीं तो वापस लिया नाम
चाय वाले आनंद कुशवाह ने बताया कि उन्होंने एक बार अलमारी पर चुनाव लड़ा। इसके बाद से वे हर बार केतली के चिन्ह पर चुनाव लड़ते हैं और अगर चुनाव का चिन्ह केतली ना हो तो अब अपना नाम वापस ले लेते हैं। पिछले 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान भी ऐसा ही हुआ। निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान केतली चुनाव चिन्ह किसी दूसरे प्रत्याशी को आवंटित कर दिया गया था, तो उन्होंने अंत में चुनाव से हाथ खींच लिए।
संवाद सूत्र: पंकज श्रीमाली, ग्वालियर/मध्य प्रदेश












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