शानदार ! मिथिला मखाना को जीआई टैग, खत्म हुआ लंबा इंतजार, देश का 90 फीसद मखाना बिहार में होता है पैदा
बिहार के एक और उत्पाद को जीआई टैग मिला है। मिथिला में पैदा होने वाला मखाना अब जीआई टैग वाला हो गया है। bihar mithila makhana gi tag piyush goyal
पटना / नई दिल्ली, 21 अगस्त : बिहार में दर्जनभर से अधिक उत्पाद ऐसे हैं जिन्हें जीआई टैग यानी Geographical Indications टैग दिया जा चुका है। मुजफ्फरपुर की शाही लीची, भागलपुर की सिल्क और मगही पान कुछ उदाहरण हैं। ताजा मामले में मिथिला मखाना को जीआई टैग मिला है। मिथिला मखाना को जीआई टैग मिलने की सूचना केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने ट्वीट कर दी। जानिए मिथिला मखाना की विशेषता और कैसे मिलता है किसी उत्पाद को जीआई टैग।
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Geographical Indications टैग
मिथिला मखाना को जीआई टैग के बारे में सरकार का कहना है कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार ने Geographical Indications टैग दिया है। बता दें कि एक बार जब किसी उत्पाद को भौगोलिक संकेत टैग मिल जाता है, तो कोई भी व्यक्ति या कंपनी उस नाम के तहत एक समान वस्तु नहीं बेच सकती है।

प्रीमियम उपज का अधिकतम मूल्य मिलेगा
सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने के प्रयासों के तहत कहा है कि मिथिलांचल में मखाना उत्पादकों को उनकी प्रीमियम उपज का अधिकतम मूल्य दिलाने में मदद करने के लिए, सरकार ने मिथिला मखाना को भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग से सम्मानित किया है।

गोयल का दावा- किसानों को लाभ मिलेगा
वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने एक ट्वीट में कहा, "मिथिला मखाना जीआई टैग के साथ पंजीकृत हो गया है। किसानों को लाभ मिलेगा और कमाई करना भी आसान होगा। त्योहारों के मौसम में मिथिला मखाना को भौगोलिक संकेत टैग के कारण, बिहार के बाहर के लोग भी इस शुभ सामग्री का श्रद्धा के साथ उपयोग कर सकेंगे।"
यहां देखें गोयल का ट्वीट
10 साल के लिए GI टैग, कोई दूसरा नहीं बेचेगा
अब क्योंकि मिथिला मखाना को जीआई टैग मिल चुका है तो मिथिलांचल के लोगों का लंबा इंतजार तो खत्म हुआ ही है। व्यापारिक नजरिए से देखें तो एक बार किसी उत्पाद को जीआई टैग मिल जाने के बाद, कोई भी व्यक्ति या कंपनी उस नाम से मिलती-जुलती वस्तु नहीं बेच सकती। यह टैग 10 साल की अवधि के लिए वैध है। 10 साल के बाद इसे रिन्यू किया जा सकता है।

निर्यात को बढ़ावा देने का प्रयास
जीआई टैग का सर्टिफिकेट मिलने का एक अन्य फायदों में संबंधित वस्तु की कानूनी सुरक्षा, दूसरों द्वारा अनधिकृत उपयोग के खिलाफ रोकथाम और निर्यात को बढ़ावा देना शामिल है। भारत में पैदा होने वाले उत्पाद APEDA की मदद से एक्सपोर्ट किए जाते हैं।

जीआई मिथिलांचल मखाना उत्पादक संघ के नाम
जीआई टैग मुख्य रूप से कृषि, प्राकृतिक या निर्मित उत्पाद (हस्तशिल्प और औद्योगिक सामान) को दिया जाता है। टैग वाले उत्पाद निश्चित भौगोलिक क्षेत्र में उत्पन्न होते हैं। मिथिला मखाना को जीआई रजिस्ट्री प्रमाणपत्र के अनुसार यह प्रमाणित किया गया है कि जीआई मिथिलांचल मखाना उत्पादक संघ के नाम से पंजीकृत है। मखाने की लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि जेपी नड्डा व अन्य नेताओं के मिथिलांचल दौरे के दौरान उन्हें मखाने की माला पहनाई गई थी।

90% मखाना बिहार में पैदा होता है
मिथिला मखाना को जीआई टैग दिए जाने के बाद यूपी कैडर के आईपीएस अधिकारी सुकीर्ति माधव मिश्रा ने भी खुशी जाहिर की। उन्होंने ट्वीट कर लिखा, इससे बिहार के मखाना किसानों को आर्थिक मदद मिलने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, मखाना प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम आदि से भरपूर होता है। इसका उपयोग स्वस्थ स्नैकिंग / व्रत / खीर आदि बनाने में किया जाता है। उन्होंने कहा, देशभर के कुल मखाना उत्पादन का 90% बिहार में पैदा होता है।
यहा देखें IPS सुकृति का ट्वीट
ऐसे मिलता है GI टैग
बता दें कि मखाना को जीआई टैग मिलने से पहले गुणवत्ता और विशिष्टता को प्रमाणित किया गया। जीआई उत्पादों के पंजीकरण की प्रक्रिया निर्धारित है। इसमें आवेदन दाखिल करना, प्रारंभिक जांच और परीक्षा, कारण बताओ नोटिस, भौगोलिक संकेत पत्रिका में प्रकाशन, पंजीकरण का विरोध और पंजीकरण शामिल है।
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